शिक्षा की गुणवत्ता के साथ व्यवस्था की विश्वसनीयता भी जरूरी : राज्यपाल

38 स्वर्ण पदक और 15 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि
दुमका। सिदो-कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय के 10वें दीक्षांत समारोह का शुभारंभ अकादमिक शोभायात्रा के साथ हुआ। कुलाधिपति सह राज्यपाल संतोष गंगवार, विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो और कुलपति डॉ. कुनुल कांडिर ने सभी डीन के साथ दीप प्रज्वलित कर समारोह का उद्घाटन किया। इसके बाद स्मारिका का विमोचन किया गया। राष्ट्रगान के बाद विश्वविद्यालय का कुलगीत प्रस्तुत किया गया। समारोह में 38 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक और 15 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई, जबकि लगभग 4,995 विद्यार्थियों को अनुपस्थिति में उपाधियां दी गईं। कुलपति ने बताया कि इस सत्र में 183 नए पीएचडी शोधार्थियों का नामांकन हुआ है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय शोध केंद्र के रूप में आगे बढ़ रहा है और शैक्षणिक सत्र नियमित करने तथा समय पर परीक्षाएं आयोजित कराने की दिशा में प्रयास किए गए हैं।

उपाधि को मंजिल नहीं, नई शुरुआत समझें : राज्यपाल
राज्यपाल सह कुलाधिपति संतोष गंगवार ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि उपाधि उनकी शैक्षणिक यात्रा की महत्वपूर्ण उपलब्धि है, लेकिन इसे मंजिल नहीं, बल्कि नई शुरुआत समझना चाहिए। योग्यता और परिश्रम के साथ ईमानदारी, अनुशासन, विनम्रता और समाज के प्रति संवेदनशीलता भी सफलता के लिए जरूरी हैं। शिक्षा का उद्देश्य केवल सफल व्यक्ति बनना नहीं, बल्कि जिम्मेदार नागरिक बनना भी है। उन्होंने संताल परगना की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, भाषाओं, परंपराओं और लोक ज्ञान को अमूल्य धरोहर बताते हुए इनके संरक्षण के साथ आधुनिक शिक्षा, विज्ञान, तकनीक और शोध को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कृषि, स्वास्थ्य, पर्यावरण, शिक्षा और ग्रामीण विकास जैसी स्थानीय जरूरतों पर आधारित शोध को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

विद्यार्थी हित और समयबद्ध परीक्षा-परिणाम पर जोर
राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालय की प्रत्येक नीति और निर्णय के केंद्र में विद्यार्थी हित होना चाहिए। नियमित कक्षाएं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, शिक्षकों का प्रभावी मार्गदर्शन, पुस्तकालय और प्रयोगशालाओं जैसी सुविधाएं सुनिश्चित की जानी चाहिए। विद्यार्थियों को ऐसा वातावरण मिले, जहां वे निडर होकर प्रश्न पूछ सकें और नए विचार प्रस्तुत कर सकें। उन्होंने शैक्षणिक सत्र नियमित रखने, समय पर परीक्षाएं आयोजित करने और निर्धारित समय सीमा में परिणाम प्रकाशित करने पर जोर देते हुए स्पष्ट अकादमिक कैलेंडर के प्रभावी अनुपालन की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि परीक्षा और परिणाम की प्रक्रिया पारदर्शी, व्यवस्थित और समयबद्ध होनी चाहिए, क्योंकि विद्यार्थियों का समय उनके भविष्य से जुड़ा है। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए उन्होंने युवाओं से ज्ञान, कौशल, नवाचार और उद्यमशीलता के माध्यम से नए अवसर पैदा करने तथा स्थानीय उत्पादन, कारीगरों और पारंपरिक हुनर को प्रोत्साहित करने का आह्वान किया। उन्होंने प्रत्येक शिक्षित व्यक्ति से कम से कम एक जरूरतमंद व्यक्ति को शिक्षा से जोड़ने का संकल्प लेने की अपील की।

मेधावी विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति की घोषणा
कुलपति डॉ. कुनुल कांडिर ने घोषणा की कि मुख्य सभागार में उपस्थित नहीं हो सके विद्यार्थियों को उनके महाविद्यालयों और संबंधित संस्थानों में औपचारिक समारोह आयोजित कर उपाधियां प्रदान की जाएंगी। उन्होंने बताया कि प्रत्येक स्नातकोत्तर विभाग से प्रतिवर्ष एक छात्र और एक छात्रा को सिदो-कान्हू हूल स्मारक छात्रवृत्ति दी जाएगी। इसका उद्देश्य मेधावी विद्यार्थियों, लैंगिक समानता और शोध को प्रोत्साहित करना है। कुलपति ने कहा कि परीक्षा नियंत्रक के प्रयासों से पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया पूरी करने के साथ शैक्षणिक सत्रों को नियमित करने की दिशा में काम हुआ है। विश्वविद्यालय प्रशासन को अधिक पारदर्शी और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बनाने के लिए शोध, नवाचार, खेल, सूचना प्रौद्योगिकी, कला-संस्कृति और प्लेसमेंट जैसे क्षेत्रों में निदेशकों की नियुक्ति की गई है। सीनेट, सिंडिकेट, अकादमिक परिषद और शिकायत निवारण समितियों का भी पुनर्गठन किया गया है।

एक शोधार्थी को विधानसभा अध्यक्ष ने प्रदान की पीएचडी डिग्री
दीक्षांत समारोह के दौरान एक घटनाक्रम ने प्रोटोकॉल और व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए। समारोह में राज्यपाल संतोष गंगवार विद्यार्थियों को डिग्रियां और प्रमाण पत्र प्रदान कर रहे थे। कुछ टॉपर विद्यार्थियों को कुलपति और कुछ को विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो के हाथों स्वर्ण पदक दिलवाया गया, जबकि अन्य शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि राज्यपाल ने प्रदान की। इसी दौरान मंच से घोषणा की गई कि वनस्पति विज्ञान विभाग के शोधार्थी विवेकानंद यादव को पीएचडी की डिग्री विधानसभा अध्यक्ष प्रदान करेंगे। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने उन्हें डिग्री प्रदान की। डिग्री देने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने राज्यपाल की ओर इशारा करते हुए तस्वीर खिंचवाने का आग्रह किया, जिस पर राज्यपाल ने हाथ जोड़कर प्रतिक्रिया दी। एक ही समारोह में एक शोधार्थी के लिए अलग व्यवस्था किए जाने के कारण सवाल उठे कि इसके पीछे कोई निर्धारित प्रोटोकॉल था या विश्वविद्यालय प्रशासन ने विशेष अनुमति ली थी। इस संबंध में विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई स्पष्टीकरण सामने नहीं आया।

समारोह में कई गणमान्य लोग हुए शामिल
दीक्षांत समारोह में जामा विधायक डॉ. लुईस मरांडी, जिला परिषद अध्यक्ष जॉयस बेसरा, उपायुक्त अभिजीत सिन्हा, पुलिस अधीक्षक पीतांबर खेरवार, उपविकास आयुक्त राजीव सचान, जिला परिवहन पदाधिकारी मृत्युंजय कुमार, डॉ. प्रमोदिनी हांसदा सहित सेवानिवृत्त प्राध्यापक और अन्य गणमान्य लोग शामिल हुए।





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