हिंदी हमारी सांस्कृतिक पहचान, राष्ट्रीय एकता और जनसंवाद का सशक्त माध्यम : आयुक्त

सरकारी कामकाज में सरल हिंदी के प्रयोग पर जोर
दुमका। हिंदी दिवस के अवसर पर सोमवार को आयुक्त कार्यालय सभागार में विशेष समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ संथाल परगना प्रमंडल के आयुक्त शैलेंद्र कुमार लाल ने दीप प्रज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था। इसी ऐतिहासिक निर्णय की स्मृति में प्रत्येक वर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है। हिंदी केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता का मजबूत आधार है। सरल एवं सहज हिंदी प्रशासन और आम जनता के बीच संवाद को अधिक प्रभावी बनाती है।

फाइलों और पत्राचार में सरल हिंदी का हो प्रयोग
आयुक्त ने सरकारी फाइलों, पत्राचार, आदेशों एवं सूचनाओं में सरल, स्पष्ट और जनसामान्य की समझ में आने वाली हिंदी के प्रयोग को प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने कहा कि इससे आम नागरिक सरकारी योजनाओं, नियमों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को आसानी से समझ सकेंगे तथा प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और कार्यकुशलता बढ़ेगी। बदलते तकनीकी दौर में कंप्यूटर, ई-ऑफिस, सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल माध्यमों पर हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता भी उन्होंने बतायी। नई पीढ़ी को हिंदी साहित्य के साथ विज्ञान, तकनीक और आधुनिक ज्ञान के क्षेत्र में हिंदी के प्रयोग से जोड़ने पर भी जोर दिया गया।

भाषा विवाद का विषय नहीं, संवाद का माध्यम : सात्विक
वन प्रमंडल पदाधिकारी सात्विक ने कहा कि भाषा का मूल उद्देश्य संवाद स्थापित करना है। जिस स्थान, समाज और परिवेश में हम रहते हैं, वहां की भाषा को समझना और अपनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भाषा समाज के लिए है और अपनी सुविधा व आवश्यकता के अनुसार अधिक से अधिक भाषाएं सीखनी चाहिए। मूक-बधिर विद्यालय के बच्चों की भाषा और उनकी अभिव्यक्ति को समझने का प्रयास भी जरूरी है। उन्होंने सोशल मीडिया के दौर का उल्लेख करते हुए कहा कि बोलचाल और साहित्य की भाषा में अंतर हमेशा रहा है। केवल सोशल मीडिया पर लिखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि लोगों को नियमित रूप से हिंदी की पुस्तकें और साहित्य पढ़ने की आदत विकसित करनी चाहिए।

हिंदी का महत्व अगली पीढ़ी तक पहुंचाना दायित्व
अपर समाहर्ता ने कहा कि हिंदी पूरे भारत में लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है। हमारी संस्कृति, साहित्य और महान लेखकों की रचनाओं में भारतीय मूल्यों की समृद्ध परंपरा समाहित है। हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग और संवर्धन से साहित्य के माध्यम से पूर्वजों द्वारा दिए गये ज्ञान और मूल्यों को आगे बढ़ाया जा सकता है। सेवानिवृत्त प्रतिकुलपति, सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय, दुमका डॉ. प्रमोदिनी हांसदा ने कहा कि हिंदी दिवस पर ली गयी शपथ को परिवार और परिचितों के बीच भी व्यवहार में लाने का प्रयास होना चाहिए। उन्होंने कहा कि दुमका के सामाजिक जीवन और दैनिक दिनचर्या में हिंदी का महत्वपूर्ण स्थान है तथा पुस्तकों के माध्यम से हिंदी को समझने और जीवन में अपनाने की आवश्यकता है।

हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग की ली शपथ
समारोह के दौरान उपस्थित पदाधिकारियों, अतिथियों और कर्मियों ने हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग एवं प्रचार-प्रसार से संबंधित शपथ ग्रहण की। इस अवसर पर डॉ. खिरोधर प्रसाद, डॉ. चतुर्भुज नारायण मिश्र, डॉ. विनय कुमार, डॉ. प्रमोदिनी हांसदा, अमरेंद्र सुमन, अरुण कुमार सिन्हा, डॉ. मनोज कुमार घोष, अशोक सिंह, डॉ. यदुवंश प्रणय, अंजनी शरण, सौरव सिन्हा सहित अन्य उपस्थित थे।





Comments