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तीन दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रहे महिला कॉलेज के सहायक प्राध्यापक, 15 लाख देकर छूटे

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फर्जी ट्राई और सीबीआई अफसरों के झांसे में आकर प्रोफेसर साहब ने गंवायी गाढ़ी कमाई

दुमका एसपी महिला कॉलेज के सहायक प्राध्यापक अविनाश शरण तीन दिनों तक साइबर अपराधियों के “डिजिटल अरेस्ट” का शिकार बने रहे। अपराधियों ने उन्हें एक अलग कमरे में बंद कर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया और अंततः 15 लाख रुपये आरटीजीएस से जमा करवाने के बाद कथित रूप से “जमानत” पर छोड़ा। घटना ने पूरे शिक्षण समुदाय को हैरान कर दिया है।

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फर्जी टीआरएआई अधिकारी के फोन से शुरू हुआ मामला

अविनाश शरण द्वारा नगर थाना में दिए आवेदन के अनुसार उन्हें मोबाइल नंबर 8941821365 से कॉल कर धमकाया गया कि उनके आधार नंबर का उपयोग कर एयरटेल की सिम 7738941379 खरीदी गई है, जिसे अवैध काम में इस्तेमाल किया गया है। कॉल करने वाली महिला ने स्वयं को टीआरएआई की कर्मचारी बताते हुए अपना नाम हर्षिका शर्मा बताया और दावा किया कि इस मामले में मुंबई पुलिस ने उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर ली है।

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व्हाट्सएप कॉल पर बना फर्जी ‘मुंबई पुलिस’ का दबाव

आवेदन में उल्लेख है कि हर्षिका शर्मा ने अविनाश शरण को कॉल पर ही रखते हुए कथित मुंबई पुलिस मुख्यालय को फोन मिलाया, जो तुरंत व्हाट्सएप कॉल (नंबर 7002819076) में बदल गया। वहां मौजूद फर्जी पुलिसकर्मियों ने उन्हें बताया कि वे किसी नरेश गोयल के साथ मनी लांड्रिंग में शामिल हैं और इसी आधार पर चार दिनों तक उन पर लगातार मानसिक दबाव बनाया गया।

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परिवार और संपत्ति की जांच के नाम पर दी गई धमकी

फर्जी पुलिस व सीबीआई अधिकारियों ने अविनाश शरण को राष्ट्रीय सुरक्षा में चूक का आरोपी बताते हुए उन्हें और उनके बच्चों को हिरासत में लेने की धमकी दी। साथ ही उनकी चल–अचल संपत्ति की तत्काल जांच के लिए मुंबई आने का दबाव बनाया गया। मुंबई नहीं जाने की स्थिति में उनसे 15 लाख रुपये “सुरक्षा जमानत” के रूप में जमा कराने को कहा गया, जिसे जांच सही मिलने पर वापस करने का दावा किया गया।

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डर और दबाव में प्रोफेसर ने गंवाए 15 लाख रुपये

लगातार धमकियों और मानसिक दबाव के कारण अविनाश शरण ने अपनी तथा अपने बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अपने एसबीआई खाते से 15 लाख रुपये डिब्रूगढ़ स्थित येस बैंक में एसएमडी सुकन्या इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी के खाते में आरटीजीएस से भेज दिए।


एफआईआर की मांग, पुलिस ने की पुष्टि

पीड़ित ने 19 नवंबर को रुपये ट्रांसफर करने के बाद 21 नवंबर को नगर थाना में लिखित शिकायत दी। उन्होंने राशि वापस कराने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। शुक्रवार दोपहर लगभग 2:30 बजे नगर थाना प्रभारी जगन्नाथ धान ने घटना की पुष्टि की।

 
 
 

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