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अवैध बालू माफिया ने ली छात्रा की जान, दुमका में कानून व्यवस्था पर बड़ा सवाल

दुमका। जिला के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के धोबना-सितपहाड़ी मार्ग पर मंगलवार सुबह अवैध बालू लदे ट्रैक्टर ने साइकिल सवार 10वीं की छात्रा आरती को रौंद दिया। सितपहाड़ी गांव की रहने वाली आरती रोज की तरह स्कूल जा रही थी, लेकिन रास्ते में मौत उसका इंतजार कर रही थी। इस दर्दनाक घटना में आरती की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि चालक ट्रैक्टर छोड़कर फरार हो गया। यह सिर्फ हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही से रची गई मौत है क्योंकि झारखंड की उपराजधानी दुमका में बालू उठाव पर रोक सिर्फ कागजों तक सीमित है, जमीनी हकीकत में बालू माफिया बेखौफ सड़कों पर मौत बनकर दौड़ रहे हैं। सवाल यह नहीं कि बच्ची कैसे मरी, असली सवाल यह है कि अवैध बालू ढुलाई को खुली छूट किसके संरक्षण में दी जा रही है, जिसकी कीमत आज एक मासूम छात्रा को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। धोबना गांव के लोग एक ही सवाल पूछ रहे हैंकृजब कानून सिर्फ कागज़ों में है, तो बच्चों की जान की कीमत क्या है? आज एक स्कूली बच्ची मरी है, अगर यही सिस्टम चलता रहा तो कल किसी और घर का चिराग बुझ सकता है। अब सवाल सिर्फ न्याय का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की जवाबदेही का है।

पहले भी घायल कर चुका था ट्रैक्टर

दुमका। ग्रामीणों का आरोप है कि यही ट्रैक्टर पहले भी कई लोगों को घायल कर चुका है, लेकिन हर बार मामला दबा दिया गया। लोगों का साफ कहना है कि अवैध बालू परिवहन बालू माफिया और प्रशासन की साठगांठ के बिना संभव नहीं है। छात्रों का सवाल है कि जब स्कूल जाते बच्चे भी सुरक्षित नहीं हैं, तो पुलिस और प्रशासन आखिर किसके लिए है।

सड़क पर उतरा जनआक्रोश, शव उठाने से इनकार

दुमका। घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणों और छात्रों ने सड़क जाम कर दिया और शव उठाने से साफ इनकार कर दिया। लोगों ने मांग की कि जब तक वरीय अधिकारी मौके पर नहीं आएंगे, आंदोलन खत्म नहीं होगा। यह गुस्सा सिर्फ एक बच्ची की मौत का नहीं, बल्कि वर्षों से चल रहे अवैध बालू आतंक के खिलाफ फूटा आक्रोश है।

कागज़ों में बालू पर रोक, ज़मीन पर मौत का खेल

दुमका। झारखंड की उपराजधानी दुमका में बालू उठाव पर रोक सिर्फ फाइलों तक सीमित है। जमीनी हकीकत यह है कि अवैध बालू से लदे ट्रैक्टर सड़कों पर बेखौफ दौड़ रहे हैं और आम लोगों की जान ले रहे हैं। दुमका में अवैध बालू अब कारोबार नहीं, बल्कि मौत का उद्योग बन चुका है।

कई घंटे बाद पहुंचे अधिकारी, प्रशासन की भूमिका सवालों के घेरे में

दुमका। हैरानी की बात यह है कि सुबह 8 बजे हुई घटना के कई घंटे बाद तक कोई वरीय अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। मुफस्सिल थाना की पुलिस जरूर पहुंची, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि उसने सिर्फ औपचारिकता निभाई। बाद में सदर अंचलाधिकारी अमर कुमार मौके पर पहुंचे और लोगों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन प्रशासन की देरी ने आक्रोश को और भड़का दिया।


 
 
 

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