दुमका में दूसरा मेडिकल कॉलेज शुरू, सिदो-कान्हू मेडिकल कॉलेज में पहले एमबीबीएस बैच का शुभारंभ

उपायुक्त ने छात्रों को पहनाया व्हाइट कोट और प्रदान किया स्टेथोस्कोप
दुमका। दुमका जिले में फूलो झानो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के बाद दूसरा मेडिकल कॉलेज भी शुरू हो गया है। रानीश्वर प्रखंड के पाथरबागान-सादीपुर स्थित सिदो-कान्हू मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में पहले एमबीबीएस 2026 बैच का सोमवार को शुभारंभ हुआ। उपायुक्त अभिजीत सिन्हा, पुलिस अधीक्षक पीतांबर सिंह खेरवार, कॉलेज के चेयरमैन राधेश्याम राय सहित अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत की। उपायुक्त ने कहा कि सुदूर ग्रामीण क्षेत्र में मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल का संचालन जिले के लिए गौरव की बात है। यहां से शिक्षा प्राप्त कर विद्यार्थी चिकित्सक बनकर देश और समाज की सेवा करेंगे तथा संस्थान के अस्पताल से क्षेत्र के लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधा भी मिलेगी।

व्हाइट कोट और स्टेथोस्कोप पाकर उत्साहित हुए विद्यार्थी।
उपायुक्त ने संस्थान में उपलब्ध व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि विद्यार्थियों को अध्ययन के लिए बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। इस अवसर पर उन्होंने कई एमबीबीएस छात्र-छात्राओं को व्हाइट कोट और स्टेथोस्कोप प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया तथा पूरी लगन और प्रतिबद्धता के साथ पढ़ाई करने का संदेश दिया। समारोह को डायरेक्टर प्रो. डॉ. मुरली आर. नैयर, एसकेएमयू के डीडीए डॉ. जैनेन्द्र यादव, विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. अब्दुस सत्तार, कॉलेज की सचिव मीरा चौधरी, प्रिंसिपल प्रो. डॉ. रेणु रोहतगी और मेडिकल सुपरिटेंडेंट प्रो. डॉ. प्रदीप कुमार ने भी संबोधित किया।

एसपी ने विद्यार्थियों को दिया सुरक्षा का भरोसा। पुलिस अधीक्षक पीतांबर सिंह खेरवार ने कहा कि मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों से छात्र-छात्राओं ने नामांकन लिया है। कई विद्यार्थी परिवार और अभिभावकों से दूर रहकर यहां अध्ययन करेंगे। ऐसे में उनकी सुरक्षा को लेकर पुलिस प्रशासन पूरी तरह तत्पर है। विद्यार्थियों को सुरक्षित एवं अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक सहयोग और समन्वय सुनिश्चित किया जाएगा। कॉलेज के चेयरमैन राधेश्याम राय ने कहा कि वीर शहीद सिदो-कान्हू की धरती पर उनके नाम से मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल की स्थापना होना गौरव की बात है। शांत और प्राकृतिक वातावरण में स्थापित यह संस्थान मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

26 साल के संघर्ष के बाद पूरा हुआ मेडिकल कॉलेज का सपना।
सिदो-कान्हू के नाम पर मेडिकल कॉलेज स्थापित करने के लिए राधेश्याम राय ने लंबे समय तक प्रयास किया। वर्ष 2000 में बाबूलाल मरांडी के मुख्यमंत्री रहने के दौरान ट्रस्ट और सरकार के बीच समझौता हुआ था। इसके तहत पत्ताबाड़ी से आगे पहरूडीह में सिदो-कान्हू मेडिकल कॉलेज और 300 बेड का अस्पताल शुरू किया गया था। बाद में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की टीम के निरीक्षण में कॉलेज और अस्पताल में कई गंभीर खामियां बतायी गयीं। तत्कालीन उपायुक्त के स्तर पर हुई जांच में रिपोर्ट में कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आने के बाद प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी। इसके बाद राधेश्याम राय ने पहरूडीह की रैयती जमीन छोड़कर रानीश्वर में जमीन लेकर मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की दिशा में प्रयास जारी रखा।

संघर्ष के बाद रानीश्वर में शुरू हुआ संस्थान।
मेडिकल कॉलेज की स्थापना के प्रयासों के दौरान राधेश्याम राय को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा और उनके अनुसार इस संघर्ष में उन्हें कई महीने जेल में भी बिताने पड़े। इसके बावजूद उन्होंने मेडिकल कॉलेज शुरू करने का प्रयास जारी रखा। अंततः 26 साल बाद रानीश्वर के पाथरबागान-सादीपुर में सिदो-कान्हू मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में पहले एमबीबीएस बैच का शुभारंभ हुआ। संस्थान के शुरू होने से जहां मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में दुमका को एक और संस्थान मिला है, वहीं ग्रामीण क्षेत्र में चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार की उम्मीद भी बढ़ी है।





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