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दुमका के जामा में आपत्तिजनक हालत में पकड़ा गया शादीशुदा प्रेमी जोड़ा, जमकर हुआ बवाल और ड्रामा

दरवाजा खुलते ही फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, दोनों को पोल से बांधा

दुमका। जिले के जामा थाना अंतर्गत नावाडीह गांव में सोमवार रात उस वक्त हड़कंप मच गया, जब ग्रामीणों ने एक शादीशुदा प्रेमी जोड़े को आपत्तिजनक स्थिति में रंगे हाथों पकड़ लिया। गुस्से से भरे ग्रामीणों ने दोनों की जमकर पिटाई की, दोनों को एकसाथ रस्सी से बांधा और पूरी रात बंधक बनाकर रखा। घटना ने पूरे गांव की शांति को झकझोर कर रख दिया। ग्रामीणों के अनुसार प्रदीप मंडल, जो गांव में ग्राहक सेवा केंद्र (सीएससी) चलाता है, पहले से शादीशुदा है। इसके बावजूद उसका गांव की ही एक विवाहित महिला से लंबे समय से प्रेम संबंध चल रहा था। महिला का पति रोजी-रोटी के लिए बाहर रहता है, इसी का फायदा उठाकर प्रदीप चोरी-छिपे उसके घर आता-जाता था। सोमवार रात महिला के देवर को घर के अंदर कुछ गड़बड़ होने का शक हुआ। काफी देर तक दरवाजा पीटने के बाद जब दरवाजा खुला, तो कमरे के अंदर का नजारा देखकर उसके होश उड़ गए। देवर के शोर मचाते ही ग्रामीण जुट गए और दोनों को पकड़कर रस्सी से बांध दिया गया।

रातभर बंधक, सुबह पहुंची पुलिस और मायके पक्ष

दुमका। घटना की सूचना मंगलवार सुबह जामा थाना पुलिस को दी गई। साथ ही महिला के मायके वालों को भी बुलाया गया। मौके पर पहुंचकर मायके पक्ष ने बातचीत शुरू की, इसी बीच पुलिस भी पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद प्रेमी जोड़े को ग्रामीणों के कब्जे से मुक्त कराया।

थाना में बयान, कानून ने दी ढाल

दुमका। पुलिस दोनों को जामा थाना लेकर गई, जहां प्रेमी जोड़े ने लिखित बयान दिया कि वे दोनों बालिग हैं और अपनी मर्जी से साथ रहना चाहते हैं। बयान के आधार पर पुलिस ने कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की और दोनों को छोड़ दिया, जिससे ग्रामीणों में और नाराजगी देखी गई।

थाना से निकलते ही मंदिर में शादी

थाना से रिहा होने के बाद घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया। प्रेमी जोड़े ने नावाडीह गांव के एक मंदिर में जाकर शादी कर ली। यह खबर फैलते ही गांव और आसपास के इलाके में चर्चाओं का दौर तेज हो गया।

समाज के सामने बड़ा सवाल

दुमका। घटना के बाद ग्रामीणों के बीच तीखी बहस छिड़ गई है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या विवाहेत्तर संबंध इतने मजबूत हो सकते हैं कि लोग अपना परिवार, समाज और मर्यादा सब कुछ ताक पर रख दें।

कानून बनाम समाज का टकराव आया सामने

दुमका। यह मामला एक बार फिर कानून और सामाजिक सोच के टकराव को उजागर करता है। जहां कानून बालिगों की सहमति को सर्वाेपरि मानता है, वहीं समाज आज भी ऐसे रिश्तों को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है। नावाडीह की यह घटना रिश्तों, नैतिकता और कानून के बीच चल रहे संघर्ष की एक कड़वी लेकिन सच्ची तस्वीर बनकर सामने आई है।

 
 
 

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