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दौड़-दौड़ कर घायलों का इलाजकरवाने निरंजन को बना दिया हत्या का अभियुक्त

आहत हैं घायलों को गोल्डन आवर में अस्पताल पहुंचानेवाले गुड सेमैरिटन निरंजन मंडल

दुमका। जरमुण्डी और उसके आसपास के इलाके में होनेवाले सड़क दुर्घटना की जानकारी मिलने पर मदद के लिए सबसे पहले पहुंचनेवाले और घायल को अस्पताल पहुंचाने से लेकर खुद स्ट्रेचर लेकर उसका इलाज करवाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता निरंजन मंडल आहत हैं क्योंकि एक घायल को इलाज के लिए हायर सेंटर भेजने में मदद करने पर उन्हें हत्या के केस का अभियुक्त बना दिया गया है।

घायल की मदद करना ही बन गया अपराध

निरंजन मंडल गुड सेमैरिटन (अच्छा मददगार व्यक्ति) हैं, यानि एक ऐसा व्यक्ति जो किसी ज़रूरतमंद या मुसीबत में फंसे इंसान की बिना किसी स्वार्थ के मदद करता है। भारत में सरकार ने यह कानून बनाया है कि सड़क हादसे में घायल व्यक्ति की मदद करने वाले यानि गुड सेमैरिटन को पुलिस या अस्पताल परेशान नहीं कर सकते। यानी अगर आप किसी दुर्घटना पीड़ित को अस्पताल पहुँचाते हैं, तो आपको कानूनी झंझटों से सुरक्षा दी जाती है। पर 20 सितम्बर को उनके द्वारा की गयी ऐसी ही एक मदद उनके लिए जी का जंजाल बन गयी है।

20 सितम्बर को दो घायलों की मदद के लिए निकले थे निरंजन

निरंजन मंडल बताते हैं कि 20 सितम्बर को शाम के करीब 6 बजे बोलबम बाईपास कांवरियां पथ जरमुण्डी थाना क्षेत्र हवनंगा और रामपुर के बीच दो बाईक के आमने-सामने टक्कर हो जाने से दोनों बाईक चालक गंभीर रूप से जख्मी होने और उसके साथ पीछे बैठी एक महिला सुगिया देवी के घायल होने की उन्हें सूचना मिली। उन्होंने इस दुर्घटना की सूचना जरमुण्डी थाना के मुंशी अशोक को दी और 108 नंबर के एंबुलेंस को फोन लगाया पर बात नहीं हो पायी तो बाइक से घटनास्थल के लिए निकल पड़े महज कुछ दूर पहुंचने पर उन्होंने देखा कि एक भरा हुआ टोटो में रोते-चिल्लाते लोग आ रहे थे। पूछने पर बताया गया कि टोटो में दोनों घायल हैं।

अलग-अलग गाड़ियों से पहुंचे दोनों घायलों को पहुंचाया अस्पताल

निरंजन मंडल बाइक से स्वास्थ्य केन्द्र पहुंचे और घायल के इलाज के लिए टीम को तैयार किया। जैसे ही टोटो स्वास्थ्य केन्द्र पहुंचा उन्होंने एक घायल को स्ट्रेचर पर उतारा और दूसरे घायल के बारे में पूछा तो बताया गया कि पीछे से लाया जा रहा है। वह बाहर निकल कर दूसरे घायल का इंतजार करने लगा और उसके आते ही खुद उसे स्ट्रेचर से इलाज के लिए पहुंचाया। डा गुफरान एवं उनके सहयोगियों ने प्राथमिक उपचार के बाद घायल को बेहतर इलाज के लिए रेफर कर दिया।

एक घायल को एंबुलेंस से बेहतर इलाज के लिए भेजवाया

108 एंबुलेंस के प्रतिनिधि ने कहा कि यह सेवा केवल दुमका जिला के लिए उपलब्ध है। यह सुनकर एक कर्मी ने बताया कि एक एंबुलेंस है, तेल भरवा देने से चला जायेगा। इस बीच घायल धर्मेन्द्र मंडल जरमुण्डी क्षेत्र, ग्राम-रंगाबांध निवासी का परिजन कुण्डा में चार दिन इलाज कराने के बाद पैसा के अभाव में दुमका फुलो झानो मेडिकल कॉलेज लाया गया। एक दिन रखने के बाद डॉक्टर के सलाह पर दुर्गापुर स्थित गौरी देवी हॉस्पीटल ले गया, जहां अभी भी इलाजरत है।


दूसरे घायल श्रवण मंडल को परिजन खुद ले गये कुण्डा और रांची

घायलों में से गंभीर रूप से घायल श्रवण मंडल के परिजन उसे लेकर देवघर के कुंडा चले गये और वहां से रेफर किये जाने पर उसे रांची ले गये जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गयी। मृत्यु के पश्चात् मृतक के परिजन एवं ग्रामीणों ने यह बोलने लगा कि सड़क दुर्घटना के बाद श्रवण मंडल को मारा गया है, उसकी हत्या की गयी है।


हत्या का मामला दर्ज करवा कर निरंजन मंडल को भी बना दिया अभियुक्त

निरंजन बताते हैं कि दूसरे दिन सुबह पता चला कि मृतक का पार्थिव शरीर को सड़क पर रखकर सड़क जाम कर दिया है और नामजद 9 आदमी (1) सुगिया देवी पति धर्मेन्द्र मंडल उर्फ डोमन मंडल (2) नागेश्वर मंडल, (3) नन्दी मंडल (4) दयानन्द मंडल (5) मोहन मंडल, पिता चारों के पिता स्व० जगदीश मंडल, (6) अजीत मंडल, पिता स्व० चुनका मंडल, (7) नकुल मंडल, पिता-स्व० संतलाल मंडल, (8) बबलू मंडल, पिता स्व० मकदम मंडल, (9) निरंजन मंडल, पिता-राजकुमार मंडल को गिरफ्तारी का मांग कर रहा है। निरंजन मंडल ने एसपी को आवेदन देकर जरमुण्डी काण्ड संख्या 104/2025 में उनपर लगाये गये बेबुनियाद आरोपों से उन्हें मुक्त करने की मांग की है।

 
 
 

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