परवेज अली की कमेटी के वित्तीय लेखा-जोखा पर सवाल, अंजुमन कमेटी के हिसाब-किताब को लेकर नया विवाद, जारा खान ने फिर खोला मोर्चा

सीए रिपोर्ट देखने के बाद उठाए सवाल
दुमका की अंजुमन इस्लामिया-सह-मदरसा कमेटी के वित्तीय लेखा-जोखा को लेकर जारा खान ने कमेटी के सदर परवेज अली और अन्य पदाधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। जारा खान के अनुसार, 2 नवंबर 2026 को वह कमेटी कार्यालय पहुंचीं और आय-व्यय का हिसाब देखने की मांग की। शुरुआत में उन्हें हाथ से लिखे रजिस्टर दिखाए गए। उनका आरोप है कि इन रजिस्टरों के आधार पर लोगों से हस्ताक्षर कराए जाते हैं, ताकि यह दर्शाया जा सके कि उन्होंने हिसाब देखकर उसे सही पाया है। जारा खान ने बताया कि बार-बार मांग करने के बाद उन्हें चार्टर्ड अकाउंटेंट की ऑडिट रिपोर्ट दिखाई गई। रिपोर्ट में दर्ज कुछ टिप्पणियों पर उन्होंने आपत्ति जताई और उसकी तस्वीर लेने की कोशिश की, लेकिन कार्यालय में मौजूद लोगों ने कथित तौर पर सदर परवेज अली को आवेदन देने के बाद ही इसकी अनुमति मिलने की बात कही।
रजिस्टर में दर्ज की अपनी टिप्पणी
जारा खान ने बताया कि जब उनसे हाथ से लिखे रजिस्टर देखने के बाद संतुष्टि संबंधी टिप्पणी दर्ज करने को कहा गया तो उन्होंने स्पष्ट रूप से लिखा कि उन्होंने रजिस्टर का अवलोकन किया और रजिस्टर के हिसाब से उसे सही पाया है, जबकि सीए की रिपोर्ट की जांच करने के बाद ही वह संतुष्टि व्यक्त करेंगी। उनका कहना है कि केवल हाथ से लिखे रजिस्टर दिखाकर लोगों से हस्ताक्षर कराना पूरे वित्तीय लेखा-जोखा की पारदर्शिता साबित नहीं करता। उन्होंने सवाल उठाया कि जब संस्था के वित्तीय लेन-देन की जांच के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट की रिपोर्ट मौजूद है तो उसके सभी तथ्यों और टिप्पणियों को भी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाना चाहिए।

एडवांस रजिस्टर संधारित नहीं होने पर सवाल
जारा खान ने सीए की ऑडिट रिपोर्ट के 'ऑब्जर्वेशन एंड इट्स इम्पैक्ट' कॉलम का हवाला देते हुए कहा कि उसमें 'एडवांस रजिस्टर इज नॉट मेंटेनड' यानी एडवांस रजिस्टर संधारित नहीं होने की बात दर्ज है। उन्होंने सवाल उठाया कि संस्था में एडवांस के लेन-देन का रजिस्टर नहीं होने की स्थिति में अग्रिम राशि के भुगतान और उसके समायोजन का हिसाब किस आधार पर रखा गया। उनके अनुसार, संस्था में जनता से प्राप्त चंदे और अन्य मदों से होने वाले लेन-देन की पारदर्शिता के लिए बिल, वाउचर और संबंधित रजिस्टरों का व्यवस्थित रखरखाव जरूरी है। उन्होंने इस कथित कमी को गंभीर वित्तीय अनियमितता बताते हुए इसकी जांच कराने की मांग की है।

5 वर्षों के ऑडिट और सदस्यता शुल्क पर आपत्ति
जारा खान ने बताया कि परवेज अली वर्ष 2016 से पद पर हैं, लेकिन उन्हें दिखाई गई सीए रिपोर्ट वर्ष 2020 से 2025 तक की अवधि से संबंधित है। उन्होंने सवाल उठाया कि 5 वर्षों की रिपोर्ट 15 मई 2026 की एक ही तारीख को तैयार की गई है, इसलिए इसकी प्रक्रिया और पारदर्शिता की जांच होनी चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संस्था के उपनियमों में प्रावधान होने के बावजूद सदस्यों से सदस्यता शुल्क नहीं लिया गया। जारा खान का कहना है कि ऑडिट रिपोर्ट में दर्ज टिप्पणियों, संस्था के मूल अभिलेखों और वित्तीय लेन-देन का मिलान कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।

उच्चस्तरीय जांच और नए चुनाव की मांग
जारा खान ने जिला प्रशासन से मांग की है कि सीए की ऑडिट रिपोर्ट, एडवांस रजिस्टर के संधारण, वित्तीय लेन-देन और डिजिटल दस्तावेजों की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। उन्होंने कमेटी के सदर परवेज अली सहित संबंधित पदाधिकारियों और सदस्यों की भूमिका की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने संस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए वर्तमान कमेटी को हटाकर नए सिरे से चुनाव कराने की अपील की। हालांकि, जारा खान की ओर से लगाए गए आरोपों और ऑडिट रिपोर्ट की टिप्पणियों के आधार पर किसी वित्तीय फर्जीवाड़े की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। कमेटी का पक्ष इस मामले में सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।





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