दुमका के 45 साल पुराने दोहरे हत्याकांड पर सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी, 70 वर्षीय दोषी की सजा निलंबित
- SANTHAL PARGANA KHABAR
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दुमका के भुरुंडिया गांव से जुड़ा है 1981 का दोहरा हत्याकांड
दुमका जिले के 45 साल पुराने चर्चित दोहरे हत्याकांड की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक प्रक्रिया में अत्यधिक देरी पर गंभीर चिंता जताई है। शीर्ष अदालत ने पूरे मामले को न्यायिक तंत्र की विफलता का उदाहरण बताते हुए 70 वर्षीय एकमात्र जीवित दोषी साइमन सोरेन की सजा निलंबित कर उन्हें रिहा करने का आदेश दिया है। मामला 18 अक्टूबर 1981 को दुमका जिले के भुरुंडिया गांव में हुई दो लोगों की हत्या से जुड़ा है, जिसमें विभूति मंडल और बनारसी मंडल की जान चली गई थी।

धान की कटाई के दौरान हुआ था हमला, 6 लोग हुए थे नामजद
मामले के अनुसार, विभूति मंडल और बनारसी मंडल अपने परिवार के साथ खेत में धान की कटाई कर रहे थे। इसी दौरान पारंपरिक हथियारों से लैस एक भीड़ ने उन पर हमला कर दिया, जिसमें दोनों की मौत हो गई। इस मामले में साइमन सोरेन समेत कुल 6 लोगों को नामजद किया गया था। लंबे समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया के कारण यह मामला दुमका से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और अब 45 साल बाद इस पर शीर्ष अदालत ने न्याय व्यवस्था में देरी को लेकर कड़ी टिप्पणी की है।

22 साल चला ट्रायल, अपील के निपटारे में भी लगे 22 साल
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने झारखंड हाई कोर्ट में अपील के निपटारे में 22 साल से अधिक का समय लगने पर गंभीर सवाल उठाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मामला दर्शाता है कि एक संगीन अपराध की सुनवाई और अपील के निपटारे में असाधारण देरी किस तरह न्यायिक व्यवस्था की गंभीर चुनौती बन सकती है। साइमन सोरेन को वर्ष 2002 में ट्रायल कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जिसे वर्ष 2024 में झारखंड हाई कोर्ट ने बरकरार रखा था।

लंबी कानूनी लड़ाई में 5 आरोपियों की हो चुकी है मौत
मामले की सुनवाई के दौरान ही 6 आरोपियों में से 5 की मौत हो चुकी है। आरोप तय होने से पहले ही 2 आरोपियों की मौत हो गई थी, जबकि अपील के लंबे समय तक लंबित रहने के दौरान 3 अन्य दोषियों ने भी दम तोड़ दिया। अब 70 वर्षीय साइमन सोरेन ही मामले के एकमात्र जीवित आरोपी बचे हैं। वह गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं और अस्पताल में भर्ती बताए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी उम्र, स्वास्थ्य और 45 वर्षों से चली आ रही कानूनी प्रक्रिया को भी अपने आदेश में महत्वपूर्ण माना।

45 साल की मानसिक-शारीरिक पीड़ा को देखते हुए मिली राहत
बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता फौजिया शकील की दलीलों पर विचार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दोहरे हत्याकांड जैसे गंभीर अपराध के बावजूद आरोपी द्वारा पिछले 45 वर्षों में झेली गई मानसिक और शारीरिक पीड़ा तथा गिरते स्वास्थ्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी नोट किया कि साइमन सोरेन ने कुल मिलाकर 2 साल, 4 महीने और 12 दिन ही हिरासत में बिताए हैं। इसके बाद अदालत ने उनकी सजा निलंबित करते हुए निजी मुचलके पर रिहा करने का निर्देश दिया और शर्त रखी कि वह कोई नया अपराध नहीं करेंगे।

दुमका के पुराने मामले ने उठाया देशभर में लंबित आपराधिक अपीलों का सवाल
दुमका के इस 45 साल पुराने मामले के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक मामलों और अपीलों के लंबे समय तक लंबित रहने के व्यापक मुद्दे पर भी चिंता जताई है। शीर्ष अदालत ने आपराधिक अपीलों के भारी बैकलॉग को देखते हुए केंद्र सरकार को पक्षकार बनाया है तथा निचली अदालत और झारखंड हाई कोर्ट से 4 सप्ताह के भीतर मामले के मूल रिकॉर्ड, भौतिक और डिजिटल दोनों रूपों में, तलब किए हैं। मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर को निर्धारित की गई है और अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी या सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को इस संबंध में रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।





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