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दुमका के लोग पूछ रहे हैं कब चलेगी दुधानी की टावर घड़ी

जीर्णाेद्धार के नाम पर लाखों खर्च के बाद भी बंद है दुधानी की टावर घड़ी

दुमका। घड़ियां तो बेरोकटोक 24 घंटे निरंतर चलती रहनी चाहिए। घड़ी हाथ की हो या दीवार में टंगी हो, यदि घड़ी बंद हो जाती है तो माना जाता है कि समय खराब हो जाता है इसलिए बंद घड़ी को या तो तुरंत चालु किया जाता है या फिर उसे हटा दिया जाता है। पर उपराजधानी दुमका का प्रवेश द्वार कहा जानेवाला दुधानी चौक में बनाये गये टावर में लगायी गयी घड़ी लंबे समय से बंद है। यह स्थिति तब है जबकि एक साल पूर्व लाखों रूपसे की लागत से इस टावर का जीर्णोंद्वार किया गया है। यह टावर घड़ी अपने आप में अजूबा भी है। टॉवर पर लगी घड़ियों को चार दिशाओं से देखने पर अलग-अलग समय आपको दिखता है। वास्तु शास्त्र के अनुरूप बंद घड़ी को अशुभ माना जाता है। कहा जाता है कि घर में बंद घड़ी रखने से विकास अवरुद्ध हो जाता है। ऐसे में दुमका शहर के प्रवेश द्वार पर लगी घड़ियां बंद है. तो यह मान लिया जाए कि दुमका का विकास अवरुद्ध है। दुमका के लोग प्रशासन से सवाल पूछ रहे हैं कि कब चलेगी दुधानी चौक पर स्थित टावर की घड़ियां।

डीएमएफटी के 1.32 लाख की लागत से एनआरईपी ने करवाया है काम

ऐसा नहीं है कि दुमका शहर के प्रवेश द्वार पर जिला प्रशासन की नजर नहीं है। आरटीआई से इस बात का खुलासा हुआ कि वित्तीय वर्ष 2024 - 2025 में डीएमएफटी से दुधानी टॉवर चौक के जीर्णाेद्धार के लिए 1 लाख 39 हजार रुपये की योजना बनायी गयी जिसमें से लगभग एक लाख 32 हजार रुपए खर्च किए गए। जीर्णाेद्धार के नाम पर रंग रोगन के अलावे कुछ नहीं हुआ। यहां तक कि 25 वर्ष पूर्व बनकर तैयार हुए इस टावर की मरम्मति भी नहीं की गयी जिस कारण यह टूटःटूट कर गिर रहा है। स्थानीय दुकानदार अब्दुल हामिद बताते है कि टॉवर का ऊपरी हिस्सा टूटकर गिर रहा है। कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। आरटीआई एक्टिविस्ट का मानना है कि जब डीएमएफटी से इसका जीर्णाेधार हुआ तो घड़ियों को भी दुरुस्त करनी चाहिए थी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ. एनआरईपी के कार्यपालक अभियंता हिमांशु हुराद कहते है कि एस्टीमेट के अनुरूप लगभग डेढ़ लाख रुपए खर्च कर टावर के रंग रोगन का कार्य किया गया है। उन्होंने घड़ी को जल्द दुरुस्त करवाना का भरोसा दिया है। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से घड़ी की तत्काल मरम्मत की मांग की है।

टॉवर चौक पर इंडियन बैंक का बोर्ड क्यों

दुमका। जानकारी के अनुसार वर्ष 1998 में तत्कालीन सांसद बाबूलाल मरांडी के सांसद निधि से जामताड़ा और दुमका के दुधानी चौक पर टावर का निर्माण कराया गया था। दुमका शहर के प्रवेश द्वार पर टॉवर के निर्माण से शहर को एक नई पहचान मिली। वर्तमान समय में इसके रख रखाव का जिम्मा इंडियन बैंक और इलाहाबाद बैंक (1 अप्रैल 2020 को इलाहाबाद बैंक का इंडियन बैंक में विलय हो चुका है) पर है. टॉवर के चारों तरफ बैंक का होर्डिंग लगा है। अब ऐसे में सवाल उठता है कि रख रखाव का मतलब क्या सिर्फ अपने संस्थान का प्रचार प्रसार करना है? क्या बैंक दिवालिया हो चुका है? रंग रोगन का कार्य डीएमएफटी फंड से क्यों? यह तो रख रखाव का जिम्मा लेने वाले संस्थान का दायित्व है। कम से कम टॉवर पर चार दिशाओं में लगी घड़ी को तो दुरुस्त कर दे ताकि दुमका का समय सही हो सके। अगर वह भी नहीं कर सकता तो प्रशासन को चाहिए कि इंडियन बैंक के बदले रख रखाव की जिम्मेदारी निजी हाथों में सौंप दे. जिले के कई ऐसे लोग है जो शहर के चौक चौराहों पर अपने संस्थान का प्रचार प्रसार के लिए रुपए देकर बैनर और होर्डिंग्स लगाते है। शहर के प्रवेश द्वार पर अपने संस्थान का प्रचार प्रसार कौन नहीं करना चाहेगा।

 
 
 

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