डीएमएफटी फंड पर सख्त रुख, उपायुक्त की अध्यक्षता में हुई अहम बैठक
- SANTHAL PARGANA KHABAR
- Dec 16, 2025
- 3 min read
दुमका समाहरणालय सभागार में मंगलवार को उपायुक्त सह डीएमएफटी न्यास परिषद के अध्यक्ष अभिजीत सिन्हा की अध्यक्षता में डीएमएफटी न्यास परिषद की महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में जामा विधायक डॉ. लुईस मरांडी, शिकारीपाड़ा विधायक आलोक कुमार सोरेन, विधायक प्रतिनिधि तथा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिले के सभी प्रखंडों के मुखिया शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य डीएमएफटी फंड के पारदर्शी और जनहितकारी उपयोग को सुनिश्चित करना रहा।
खनन प्रभावित क्षेत्र की स्पष्ट परिभाषा, पूरे जिले को मिला दर्जा
बैठक में साफ तौर पर बताया गया कि खनन क्षेत्र से 15 किलोमीटर के दायरे को डायरेक्टली अफेक्टेड एरिया और 25 किलोमीटर के दायरे को इनडायरेक्टली अफेक्टेड एरिया माना गया है। इनडायरेक्टली अफेक्टेड एरिया की श्रेणी में पूरा दुमका जिला शामिल है, जबकि डीएमएफटी फंड का 70 प्रतिशत हिस्सा अनिवार्य रूप से डायरेक्टली अफेक्टेड एरिया में खर्च करना होगा।

फंड खर्च में सख्त नियम, हाई और लो प्रायोरिटी तय
सरकार द्वारा प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना के तहत जारी दिशा-निर्देशों की जानकारी देते हुए बताया गया कि डीएमएफटी फंड का अधिकतम 70 प्रतिशत हिस्सा हाई प्रायोरिटी सेक्टर और न्यूनतम 30 प्रतिशत हिस्सा लो प्रायोरिटी सेक्टर में खर्च करना अनिवार्य है। नियमों की अनदेखी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
हाई प्रायोरिटी सेक्टर में जनजीवन से जुड़ी योजनाएं
हाई प्रायोरिटी सेक्टर में पेयजल आपूर्ति, पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण, स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला एवं बाल कल्याण, वृद्ध और दिव्यांग कल्याण, स्वच्छता, आवास, कृषि, पशुपालन, कौशल विकास और जीविकोपार्जन से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए। साफ संदेश दिया गया कि डीएमएफटी की राशि जनता की मूलभूत जरूरतों पर ही खर्च होगी।
लो प्रायोरिटी सेक्टर भी तय, लेकिन सीमा में खर्च
लो प्रायोरिटी सेक्टर के अंतर्गत आधारभूत संरचना, सिंचाई, ऊर्जा, जलछानन सहित अन्य विकास कार्यों को शामिल किया गया है, लेकिन इन पर खर्च तय सीमा के भीतर ही किया जाएगा, ताकि मुख्य फोकस जनकल्याण पर बना रहे।
ग्राम सभा की भूमिका अनिवार्य, बिना प्रस्ताव Star मिलेगी मंजूरी
उपायुक्त अभिजीत सिन्हा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े सभी मुखियाओं को सख्त निर्देश दिया कि डायरेक्टली अफेक्टेड एरिया में किसी भी विकास कार्य के लिए ग्राम सभा से प्रस्ताव अनिवार्य रूप से भेजें। बिना ग्राम सभा की अनुशंसा के किसी भी योजना को स्वीकृति नहीं दी जाएगी।
विधायकों ने उठाए जमीनी मुद्दे, पेयजल पर जोर
जामा विधायक डॉ. लुईस मरांडी ने डीएमएफटी की राशि का उपयोग जिले के वास्तविक विकास कार्यों में करने की मांग की और पेयजल समस्याओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया। वहीं शिकारीपाड़ा विधायक आलोक कुमार सोरेन ने कहा कि जिला आदिवासी बहुल है, इसलिए समन्वय के साथ ऐसी योजनाएं चुनी जाएं, जिससे खनन प्रभावित क्षेत्रों में जीवन स्तर में ठोस सुधार हो।
डीएमएफटी फंड पर कड़ी निगरानी, हर साल ऑडिट अनिवार्य
उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि डीएमएफटी गाइडलाइन के अनुसार 70 प्रतिशत राशि हाई प्रायोरिटी और न्यूनतम 30 प्रतिशत राशि लो प्रायोरिटी सेक्टर में खर्च की जाएगी। उन्होंने बताया कि डीएमएफटी फंड का प्रतिवर्ष ऑडिट कराया जा रहा है। साथ ही विद्यालयों में बाउंड्री निर्माण, स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एंबुलेंस क्रय और नेत्रहीनों के लिए स्मार्ट ब्लाइंड स्टिक जैसी योजनाओं पर भी फंड खर्च किया जा सकता है।
साफ संदेश: डीएमएफटी फंड जनता के लिए, लापरवाही बर्दाश्त नहीं
बैठक के अंत में उपायुक्त ने दो टूक कहा कि डीएमएफटी से उन्हीं योजनाओं का चयन किया जाएगा, जिनसे अधिकतम आमजन को सीधा लाभ मिले। योजनाओं का चयन ग्राम सभा के माध्यम से होगा और किसी भी तरह की अनियमितता या मनमानी पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।








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