दुमका नगर परिषद चुनाव में बिनोद कुमार लाल की एंट्री, सियासी मुकाबला हुआ और तीखा
- SANTHAL PARGANA KHABAR
- Jan 20
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दुमका। अजय कुमार झा उर्फ मिक्की झा, अमिता रक्षित और अभिषेक चौरसिया के बाद अब बिनोद कुमार लाल के अध्यक्ष पद की दौड़ में उतरते ही दुमका नगर परिषद चुनाव का राजनीतिक तापमान अचानक बढ़ गया है। दो बार नगर परिषद के उपाध्यक्ष रह चुके बिनोद कुमार लाल की एंट्री ने चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल दिए हैं और मुकाबला बेहद रोचक हो गया है। वार्ड पार्षद से नगर परिषद उपाध्यक्ष तक का सफर तय कर चुके बिनोद कुमार लाल को दुमका की राजनीति में एक मजबूत और अनुभवी चेहरा माना जाता है, जिनकी पकड़ जमीन से जुड़ी हुई है।

2018 की जीत ने बनाया मजबूत दावेदार, निर्दलीय ताकत फिर चर्चा में
दुमका। वर्ष 2018 के नगर निकाय चुनाव में बिनोद कुमार लाल ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में झारखंड मुक्ति मोर्चा और भाजपा दोनों के प्रत्याशियों को करारी शिकस्त देकर अपनी राजनीतिक हैसियत साबित की थी। उन्होंने 8703 मत हासिल कर झामुमो प्रत्याशी अभिषेक चौरसिया को 1697 मतों के अंतर से हराया था, जबकि भाजपा प्रत्याशी गरीब दास तीसरे स्थान पर रहे थे। उस चुनाव ने यह साफ कर दिया था कि दुमका में पार्टी से ज्यादा व्यक्ति, काम और भरोसा निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

खराब स्वास्थ्य के बावजूद चुनावी मैदान में वापसी, अनुभव बना सबसे बड़ी ताकत
दुमका। 2018 में खराब स्वास्थ्य के बावजूद अंतिम समय में चुनाव लड़ने का फैसला कर जीत दर्ज करना बिनोद कुमार लाल की राजनीतिक दृढ़ता को दर्शाता है। इस बार भी उनके चुनाव न लड़ने की चर्चाएं थीं, लेकिन अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने की घोषणा कर उन्होंने सभी अटकलों को खत्म कर दिया है। दस वर्षों के उपाध्यक्ष कार्यकाल में शहर के विकास और सौंदर्यीकरण में उनकी सक्रिय भूमिका रही है, जिससे उनकी प्रशासनिक समझ और अनुभव को लेकर समर्थकों में भरोसा है।

विकास, सौंदर्यीकरण और भरोसे का एजेंडा, अध्यक्ष पद की दौड़ में बढ़त
दुमका। बिनोद कुमार लाल का कहना है कि उपाध्यक्ष रहते हुए भी उन्होंने होल्डिंग टैक्स कम कराने, हिजला जलापूर्ति योजना के पुनर्जीवन, नियमित पेयजल आपूर्ति, शहर की साफ-सफाई, गांधी मैदान के विकास, खेल गतिविधियों के पुनरुद्धार और खूटाबांध क्षेत्र के सौंदर्यीकरण जैसे कई अहम कार्य किए हैं। खूटाबांध तालाब में भव्य छठ पूजा आयोजन और गांधी मैदान में ऐतिहासिक क्रिकेट टूर्नामेंट के कारण युवाओं में उनकी खास लोकप्रियता है। हर वार्ड में मजबूत समर्थक टीम, सधी हुई चुनावी रणनीति और “जेंटलमैन नेता” की छवि के चलते राजनीतिक जानकार मानते हैं कि बिनोद कुमार लाल की एंट्री से अध्यक्ष पद का चुनाव सीधा, कड़ा और बेहद दिलचस्प हो गया है।





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