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दूबे मंदिर के पास दिखा दूधिया खरिस सांप, युवती ने किया रेस्क्यू

फन उठाए करीब चार फीट लंबे विषधर को देखकर ग्रामीणों में मचा हड़कंप

दुमका जिले के मसलिया प्रखंड अंतर्गत मसानजोर पंचायत के सीताकोहबर गांव स्थित बाबा दूबे मंदिर के पास शुक्रवार की देर दोपहर उस समय अचानक अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब मंदिर के समीप झाड़ियों के बीच एक विषधर दूधिया खरिस सांप दिखाई दिया। करीब चार फीट लंबे इस सांप ने जैसे ही फन उठाकर फुफकार भरी, आसपास मौजूद लोगों के होश उड़ गए। देखते ही देखते यह खबर पूरे गांव में फैल गई और मंदिर के पास ग्रामीणों की भीड़ जुटने लगी। कई लोग दूरी बनाकर खड़े रहे, जबकि कुछ लोग अपने मोबाइल से इस दुर्लभ दृश्य को कैद करने लगे। ग्रामीणों के अनुसार सांप काफी देर तक झाड़ियों के पास ही कुंडली मारकर बैठा रहा और ज्यादा हिल-डुल नहीं रहा था, जिससे लोगों में जिज्ञासा और भय दोनों का माहौल बना रहा।

सूचना मिलते ही सक्रिय हुए पर्यावरण प्रेमी, मौके पर पहुंची रेस्क्यू टीम

घटना की गंभीरता को देखते हुए गांव के बिष्णुकांत झा ने तुरंत फतेहपुर के पर्यावरण प्रेमी सलिल कुमार को इसकी सूचना दी। सूचना मिलते ही सलिल कुमार ने ग्रामीणों से अपील की कि वे घबराएं नहीं और किसी भी हालत में सांप को नुकसान न पहुंचाएं। थोड़ी ही देर में रेस्क्यू के लिए वृंदा झा मौके पर पहुंचीं। उनके एक हाथ में स्नेक कैचर स्टिक और दूसरे हाथ में विशेष सुरक्षात्मक दस्ताना था, जो सांप के काटने से बचाव करता है। मौके पर मौजूद लोगों की निगाहें अब इस साहसिक रेस्क्यू पर टिक गईं। सलिल कुमार की निगरानी में वृंदा झा धीरे-धीरे झाड़ियों की ओर बढ़ीं और बेहद सावधानी के साथ स्थिति का आकलन करने लगीं।

वृंदा झा ने साहस और सूझबूझ से किया गया सुरक्षित रेस्क्यू, जंगल में छोड़ा गया सांप

कुछ ही क्षणों में वृंदा झा ने स्नेक कैचर स्टिक की मदद से विषधर को नियंत्रित किया और बड़ी सावधानी से उसे पकड़कर एक सुरक्षित डिब्बे में रख लिया। यह पूरा दृश्य देख रहे ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। बाद में सांप को गांव से दूर सुरक्षित प्राकृतिक स्थान पर छोड़ दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि सांप ने हाल ही में केंचुली छोड़ी थी, जिसके कारण वह शारीरिक रूप से कमजोर था और तेजी से भाग नहीं पा रहा था। इस दौरान सलिल कुमार ने लोगों को जागरूक करते हुए कहा कि सांप प्रकृति की जैविक संतुलन श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, इसलिए उन्हें मारने के बजाय सुरक्षित तरीके से बचाने और संरक्षित करने की कोशिश करनी चाहिए


 
 
 

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