“पूरा मामला अंधविश्वास का है, वह अकेली नहीं थी!”, “इस हत्याकांड में और लोग भी शामिल हैं!” दुमका के 2 मासूमों की मौत: विजयकांत सिंह ने खोले कई राज,

विजयकांत सिंह ने जताई अन्य लोगों की संलिप्तता की आशंका
दुमका के 2 मासूम बच्चों की हत्या के मामले में विजयकांत सिंह ने आशंका जताई है कि इस घटना में महिला के अलावा अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। उन्होंने प्रशासन से मामले से जुड़े सभी संदिग्धों से पूछताछ करने की मांग की। विजयकांत सिंह ने कहा कि जब बच्चे अपनी मां और चाची पर विश्वास नहीं कर सकते, तो आखिर किस पर भरोसा करेंगे। उन्होंने इस हत्याकांड में शामिल सभी लोगों को फांसी की सजा देने की मांग भी की। हालांकि, अन्य लोगों की संलिप्तता और उनकी भूमिका को लेकर लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

बच्चों की तलाश के दौरान गुमराह करने का आरोप
विजयकांत सिंह के अनुसार, बच्चों की तलाश के दौरान स्थानीय लोगों ने उन्हें और प्रशासन को कथित तौर पर 3-4 घंटे तक गुमराह किया। उन्होंने बताया कि कभी बच्चों के नदी में होने, तो कभी पानी में होने की बात कही जा रही थी। रेलवे पटरी के आसपास करीब 1 किलोमीटर तक प्रशासन के साथ तलाश की गई, लेकिन बच्चों का पता नहीं चला। विजयकांत ने दावा किया कि अगले दिन तड़के करीब 4 बजे महिला के चाचा का फोन आने के बाद उन्होंने थाना प्रभारी को सूचना दी और उनके साथ महिला के घर पहुंचे। उन्होंने बच्चों के कपड़ों से जुड़ी जानकारी भी दी और कहा कि संबंधित कपड़े उनके पास हैं, जिन्हें अभी पुलिस को नहीं सौंपा गया है।

महिला की 3 महीने की बेटी की मौत पर भी उठाए सवाल
विजयकांत सिंह ने दावा किया कि महिला की 3 महीने की एक बेटी की पहले भी मौत हुई थी। उनके अनुसार, बच्ची दिनभर स्वस्थ थी, लेकिन शाम को तेल लगाने के दौरान उसकी मौत हो गई थी। उन्होंने इस घटना का जिक्र करते हुए पूरे मामले की गहराई से जांच की आवश्यकता जताई। हालांकि, पूर्व में हुई बच्ची की मौत के कारण और मौजूदा हत्याकांड से उसके किसी संबंध के बारे में कोई पुष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए इस दावे की स्वतंत्र जांच आवश्यक है।

पति ने सुनाई बच्चों के लापता होने की कहानी
बच्चों के पिता बिक्रम सिंह ने बताया कि परिवार पहले चुटोनाथ पहाड़ और सेल्फी ब्रिज घूमने गया था। इसके बाद वे मेला पहुंचे और पेट्रोल पंप के सामने गाड़ी खड़ी की। उनके अनुसार, पत्नी ने बच्चों को खिलौने खरीदने के लिए ले जाने की बात कही और दोनों बच्चों को लेकर चली गई। काफी देर तक वापस नहीं लौटने पर उन्होंने फोन किया, लेकिन मोबाइल बंद मिला। इसके बाद वे नगर थाना पहुंचे। वहां तत्काल जानकारी नहीं मिलने पर उन्होंने 112 पर फोन किया, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची। बिक्रम सिंह के मुताबिक, उन्हें महिला के पोड़ैयाहाट जाने की जानकारी और लोकेशन दी गई, जिसके आधार पर वे रात करीब 2 बजे सरैयाहाट पहुंचे और तलाश की, लेकिन बच्चे नहीं मिले।

चैटिंग में नदी, पूजा-पाठ और बच्चों के खेलने का जिक्र
बिक्रम सिंह ने बताया कि पत्नी फोन कॉल रिसीव नहीं कर रही थी, लेकिन मोबाइल पर चैटिंग कर रही थी। उनके अनुसार, संदेशों में महिला ने कभी पोड़ैयाहाट की नदी में होने, कभी दही-चूड़ा खाने और कभी पानी के भीतर होने की बात कही। चैट में शरीर पर कपड़े नहीं होने और बच्चों के खेलने का भी जिक्र था। बिक्रम सिंह ने कहा कि उन्हें पहले किसी विवाद या झगड़े की जानकारी नहीं थी और न ही उन्हें घटना के पीछे किसी पूर्व नियोजित योजना का अंदेशा था। उन्होंने आशंका जताई कि बच्चों को साथ ले जाने वाली महिला ही उनकी मौत के लिए जिम्मेदार हो सकती है। इस बीच, दोनों बच्चों के शव कुएं से बरामद होने के बाद मामले ने गंभीर रूप ले लिया है।

पुलिस जांच से खुलेगा घटना का पूरा सच
इस मामले में विजयकांत सिंह के दावों और बच्चों के पिता के बयान के आधार पर कई सवाल उठ रहे हैं। इनमें अन्य लोगों की संभावित भूमिका, बच्चों की तलाश के दौरान कथित तौर पर दी गई अलग-अलग जानकारियां और महिला की छोटी बेटी की पूर्व में हुई मौत से जुड़े सवाल शामिल हैं। इन सभी बिंदुओं की पुष्टि पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकती है। फिलहाल, मामले में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता या पूर्व की घटना से संबंध को स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता।





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