फेक आईडी वालों को खुली चुनौती: सामने आओ, सवाल करो — मिक्की झा
- SANTHAL PARGANA KHABAR
- 4 hours ago
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दुमका नगर परिषद अध्यक्ष पद के प्रत्याशी अजय कुमार झा उर्फ मिक्की झा ने सोशल मीडिया पर फेक आईडी से हो रहे कमेंट्स को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि अनर्गल टिप्पणी करने वाले लोग छिपकर राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे ऐसे कमेंट देख रहे हैं लेकिन अब तक प्रशासन से शिकायत नहीं की है। उन्होंने खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि किसी में साहस है तो सामने आकर सवाल पूछे, सार्वजनिक बहस कराए — वे हर समय डिबेट के लिए तैयार हैं।

“एक भी बेईमानी साबित करो, राजनीति छोड़ दूंगा” — मिक्की झा का ऐलान
मिक्की झा ने कहा कि उनके या पूर्व अध्यक्ष श्वेता झा के कार्यकाल में यदि कोई छोटी सी भी बेईमानी या गलत काम साबित कर दे तो वे नगर परिषद की राजनीति से संन्यास ले लेंगे। उन्होंने कहा कि आरोप लगाने वाले लोग फेसबुक पर छिपकर लिखने के बजाय मीडिया और जनता के सामने तथ्य रखें। उन्होंने दावा किया कि वे जहां भी चुनाव प्रचार में रहेंगे, बुलाने पर 10 मिनट में बहस के लिए पहुंच जाएंगे।

भाजपा समर्थन पर उठाए सवाल, अमिता रक्षित पर साधा निशाना
मिक्की झा ने भाजपा समर्थित प्रत्याशी अमिता रक्षित को लेकर भी तीखा बयान दिया। उन्होंने कहा कि पिछली बार भाजपा चिन्ह पर चुनाव हारने के बावजूद इस बार उन्हें समर्थन दिया गया, जबकि उनके बयानों से लगता है कि उन्होंने समर्थन नहीं मांगा था। झा ने आरोप लगाया कि इस स्थिति से भाजपा की छवि प्रभावित हो रही है। साथ ही उन्होंने कहा कि वे निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं और उन्हें मुख्यमंत्री का आशीर्वाद प्राप्त है, जिसके सहारे वे विकास के लिए संसाधन लाने का दावा करते हैं।

“सीएम के सहयोग से विकास के लिए फंड लाएंगे” — विकास पर जोर
उन्होंने कहा कि यदि उच्च स्तर का सहयोग मिलता है तो शहर के लिए योजनाओं का फंड लाना और विकास कार्यों को तेज करना संभव होगा। झा ने कहा कि दुमका के समग्र विकास के लिए मजबूत राजनीतिक समन्वय जरूरी है और वे उसी दिशा में प्रयासरत हैं। उन्होंने खुद को विकास एजेंडा वाला उम्मीदवार बताते हुए जनता से समर्थन मांगा।

सफाई कर्मियों पर एफआईआर का विरोध, संवाद से समाधान की मांग
नगर परिषद के सफाई कर्मियों की हड़ताल और उन पर दर्ज प्राथमिकी को लेकर भी मिक्की झा ने प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि सफाईकर्मी कमजोर और वंचित वर्ग से आते हैं, इसलिए उन पर सीधे एफआईआर दर्ज करना उचित नहीं है। उनका कहना है कि पहले बातचीत और समझौते की कोशिश होनी चाहिए थी। उन्होंने उपायुक्त से हस्तक्षेप कर वार्ता के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की।









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