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राजनीतिक संरक्षण की ढाल में ‘मनमानी का बादशाह’ बना थानेदार ताराचंद?

विवादों, निलंबनों और आरोपों के बावजूद एक ही विधानसभा क्षेत्र में मिलती रही थानेदारी

दुमका। हंसडीहा में पत्रकारों की बर्बर पिटाई के बाद निलंबित हुए थाना प्रभारी ताराचंद यादव को लेकर अब एक बड़ा सवाल दुमका की सड़कों से लेकर सत्ता के गलियारों तक उठ रहा हैकृआखिर किस राजनीतिक संरक्षण की वजह से ताराचंद बार-बार विवादों के बावजूद एक ही विधानसभा क्षेत्र के संवेदनशील थानों की कमान संभालते रहे? सूत्र बताते हैं कि चुनाव से कुछ माह पूर्व पोड़ैयाहाट (गोड्डा) से ट्रांसफर होकर दुमका आए ताराचंद को पहले सरैयाहाट, फिर हंसडीहा थाना दिया गया दोनों थाने एक ही विधानसभा क्षेत्र में आते हैं। अब सवाल उठ रहा है कि यह “संजोग” है या “सजाया गया प्रयोग”?

ताराचंद का विवादों का लंबा इतिहास, तीन बार निलंबन, हर बार फिर बहाली

थाना प्रभारी ताराचंद का नाम कोई नया नहीं है। दुमका हो या गोड्डा विवाद, आरोप और निलंबन उनकी पहचान रहे हैं।

पहला निलंबन- सरैयाहाट थाना प्रभारी रहते आईजी ने निलंबित किया।

दूसरा निलंबन- काठीकुंड थाना में जेएसआई रहते चाय दुकानदार की पिटाई।

तीसरा निलंबन- हंसडीहा में पत्रकार मृत्युंजय पांडे की पिटाई।

हर बार सवाल उठा, हर बार विभागीय जांच की बात हुई। लेकिन हर बार ताराचंद को संवेदनशील थाने की जिम्मेदारी मिलती रही। जनता का सवाल है, आखिर क्यों?

वर्दी की गर्मी और सत्ता की छायाकृकिसके संरक्षण में बढ़ा मनोबल?

स्थानीय लोगों का कहना है कि ताराचंद का व्यवहार वर्षों से आक्रामक और मनमानी भरा रहा है, लेकिन राजनीतिक संरक्षण ने उनके मनोबल को लगातार बढ़ाया। कई स्थानीय संगठनों ने सवाल उठाया है “वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश की अवहेलना कर पत्रकारों को घंटों तक हिरासत में रखनाकृकिसकी ताकत पर?” दुमका के पत्रकार समुदाय की एकजुटता के बाद यह मामला उजागर हुआ है और अब लोग उम्मीद कर रहे हैं कि इस बार कार्रवाई आधी-अधूरी न रहे, बल्कि ताराचंद और उनके तथाकथित राजनीतिक संरक्षकों पर भी जांच हो।

प्रवीण प्रभाकर का तीखा हमला, पुलिस अपराधियों को छोड़ पत्रकारों पर हाथ उठा रही है

दुमका। आजसू पार्टी के केंद्रीय उपाध्यक्ष प्रवीण प्रभाकर ने पत्रकार पिटाई कांड की कड़ी निंदा करते हुए सरकार पर बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने कहा, पत्रकारों का दमन बढ़ा है। कानून व्यवस्था चरमराई। पुलिस अपराधियों को नहीं, पत्रकारों को निशाना बना रही है। ऐसे अफसरों को सेवा से बर्खास्त किया जाना चाहिए। ताराचंद एक सत्तारूढ़ विधायक की शह पर चलता था, इसकी जांच हो। उन्होंने कहा कि यह घटना साबित करती है कि पत्रकार अब राज्य में सुरक्षित नहीं हैं।

राजद जिलाध्यक्ष की प्रतिक्रिया “लोकतंत्र में पत्रकार पर हमला अस्वीकार्य”

दुमका। राजद जिलाध्यक्ष डॉ. अमरेन्द्र यादव ने भी घटना की निंदा की और कहा, पत्रकारों पर हमला लोकतांत्रिक व्यवस्था पर हमला है। ताराचंद के निलंबन का निर्णय सही, लेकिन यह पर्याप्त नहीं। निष्पक्ष जांच और कठोर कार्रवाई हो।

 
 
 

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