दुमका में अध्यक्ष पद की जंग, युवा सुमित पटवारी ने बिगाड़ा दिग्गजों का गणित
- SANTHAL PARGANA KHABAR
- 1 day ago
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सेवा और प्रबंधन के मॉडल के साथ मैदान में सुमित पटवारी
दुमका। नगर निकाय चुनाव की घोषणा के साथ ही दुमका का सियासी तापमान तेजी से बढ़ गया है और 23 फरवरी को होने वाले मतदान को लेकर राजनीतिक हलचल अपने चरम पर पहुंच चुकी है। इस बार दुमका नगर परिषद का चुनाव ऐतिहासिक होने जा रहा है, क्योंकि 2008 से 2018 तक लगातार तीन चुनावों में अध्यक्ष पद महिला के लिए आरक्षित रहने के बाद पहली बार यह पद अनारक्षित हुआ है, जिससे पुरुष प्रत्याशी भी मैदान में उतर आए हैं और मुकाबला बेहद रोचक बन गया है। अनुभवी और बड़े नामों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा युवा प्रत्याशी सुमित पटवारी की हो रही है, जो अपनी सक्रियता और आक्रामक जनसंपर्क के जरिए दिग्गजों को कड़ी चुनौती देते नजर आ रहे हैं।

कम समय, बड़ा मुकाबला: चुनावी रणभूमि में 15 दिन की जंग
दुमका। चुनाव कार्यक्रम के अनुसार 29 जनवरी से नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी और 4 फरवरी अंतिम तिथि निर्धारित है, जबकि 7 फरवरी को चुनाव चिन्ह आवंटित किए जाएंगे और 23 फरवरी को मतदान होगा। इस तरह वैध प्रत्याशियों को शहर के 21 वार्डों के 40 हजार से अधिक मतदाताओं तक पहुंचने के लिए महज 15 दिन का समय मिलेगा। कम समय में ज्यादा प्रभाव छोड़ने की रणनीति के तहत सुमित पटवारी प्रचार में सबसे आगे नजर आ रहे हैं, जबकि कई दिग्गज प्रत्याशी अब भी चुनावी रणनीति तय करने में जुटे हुए हैं।

जनसंपर्क और सेवा अभियान से बनाई मजबूत पकड़
दुमका। सर्द मौसम में भी सुमित पटवारी लगातार सड़कों पर नजर आए और जरूरतमंदों के बीच कंबल वितरण, 1 जनवरी और मकर संक्रांति जैसे अवसरों पर लंगर आयोजन कर गरीबों को भोजन कराने जैसे कार्यक्रमों के जरिए उन्होंने अपनी पहचान मजबूत की। वार्ड-वार्ड जनसंपर्क, स्थानीय कार्यालयों की शुरुआत और युवाओं के बीच बढ़ती लोकप्रियता ने उन्हें चुनावी समीकरण में एक मजबूत दावेदार के रूप में स्थापित कर दिया है, जिससे पारंपरिक राजनीति के समीकरणों में नया मोड़ आता दिख रहा है।

प्रबंधन मॉडल के साथ विकास का दावा, बिना बोझ शहर विकास का लक्ष्य
दुमका। 39 वर्षीय सुमित पटवारी का मानना है कि नगर परिषद का संचालन मूलतः प्रबंधन का कार्य है, जिसमें सफाई, पेयजल, ड्रेनेज, सड़क, पुल-पुलिया और लाइटिंग जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए प्रभावी मैनेजमेंट सबसे जरूरी है। उनका कहना है कि नगर परिषद के आंतरिक संसाधनों—होल्डिंग टैक्स, दुकानों का किराया, जलकर और अन्य करों—का संतुलित प्रबंधन कर बिना नागरिकों पर अतिरिक्त बोझ डाले शहर के विकास को गति दी जा सकती है। जनता का समर्थन मिलने पर वे प्रशासनिक दक्षता और सेवा आधारित मॉडल से दुमका को नई दिशा देने का दावा कर रहे हैं, जिससे यह चुनाव केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि विकास की सोच की भी सीधी लड़ाई बनता जा रहा है।








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