सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए सख्ती, वाहन जांच अभियान तेज करने का निर्देश

उपायुक्त ने की सड़क सुरक्षा समिति की बैठक, सड़कों पर बने गड्ढों की मरम्मत कराने के दिए निर्देश
दुमका। उपायुक्त अभिजीत सिन्हा की अध्यक्षता में शनिवार को आयोजित सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने, घायलों को त्वरित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए विभिन्न विभागों को आवश्यक निर्देश दिए गए। उपायुक्त ने पिछली बैठक में दिए गए निर्देशों के अनुपालन की समीक्षा करते हुए सड़क सुरक्षा से संबंधित कार्यों में तेजी लाने पर जोर दिया। उपायुक्त ने रोड कंस्ट्रक्शन विभाग को सड़कों पर बने गड्ढों को चिह्नित कर प्राथमिकता के आधार पर उनकी मरम्मत कराने को कहा। साथ ही, सड़कों के किनारे अवैध पार्किंग और अतिक्रमण के कारण यातायात बाधित करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई करने का निर्देश दिया। शहर और आसपास के प्रमुख मार्गों पर आवश्यकता के अनुसार प्लास्टिक आधारित डिवाइडर लगाने तथा उपयुक्त स्थानों पर रंबल स्ट्रिप बनाने की कार्ययोजना तैयार करने को कहा। उन्होंने कन्वेक्स मिरर के उपयोग के प्रति लोगों को जागरूक करने पर भी जोर दिया।

सड़क दुर्घटना में घायल को 1.5 लाख तक का कैशलेस उपचार
दुमका। उपायुक्त ने प्रधानमंत्री सड़क दुर्घटना पीड़ितों के अस्पताल में भर्ती एवं सुनिश्चित उपचार (पीएम राहत) योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करने का निर्देश दिया। इसके तहत मोटर वाहन से हुई सड़क दुर्घटना में पात्र घायल व्यक्ति को निर्धारित प्रावधानों के अनुसार अधिकतम 1.5 लाख तक का कैशलेस उपचार 7 दिनों तक उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। उपायुक्त ने जिले के सभी थाना प्रभारियों, सदर अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और निजी अस्पतालों को योजना की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराने को कहा, ताकि दुर्घटना पीड़ितों को समय पर इसका लाभ मिल सके। उन्होंने अगली बैठक में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या और योजना के तहत उपचार का लाभ पाने वाले लोगों की अद्यतन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

स्कूल बसों और वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था की जांच करने का आदेश
दुमका। जिला परिवहन कार्यालय और थाना प्रभारियों को नियमित वाहन जांच अभियान चलाने का निर्देश देते हुए उपायुक्त ने बिना हेलमेट, बिना सीट बेल्ट, तेज गति और नशे की हालत में वाहन चलाने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा। ड्रिंक एंड ड्राइव के मामलों में जुर्माना और ड्राइविंग लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। स्कूल बसों और अन्य विद्यालयी वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था की जांच करने, नियमानुसार जीपीएस लगाने तथा चालकों और कंडक्टरों का पूरा विवरण उपलब्ध रखने को भी कहा गया। हिट एंड रन मामलों की समीक्षा के दौरान उपायुक्त ने मुआवजा भुगतान में अनावश्यक विलंब नहीं करने और पात्र लाभुकों के आवेदनों का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

डीसी ने की घायलों की मदद कर अस्पताल पहुंचाने की अपील
दुमका। उपायुक्त ने सड़क दुर्घटना में घायलों की मदद कर अस्पताल पहुंचाने वाले गुड समैरिटन यानी राह-वीरों के लिए सदर अस्पताल और सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में अलग रजिस्टर संधारित करने तथा पात्र व्यक्तियों को नियमानुसार प्रोत्साहन उपलब्ध कराने को कहा। उन्होंने आम लोगों से दुर्घटना पीड़ितों की मदद के लिए आगे आने की अपील करते हुए मददगारों की पहचान, निजता और सम्मान की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया। बैठक में मादक पदार्थों के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए भारत सरकार की मानस हेल्पलाइन नंबर 1933 और आधिकारिक पोर्टल के प्रचार-प्रसार का भी निर्देश दिया गया। उपायुक्त ने कहा कि सड़क सुरक्षा के लिए विभागों के बीच बेहतर समन्वय, नियमित निगरानी और यातायात नियमों का कड़ाई से पालन जरूरी है। बैठक में पुलिस अधीक्षक पीतांबर सिंह खेरवार, अनुमंडल पदाधिकारी कौशल कुमार, जिला परिवहन पदाधिकारी, विभिन्न प्रखंडों के अंचल अधिकारी, थाना प्रभारी आदि मौजूद थे।

9 महीनों में 174 हादसों में 163 लोगों की मौत
दुमका। जिले में जनवरी से सितंबर 2026 तक जिले में 174 सड़क हादसों में 163 लोगों की मौत हो चुकी है। यानी सड़क हादसों में हर महीने औसतन करीब 18 लोगों की जान गयी है। जनवरी से सितंबर तक दर्ज दुर्घटनाओं के आंकड़ों पर गौर करें, तो अगस्त सबसे अधिक हादसों वाला महीना रहा। 31 दिनों के अगस्त माह में 26 सड़क हादसे हुए, जिनमें 22 लोगों की मौत हुई। जनवरी में 24 हादसों में 21 लोगों की जान गयी, जबकि अप्रैल में 22 हादसों में 23 लोगों की मौत दर्ज की गयी। मार्च में 21 हादसों में 21 लोगों की मौत हुई। मई में 20 हादसों में 16, जून में 17 हादसों में 14 और जुलाई में 17 हादसों में 18 लोगों की जान गयी। फरवरी में 14 हादसों में 15 तथा सितंबर में 13 हादसों में 13 लोगों की मौत दर्ज की गयी। इन नौ महीनों में 78 लोग गंभीर रूप से घायल हुए, जबकि 40 लोगों को मामूली चोटें आयीं। सवाल है कि आखिर सड़क पर मौत का यह सिलसिला कब थमेगा और हादसे के बाद जिंदगी बचाने के लिए व्यवस्था कितनी तैयार है।

22 करोड़ का क्रिटिकल केयर सेंटर चालू नहीं
दुमका। सड़क दुर्घटना के बाद शुरुआती एक घंटा यानी गोल्डेन आवर घायल की जान बचाने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान प्राथमिक उपचार, रक्तस्राव पर नियंत्रण और जरूरत के अनुसार विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होने से घायल की जान बचने की संभावना बढ़ सकती है। गंभीर मरीज को समय पर अस्पताल पहुंचाना और जरूरत पड़ने पर उच्च चिकित्सा केंद्र में रेफर करना भी महत्वपूर्ण है। जिले में ट्रोमा केयर और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था जरूरी है। दुमका में रिंग रोड पर मेडिकल कॉलेज के सामने 22 करोड़ रुपये की लागत से क्रिटिकल केयर सेंटर (ट्रोमा सेन्टर) बना जरूर है, लेकिन यह अब तक चालू नहीं हो पाया है।





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