एकलव्य विद्यालयों के विद्यार्थियों ने संसद की कार्यवाही का किया जीवंत प्रदर्शन

राष्ट्रीय युवा संसद प्रतियोगिता में 4 विद्यालयों के 153 विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा
दुमका के सांसद नलिन सोरेन और पूर्व सांसद सुनील सोरेन ने बढ़ाया उत्साह
दुमका। के एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय, काठीजोरिया, दुमका में 29 अक्टूबर को शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए राष्ट्रीय युवा संसद प्रतियोगिता की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलित कर की गई। प्रतियोगिता में एकलव्य मॉडल आवासी विद्यालय (इएमआरजीएस) भोगनाडीह, साहिबगंज के 29, सलगाडीह, तमाड़, रांची के 40, तोड़सुंदरी, पश्चिमी सिंहभूम के 34 और बोझिया, बहराइच, उत्तर प्रदेश के 50 विद्यार्थियों सहित कुल 153 विद्यार्थियों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने भारतीय संसद की कार्यवाही, बहस और विधायी प्रक्रिया का जीवंत प्रदर्शन किया। निर्णायक मंडल ने विभिन्न मानकों पर सभी टीमों के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया।

लोकतांत्रिक समझ और नेतृत्व क्षमता का होगा विकास: नलिन सोरेन
दुमका। कार्यक्रम के विभिन्न सत्रों को संबोधित करते हुए दुमका के सांसद नलिन सोरेन ने कहा कि राष्ट्रीय युवा संसद प्रतियोगिता जनजातीय विद्यार्थियों को देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और संवैधानिक अधिकारों को समझने का बेहतर मंच प्रदान करती है। ऐसे आयोजनों से संवाद कौशल, तार्किक चिंतन और नेतृत्व क्षमता विकसित होती है तथा युवाओं में जिम्मेदार नागरिक बनने की भावना मजबूत होती है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए युवाओं को संसदीय परंपराओं, जनप्रतिनिधियों की भूमिका और कानून निर्माण की प्रक्रिया की जानकारी होना जरूरी है। युवा संसद के माध्यम से विद्यार्थी जनहित के मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाना, दूसरों के विचारों को सुनना और तर्क के आधार पर अपनी बात रखना सीखते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से प्रतियोगिता को सीखने और अपनी प्रतिभा निखारने के अवसर के रूप में लेने की अपील की। सांसद ने सभी प्रतिभागी विद्यालयों और विद्यार्थियों को खेल भावना, अनुशासन और समर्पण के साथ उत्कृष्ट प्रदर्शन करने की शुभकामनाएं दीं।

राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभा दिखाने का अवसर: सुनील सोरेन
दुमका। पूर्व सांसद सुनील सोरेन ने कहा कि एकलव्य विद्यालयों के विद्यार्थियों में अपार प्रतिभा है और यह प्रतियोगिता उनकी क्षमता को राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने कहा कि संसदीय कार्यप्रणाली को व्यावहारिक रूप से समझने से विद्यार्थियों में लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति रुचि बढ़ती है और वे देश की शासन प्रणाली को बेहतर तरीके से जान पाते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि ऐसे आयोजन जनजातीय युवाओं को भविष्य में नीति-निर्माण, सामाजिक विकास और जनहित से जुड़े कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करेंगे। सुनील सोरेन ने विद्यार्थियों को निरंतर अध्ययन करने, तार्किक सोच विकसित करने और समसामयिक विषयों की जानकारी रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सफलता के लिए आत्मविश्वास, अनुशासन और निरंतर प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से संविधान के मूल्यों का सम्मान करने, देश की एकता और अखंडता के प्रति समर्पित रहने तथा समाज के विकास में योगदान देने का आह्वान किया।

लोकतांत्रिक मूल्यों और नेतृत्व क्षमता के विकास पर जोर
दुमका। विद्यालय की प्रभारी प्राचार्य लेफ्टिनेंट सुमिता सिंह ने बताया कि केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय, संसदीय कार्य मंत्रालय और राष्ट्रीय आदिवासी छात्र शिक्षा समिति के सहयोग से आयोजित प्रतियोगिता का उद्देश्य जनजातीय विद्यार्थियों में लोकतांत्रिक मूल्यों, संसदीय प्रक्रियाओं, विधायी कार्यप्रणाली और संवैधानिक सिद्धांतों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को सार्वजनिक भाषण, नेतृत्व, तार्किक चिंतन और निर्णय लेने के कौशल विकसित करने का अवसर मिलता है। प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में नेस्ट कंसल्टेंट बी. पी. गुप्ता, एमजी कॉलेज, रानीश्वर की प्राध्यापक डॉ. रूपम कुमारी और एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य सुजीत कुमार शामिल थे।

इएमआरजीएस तोड़सुंदरी की टीम को पहला पुरस्कार
दुमका। निर्णायकों के मूल्यांकन के आधार पर एकलव्य मॉडल आवासी विद्यालय (इएमआरजीएस) की तोड़सुंदरी, पश्चिमी सिंहभूम टीम ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया। बोझिया, बहराइच, उत्तर प्रदेश को द्वितीय और भोगनाडीह, साहिबगंज को तृतीय स्थान मिला, जबकि सलगाडीह, तमाड़, रांची को सांत्वना पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। राष्ट्रीय युवा संसद प्रतियोगिता के आयोजन में विद्यालय की शिक्षिका पुष्पलता झा, सुजाता झा, संजिता मराण्डी, सुखमती सोनार, अनादी गोराई, रंजु कुमारी, कल्याण गोराई, दीनबंधु, नीतिश राय, मृणालनी हांसदा, मरियम असंतु, रजनीश सिंह, पवन कुमार आदि का सराहनीय सहयोग रहा।





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