नौकरी में स्थानीय रैयतों को प्राथमिकता की मांग पर उग्र हुआ आंदोलन

मेडिकल कॉलेज अस्पताल में आउटसोर्सिंग कर्मियों के प्रवेश पर रोक की चेतावनी
लिखित आश्वासन नहीं मिलने से नाराज रैयत।
दुमका। दिग्घी स्थित नवनिर्मित फूलो झानो मेडिकल कॉलेज अस्पताल में तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी की नौकरियों में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता देने की मांग को लेकर रैयतों का आंदोलन उग्र होता जा रहा है। अस्पताल निर्माण के लिए जमीन देने वाले रैयतों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनके परिवार के सदस्यों को नौकरी देने के संबंध में अस्पताल प्रबंधन की ओर से लिखित आश्वासन नहीं दिया जाता, तब तक आउटसोर्सिंग कंपनी के किसी भी कर्मचारी को अस्पताल परिसर में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। रैयतों ने कहा कि अस्पताल में केवल डॉक्टर, नर्स और मरीजों को ही प्रवेश की अनुमति दी जाएगी।

वार्ता नहीं होने पर धरने पर बैठे सैकड़ों रैयत।
रैयतों ने 25 सितंबर को फूलो झानो मेडिकल कॉलेज अस्पताल के प्राचार्य एवं अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर स्थानीय पंचायत के ग्रामीणों को रोजगार देने की मांग की थी। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन, आउटसोर्सिंग कंपनी और रैयतों के बीच 29 सितंबर को वार्ता निर्धारित की गई थी। रैयतों का आरोप है कि निर्धारित समय पर न तो आउटसोर्सिंग कंपनी के प्रतिनिधि वार्ता के लिए पहुंचे और न ही अस्पताल के प्राचार्य एवं अधीक्षक की ओर से उनसे बातचीत की गई। इससे नाराज सैकड़ों रैयत अस्पताल के सामने पहुंच गए और धरने पर बैठ गए।

बुधवार से आउटसोर्सिंग कर्मियों के प्रवेश पर रोक की चेतावनी।
आंदोलनरत रैयतों ने निर्णय लिया है कि बुधवार से आउटसोर्सिंग कंपनी के किसी भी कर्मचारी को अस्पताल परिसर में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। रैयतों का कहना है कि मेडिकल कॉलेज अस्पताल के निर्माण के लिए स्थानीय लोगों ने अपनी जमीन दी है, इसलिए अस्पताल में तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी की नौकरियों में उनके परिवार के सदस्यों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उनका कहना है कि स्थानीय लोगों के हितों की अनदेखी कर बाहरी लोगों को रोजगार दिया जाना स्वीकार नहीं किया जाएगा।

ठोस लिखित आश्वासन तक आंदोलन जारी रखने का निर्णय।
रैयतों ने स्पष्ट किया है कि जब तक अस्पताल प्रबंधन की ओर से नौकरी देने को लेकर ठोस लिखित आश्वासन नहीं दिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। रैयतों ने कहा कि जमीन देने वाले परिवारों के रोजगार के मुद्दे का समाधान किए बिना आउटसोर्सिंग व्यवस्था को आगे बढ़ाने का विरोध किया जाएगा। अब अस्पताल प्रबंधन और रैयतों के बीच होने वाली अगली बातचीत पर सभी की नजर है।





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