बड़ी खबर : दुमका के संत मोनिका आवासीय विद्यालय से पांच दिन पहले लापता मासूम की लाश मिली
- SANTHAL PARGANA KHABAR
- Aug 27, 2025
- 2 min read

विद्यालय से करीब 200 मीटर दूर एक खेत से बरामद हुआ शव
दुमका। रामगढ़ प्रखंड के संत मोनिका आवासीय विद्यालय, कुशमाहा से बीते शनिवार सं लापता 6 वर्षीय अमन सोरेन का शव बुधवार को विद्यालय से करीब 200 मीटर दूर एक खेत से बरामद हुआ। गौरतलब है कि इससे पहले भी इसी विद्यालय के एक बच्चे की संदिग्ध हालात में मौत हो चुकी है। पूर्व में भी इस स्कूल से कई बार बच्चों के भटक कर अन्यत्र चले जाने का मामला सामने आया था,

ग्रामीणों ने सभी रास्तों को जाम किया, स्कूल का सामान फेंका
घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने रामगढ़ के सभी मुख्य मार्गों को जाम कर दिया और विद्यालय परिसर में तोड़फोड़ की। गुस्साए लोगों ने विद्यालय के सामान को बाहर निकालकर सड़क पर फेंक दिया। ग्रामीण विद्यालय प्रबंधन पर त्वरित कार्रवाई और दोषी की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। मौके पर भारी संख्या में भीड़ जुटी है और पुलिस शव को कब्जे में लेकर जांच में जुटी है।

केरल में रहते हैं बच्चे के माता-पिता
ग्रामीणों ने बताया है कि बच्चे के माता-पिता केरल में रहते हैं और घटना की जानकारी मिलने पर वे दुमका लौट रहे हैं। रामगढ़ पुलिस और ग्राम साथी संस्था की टीम 24 अगस्त से लगातार बच्चे की खोज में लगी हुई थी पर स्कूल प्रबंधन जांच में सहयोग नहीं कर रहा था।

अप्रैल माह में नर्सी कक्षा में लिया था एडमिशन
अमन सोरेन अमड़ा पहाड़ी पंचायत के कुपी गांव का रहने वाला है। वह संत मोनिका विद्यालय में नर्सरी क्लास का छात्र है। उसे इसी वर्ष अप्रैल महीने में विद्यालय में भर्ती किया गया था। शनिवार की रात विद्यालय के संचालक ने अमन के अभिभावक को फोन कर बताया कि उनका बच्चा विद्यालय में नहीं है। रात में ही परिजन विद्यालय पहुंचे और बच्चे की तलाश शुरू की, लेकिन कोई पता नहीं चल सका।

बगल के मैदान में आयोजित खेलकूद में शामिल होने गया था बालक
विद्यालय के प्रबंधक अरुण कुमार ने बताया था कि शनिवार को बगल के मैदान में खेलकूद का आयोजन हो रहा था जिसमें सभी बच्चे शामिल हुए थे,। इसके बाद से अमन विद्यालय नहीं लौटा। जब रात में बच्चों की उपस्थिति ली गई तब अमन गायब पाया गया।

भेंड-बकरी के तरह स्कूल में रखे गये हैं बच्चे
विद्यालय में काफी संख्या में आदिवासी बच्चों का दाखिला लिया गया है। मगर सुविधा नाम की कोई चीज नहीं है भेड़ बकरी की तरह बच्चों को रखा जाता हैद्य विद्यालय में शौचालय नहीं रहने के कारण छोटे-छोटे बच्चों को भी बरसात के दिन में बाहर खेत में शौच करने के लिए भेज दिया जाता है। जरूरत के अनुसार उक्त विद्यालय में पानी की सुविधा भी नहीं है। खेत में बने सिंचाई रूप से पंप सेट के जरिए पानी विद्यालय तक पहुंचाया जाता है।





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