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ट्रक हादसे से खुला दो करोड़ की शराब तस्करी का खेल, अंतरराज्यीय सिंडिकेट बेनकाब

दुमका। सरैयाहाट थाना क्षेत्र में एक ट्रक हादसे ने बड़े अंतरराज्यीय शराब तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश कर दिया, जिसमें करीब दो करोड़ रुपये की विदेशी शराब आटा और डिटर्जेंट की बोरियों के नीचे छिपाकर पंजाब से झारखंड के रास्ते बिहार भेजी जा रही थी। नेशनल हाईवे-133 पर जमुनिया के पास सोमवार देर रात पुलिस गश्ती वाहन को देखकर ट्रक चालक तेज गति से भागने लगा, इसी दौरान संतुलन बिगड़ने से ट्रक पलट गया और शराब की पेटियां सड़क पर बिखर गईं। इस अप्रत्याशित हादसे ने उस तस्करी तंत्र को उजागर कर दिया, जो अब तक बेहद सुनियोजित तरीके से सक्रिय था।

चालक फरार, महाराष्ट्र का खलासी गिरफ्तार, छिपाने का तरीका भी चौंकाने वाला

दुमका। हादसे के बाद चालक अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गया, जबकि सह चालक समरेश सिंह (निवासी महाराष्ट्र) को पुलिस ने मौके से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में कई अहम सुराग मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि तस्करों ने शराब की खेप को छिपाने के लिए ट्रक में ऊपर आटा और डिटर्जेंट की बोरियां रखी थीं, ताकि चेकिंग के दौरान किसी को संदेह न हो। यह तरीका इस बात का संकेत है कि तस्कर लगातार नए-नए हथकंडे अपनाकर प्रशासन की निगरानी से बचने की कोशिश कर रहे हैं।

13 ट्रैक्टरों में ढोई गई शराब, पूरी रात चला ऑपरेशन

दुमका। जब्त शराब की मात्रा इतनी अधिक थी कि उसे घटनास्थल से थाना तक पहुंचाने के लिए करीब 13 ट्रैक्टरों का सहारा लेना पड़ा और पूरी रात अभियान चलता रहा। देर रात से लेकर सुबह तक पुलिस और मजदूरों ने मिलकर शराब की बोतलों को एकत्रित किया। स्थिति यह रही कि अगले दिन भी पुलिस पूरी गिनती नहीं कर सकी, जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह खेप कितनी बड़ी थी। इतनी बड़ी बरामदगी ने पुलिस के सामने लॉजिस्टिक और सुरक्षा दोनों तरह की चुनौती खड़ी कर दी।

पांच राज्यों से जुड़ा नेटवर्क, संगठित गिरोह की आशंका मजबूत

दुमका। इस मामले में सबसे अहम पहलू यह है कि शराब पर पंजाब का लेबल, ट्रक उड़ीसा का, खलासी महाराष्ट्र का और रूट झारखंड होते हुए बिहार का था, जो एक बड़े अंतरराज्यीय गठजोड़ की ओर इशारा करता है। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि यह कोई सामान्य तस्करी नहीं, बल्कि कई राज्यों में फैले संगठित गिरोह का हिस्सा है। पुलिस को आशंका है कि यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय है और अलग-अलग राज्यों के जरिए सप्लाई चैन को संचालित कर रहा है।

झारखंड बना ट्रांजिट कॉरिडोर, निगरानी व्यवस्था पर उठे सवालदुमका। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर झारखंड तस्करों के लिए सुरक्षित ट्रांजिट कॉरिडोर क्यों बनता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सीमावर्ती राज्यों की सख्ती के बीच तस्कर ऐसे रास्तों का चयन करते हैं जहां निगरानी अपेक्षाकृत कमजोर हो। यदि इस नेटवर्क पर समय रहते कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह अवैध कारोबार और फैल सकता है। फिलहाल पुलिस फरार चालक की तलाश में जुटी है और गिरफ्तार खलासी से पूछताछ कर पूरे सिंडिकेट की कड़ियां जोड़ने का प्रयास कर रही है, जिससे आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना है।


 
 
 

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