मोबाइल की रौशनी में बीतेगी जलसहिया की रात
- SANTHAL PARGANA KHABAR
- Sep 24, 2025
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Updated: Sep 25, 2025

बकाया मानदेय भुगतान की मांग को लेकर बैठी धरना पर
दुमका। शारदीय नवरात्र का त्यौहार चल रहा है। दुमका ही नहीं पूरा देश में उत्सवी माहौल है। लोग शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा की आराधना में लीन है, लेकिन इस सबसे अलग दुमका के पेय जल एवं स्वच्छता विभाग कार्यालय परिसर में सैकड़ों की संख्या में जल सहिया अनिश्चितकालीन धरना पर बैठी है। इनकी बस एक ही मांग है कि एक वर्ष का बकाया मानदेय का भुगतान किया जाए। इन आंदोलनकारियों की रातें मोबाइल की रौशनी के सहारे बीत रही है।

जबतक मांग पूरी नहीं हो जाती तब तक धरना जारी ः रजनी
झारखंड प्रदेश जल सहिया यूनियन की जिलाध्यक्ष रजनी मिर्धा का कहना है कि दुर्गा पूजा जैसे समय में घर परिवार से दूर छोटे छोटे बच्चों के साथ महिलाएं शौक से धरना पर नहीं बैठी है। हम अपने अधिकार की मांग को लेकर बैठे है। एक तो अल्प मानदेय दिया जाता है वह भी एक वर्ष से नहीं मिला है। आखिर कैसे पूजा मनाएंगे। यूनियन के प्रमंडलीय संरक्षक विजय कुमार दास का कहना है कि झारखंड सरकार द्वारा तीन महीने पूर्व ही विभाग को आवंटन दिया गया है लेकिन स्थानीय अधिकारी की लापरवाही के कारण जल सहिया को मानदेय का भुगतान नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि जब तक मांग पूरी नहीं हो जाती तब तक धरना जारी रहेगा।

कार्यपालक अभियंता के साथ पहले दौर की वार्ता विफल
दुमका। बकाया मानदेय के भुगतान को लेकर अनिश्चितकालीन धरना पर बैठी जल सहियाओं और पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के प्रमंडल-2 के कार्यपालक अभियंता के बीच बुधवार की शाम पहले दौर की वार्ता शुरू होने से पहले ही विफल हो गयी। कार्यपालक अभियंता रमेश कुमार लोहरा ने बताया कि वह सुबह नौ बजे कार्यालय पहुंच गये थे पर उसके बाद विभागीय काम से जिले के रामगढ़ ब्लॉक चले गये। 11ः30 बजे जल सहियाओं के धरना पर बैठने की जानकारी मिली तो उन्होंने तुरंत आने में असमर्थता जताते हुए मोबाइल पर वार्ता करने की पेशकस की पर उसे ठुकरा दिया गया। वह शाम के 7ः30 बजे जब वापस लौटे तो सहियाओं से वार्ता के लिए अपने चेंबर गये और उनमें से 3-4 को वार्ता के लिए बुलवाया पर उनकी मांग थी कि अधिकारी उरत्रनसे बाहर आकर उनके बीच बैठकर वार्ता करे, जो संभव नहीं था, इस कारण वार्ता हो नहीं पायी।

विभाग के प्रधान सचिव के निर्देश से आयी अड़चन
दुमका। कार्यपालक अभियंता रमेश कुमार लोहरा ने बताया कि जल सहियाओं के मानदेय के लिए जिला में फंड आ गया है। वह भुगतान करने को भी तैयार हैं और उसकी प्रक्रिया जारी है। उन्होंने बताया कि दरअसल शुक्रवार को विभाग के प्रधान सचिव ने वीसी में निर्देश दिया था कि सहियाओं को उनके काम के आधार पर ही मानदेय का भुगतान करना है जिसके आलोक में उन्होंने जिला स्तर पर शनिवार को चिट्ठी जारी कर दी। वह प्रक्रिया के तहत मानदेय के भुगतान में लगे हुए हैं। मुखिया ने सहियाओं की नियुक्ति की है तो काम के सत्यापन की भी एक प्रक्रिया होती है और मोबाइल से रातोंरात भुगतान करना संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि सहियाओं की मांग से लेकर उनके आंदोलन और मानदेय के भुगतान की प्रक्रिया के बारे में उन्होंने जिले के उपायुक्त और उप विकास आयुक्त को अवगत करवा दिया है।





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