पारंपरिक भैंसा लड़ाई में 35 टीमों ने लिया हिस्सा

बिराजपुर में पांच घंटे तक चली प्रतियोगिता,
गोपीकांदर और पाकुड़िया प्रखंड की सीमा पर स्थित बिराजपुर में गुरुवार को एक दिवसीय पारंपरिक भैंसा लड़ाई प्रतियोगिता सह मेले का आयोजन किया गया। करीब 5 घंटे तक चली इस प्रतियोगिता में 30 से 35 टीमों ने हिस्सा लिया। गोपीकांदर, शिकारीपाड़ा, काठीकुंड और महेशपुर प्रखंड के विभिन्न गांवों से भैंसा मालिक सुबह से ही अपने-अपने भैंसों के साथ पहुंचने लगे थे। प्रतियोगिता देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटे।

पातपहाड़ी की टीम प्रथम, बड़ाउदानी दूसरे स्थान पर
प्रतियोगिता में पातपहाड़ी की टीम ने प्रथम, बड़ाउदानी की टीम ने द्वितीय और लेदापाड़ा की टीम ने तृतीय स्थान हासिल किया। मुख्य अतिथि पाकुड़ जिला परिषद अध्यक्ष जूली क्रिस्टमिनी हेंब्रम ने तीनों विजेता टीमों के मालिकों को कुल 10 हजार रुपये की पुरस्कार राशि देकर सम्मानित किया। आयोजन के दौरान पारंपरिक प्रतियोगिता को देखने के लिए ग्रामीणों में खासा उत्साह देखा गया।

पूर्वजों की परंपरा को जीवित रखना गर्व की बात : जूली
दर्शकों को संबोधित करते हुए जूली क्रिस्टमिनी हेंब्रम ने कहा कि आधुनिक दौर में गांव-गांव में फुटबॉल प्रतियोगिताएं आयोजित हो रही हैं और क्रिकेट का प्रभाव भी लगातार बढ़ रहा है। ऐसे समय में तिलबड़िया और बिराजपुर के युवाओं द्वारा पूर्वजों की पारंपरिक भैंसा लड़ाई को जीवित रखना गर्व की बात है। उन्होंने इसे आदिवासी संस्कृति, परंपरा और विरासत को संरक्षित करने का सराहनीय प्रयास बताया।

नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ने पर जोर
जिला परिषद अध्यक्ष ने क्लब के सदस्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़कर रखना जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी अपनी विरासत को जान सकें और उसे आगे बढ़ा सकें। मौके पर सिदो-कान्हू क्लब, तिलबड़िया के सचिव अनूप मुर्मू, कोषाध्यक्ष पिंटू टुडू सहित सैकड़ों लोग मौजूद थे।





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