मुक्तिधाम की बदली तस्वीरसाफ-सफाई से लेकर मरम्मत तक करायी, अब हो रहा रंग-रोगन

सौंदर्यीकरण और रखरखाव का बीड़ा
दुमका जिला मारवाड़ी सम्मेलन ने समाजहित में अनुकरणीय पहल करते हुए विजयपुर मुक्तिधाम के सौंदर्यीकरण और रखरखाव का बीड़ा उठाया है। पिछले 4-5 महीनों से संस्था के सदस्यों के प्रयास से कभी गंदगी और झाड़ियों से घिरे रहने वाले मुक्तिधाम की तस्वीर बदल रही है। पानी की समस्या दूर करने के लिए बोरिंग कराकर मोटर लगायी गयी है। परिसर के सभी शेड की मरम्मत के साथ दाह संस्कार स्थलों की संख्या 2 से बढ़ाकर 3 कर दी गयी है। मुख्य प्रवेश द्वार की मरम्मत, रंग-रोगन, डस्टबिन निर्माण और जेसीबी से परिसर का समतलीकरण भी कराया गया है।

नदी तक पहुंचने का रास्ता होगा बेहतर
मुक्तिधाम परिसर से नदी तक जाने वाले एप्रोच पथ को भी बेहतर बनाया जा रहा है, ताकि अंतिम संस्कार के दौरान पानी लाने और आवाजाही में लोगों को परेशानी न हो। संस्था की ओर से अब पर्यावरण संतुलन के लिए बड़े पैमाने पर पौधरोपण की तैयारी की जा रही है। सम्मेलन के सदस्यों के अनुसार पिछले 4 महीनों में सामाजिक स्तर पर कई जरूरी कार्य कराये गये हैं। हाल में अंतिम संस्कार के लिए यहां पहुंचे परिवारों ने भी इन सुविधाओं से राहत महसूस की है।

चारदीवारी और हाई मास्ट लाइट की जरूरत
मारवाड़ी सम्मेलन के सदस्यों का कहना है कि मुक्तिधाम में चारदीवारी नहीं होने के कारण कराये गये सौंदर्यीकरण को स्थायी बनाए रखना चुनौतीपूर्ण है। बाहर से पशुओं का परिसर में आना-जाना लगा रहता है। इसके अलावा खराब पड़ी हाई मास्ट लाइट को चालू कराने और सीढ़ी घाट का निर्माण कराने की भी जरूरत है। बिनोद सिंघानिया ने कहा कि चारदीवारी, नदी पर घाट और हाई मास्ट लाइट को चालू कराने जैसे कार्यों के लिए प्रशासनिक पहल जरूरी है। प्रशासन संस्था को संचालन की जिम्मेदारी देता है तो समाज की ओर से मुक्तिधाम के रखरखाव में बेहतर भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।

स्थायी विकास के लिए प्रशासन से सहयोग की अपील
सुनील कोठरीवाल ने कहा कि पहले अंतिम संस्कार के लिए लोगों को भागलपुर, तारापीठ और जंगीपुर जैसी जगहों पर जाना पड़ता था, लेकिन विजयपुर मुक्तिधाम बनने के बाद दुमका शहर के साथ आसपास के लोग भी यहीं पहुंचते हैं। ऐसे में मुक्तिधाम को बेहतर और सुंदर बनाना जरूरी है। बिजली नहीं रहने पर अंतिम संस्कार के लिए आने वाले स्वजनों को परेशानी होती है। उन्होंने कहा कि चारदीवारी के अभाव में सौंदर्यीकरण को स्थायी रखना मुश्किल है। सम्मेलन ने जिला प्रशासन से इन समस्याओं के समाधान की पहल करने की अपील की है।





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