बकरी पालन आरडब्ल्यूए विवाद में 1.37 करोड़ के फॉर्च्यूनर बनी चर्चा का केंद्र

दुमका। रीयल वर्ल्ड एसेट्स की कथित बकरी पालन एवं ऑनलाइन निवेश योजना में 1.37 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी का मामला अब फॉर्च्यूनर कार को लेकर भी चर्चा में है। सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय की सहायक प्रोफेसर डॉ. अंजुला मुर्मू ने पहले विनोद सिंह समेत 7 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसके बाद प्राथमिकी में आरोपी बनाई गई सुष्मिता सोरेन ने डॉ. अंजुला मुर्मू समेत 10 लोगों के खिलाफ अलग प्राथमिकी दर्ज कराई। दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच डॉ. अंजुला मुर्मू से जुड़ी बताई जा रही फॉर्च्यूनर कार के फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।

वायरल वीडियो में कार की चाबी सौंपते दिखे विनोद सिंह
दुमका। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में रीयल वर्ल्ड एसेट्स का लोगो दिखाई दे रहा है। वीडियो में विनोद सिंह द्वारा डॉ. अंजुला मुर्मू को फॉर्च्यूनर कार की चाबी सौंपते हुए दिखाया गया है। इसके बाद केक काटने और एक-दूसरे को खिलाने के दृश्य भी हैं। वीडियो पर डॉ. अंजुला मुर्मू को नई फॉर्च्यूनर की मालिक बताते हुए बधाई संदेश लिखा दिखाई देता है। एक अन्य वीडियो में विनोद सिंह को कार की ड्राइविंग सीट पर और बगल में डॉ. अंजुला मुर्मू को बैठे हुए दिखाया गया है। हालांकि, वायरल फोटो और वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

कार के बाद होटल में पार्टी का भी दावा
दुमका। वायरल तस्वीरों के साथ दावा किया जा रहा है कि फॉर्च्यूनर मिलने के बाद शहर के एक होटल में पार्टी आयोजित की गई थी। तस्वीर में डॉ. अंजुला मुर्मू का माला पहनाकर स्वागत किए जाने की बात कही जा रही है। दावा है कि कार्यक्रम में आरडब्ल्यूए से जुड़े कई लोग शामिल हुए और साथ बैठकर भोजन किया। इन दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। महंगी कार खरीदना अपने आप में किसी आर्थिक अनियमितता का प्रमाण नहीं है और इस मामले में कार की खरीद को लेकर दस्तावेजी जांच जरूरी होगी।

कंपनी द्वारा ईएमआई भरने के दावे से उठे सवाल
दुमका। फॉर्च्यूनर को लेकर यह दावा भी सामने आया है कि डॉ. अंजुला मुर्मू ने कुछ डाउन पेमेंट देकर कार खरीदी थी और आरडब्ल्यूए की ओर से उसकी मासिक ईएमआई जमा करने का भरोसा दिया गया था। दावे के अनुसार कंपनी ने करीब 2 महीने तक ईएमआई का भुगतान किया, लेकिन 13 अगस्त के बाद आरडब्ल्यूए का ऑनलाइन मंच बंद हो गया। हालांकि, कंपनी और कार की ईएमआई के बीच वास्तव में कोई समझौता था या नहीं, इसका कोई दस्तावेज फिलहाल सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।

निजी खरीद या आरडब्ल्यूए से जुड़ा लेन-देन?
दुमका। इस पूरे मामले में अब कई सवाल उठ रहे हैं। फॉर्च्यूनर किसके नाम पर खरीदी गई, डाउन पेमेंट किसने किया, खरीद की रकम का स्रोत क्या था और ईएमआई का भुगतान वास्तव में किस खाते से हुआ, इन बिंदुओं की जांच महत्वपूर्ण होगी। यदि आरडब्ल्यूए की ओर से ईएमआई का भुगतान किए जाने का दावा सही है तो उसका आधार और संबंधित बैंक लेन-देन भी जांच के दायरे में आ सकते हैं। दूसरी ओर, यदि यह पूरी तरह निजी खरीद है तो इसे निवेश विवाद से जोड़ने के लिए अलग प्रमाण की आवश्यकता होगी।

2 प्राथमिकी के बीच फॉर्च्यूनर ने बढ़ाई चर्चा
दुमका। आरडब्ल्यूए निवेश विवाद में पहले ही 2 प्राथमिकी दर्ज हो चुकी हैं और दोनों पक्ष एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। अब फॉर्च्यूनर से जुड़े वायरल वीडियो और तस्वीरों ने विवाद को एक नया कोण दे दिया है। डॉ. अंजुला मुर्मू की ओर से कथित तौर पर कहा गया है कि आरडब्ल्यूए कंपनी ने उन्हें भी फंसा दिया और उनकी छवि खराब करने की साजिश की जा रही है। फिलहाल कार की वास्तविक खरीद, भुगतान और ईएमआई से जुड़े तथ्य दस्तावेजों से ही स्पष्ट होंगे। पुलिस जांच में यदि इन लेन-देन की पड़ताल होती है तो फॉर्च्यूनर की पूरी कहानी सामने आ सकती है।





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