कोयला लदे हाईवा की रफ्तार बनी जानलेवा, स्कूली बच्चों से भरे टोटो को मारी टक्कर
- SANTHAL PARGANA KHABAR
- 1 day ago
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शाम सात बजे से सुबह सात बजे तक कोयला वाहनों के परिचालन की मांग पर अड़े
दुमका। उपराजधानी दुमका में एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया, जब दुमका–पाकुड़ मुख्य पथ पर नकटी गांव के समीप तेज रफ्तार कोयला लदे हाईवा ने स्कूली बच्चों से भरे टोटो को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि टोटो सड़क किनारे जा पलटा और उसमें सवार बच्चे इधर-उधर गिर पड़े। गनीमत रही कि पीछे से कोई अन्य वाहन नहीं आ रहा था, नहीं तो बड़ा जानलेवा हादसा हो सकता था। इस दुर्घटना में लिटिल एंजेल स्कूल के छह स्कूली बच्चे घायल हो गए, जिन्हें स्थानीय लोगों की मदद से फूलो-झानो मेडिकल कॉलेज अस्पताल, दुमका में भर्ती कराया गया।

हादसे के बाद फूटा जन आक्रोश, सड़क जाम कर किया विरोध प्रदर्शन
घटना के बाद आक्रोशित स्थानीय लोगों ने दुमका–पाकुड़ मुख्य पथ को जाम कर दिया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को समझाकर जाम हटाने का प्रयास किया, लेकिन लोग अपनी पुरानी मांगों को लेकर अड़े रहे। प्रदर्शनकारियों ने सड़क का फोरलेन निर्माण होने तक शाम सात बजे से सुबह सात बजे तक कोयला लदे वाहनों के परिचालन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की। जाम के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और आम यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। समाचार लिखे जाने तक जाम की स्थिति बनी हुई थी।

प्रशासन और कोल कंपनियों पर गंभीर आरोप, वादे बने कागजों तक सीमित
मामले को लेकर छात्र नेता डॉ. श्यामदेव हेम्ब्रम ने प्रशासन, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और कोल कंपनियों जीबीआर व बीजीआर पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि बीते एक वर्ष में कोयला लदे हाईवा की चपेट में आकर करीब दो सौ से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, इसके बावजूद प्रशासन ने सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों के विरोध के बाद केवल काठीकुंड के पास ब्रेकर बनाकर खानापूर्ति की गई, जबकि पूर्व में फोरलेन निर्माण तक रात में कोयला वाहनों के परिचालन पर रोक का आश्वासन दिया गया था। साथ ही प्रदूषण नियंत्रण के नियमों की अनदेखी, बिना तिरपाल और पानी के छिड़काव के कोयला ढुलाई से भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य संकट की आशंका भी जताई गई।









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