दुमका में साहित्यकारों का संगम, डॉ. शंकर मोहन झा को मिला ‘सतीश स्मृति सम्मान
- SANTHAL PARGANA KHABAR
- 2 days ago
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डॉ. यू.एस. आनंद को विशेष सम्मान, रिंकू मोदी को चंपा देवी स्मृति पुरस्कार
दुमका में साहित्य का महाकुंभ, विचार, सम्मान और कविता का संगम
दुमका में स्वर्गीय सतीश चंद्र झा की 97वीं जयंती के अवसर पर सतीश स्मृति मंच द्वारा भव्य विचार गोष्ठी, सम्मान समारोह और कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें साहित्य, कला और बौद्धिक जगत के प्रमुख हस्तियों की उल्लेखनीय भागीदारी रही। कार्यक्रम की शुरुआत पुष्पांजलि और दीप प्रज्वलन के साथ हुई, जबकि मंच की गतिविधियों पर स्वागत भाषण के माध्यम से साहित्यिक परंपरा को आगे बढ़ाने के संकल्प को दोहराया गया।

प्रतिष्ठित सम्मान: साहित्य साधकों का हुआ अभिनंदन
कार्यक्रम में डॉ. शंकर मोहन झा को ‘सतीश स्मृति सम्मान–2026’, डॉ. यू.एस. आनंद को विशेष सम्मान और रिंकू मोदी को ‘चंपा देवी स्मृति पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। साथ ही विद्यालय स्तरीय भाषण एवं चित्रांकन प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत कर नई पीढ़ी को साहित्य और कला से जोड़ने का संदेश दिया गया।

साहित्य और समाज: चेतना को जीवंत रखने का माध्यम
उपायुक्त अभिजीत सिन्हा ने दुमका जैसे क्षेत्र में साहित्यिक आयोजनों को समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताते हुए कहा कि साहित्य समाज की चेतना को जीवंत रखने और विचारों को दिशा देने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने ऐसे आयोजनों को सामाजिक और सांस्कृतिक विकास के लिए आवश्यक बताया और आयोजकों के प्रयासों की सराहना की।
संताल परगना की साहित्यिक यात्रा पर गंभीर विमर्श
विचार गोष्ठी में झारखंड के 25 वर्षों की साहित्यिक यात्रा, संताल परगना की रचनात्मक परंपरा और भविष्य की दिशा पर गहन चर्चा हुई। वक्ताओं ने साहित्य की सामाजिक भूमिका, रचनात्मक स्वतंत्रता, मौलिकता और समकालीन चुनौतियों पर विचार व्यक्त किए, जबकि लोक परंपरा और आधुनिक लेखन के समन्वय को साहित्य के विकास का आधार बताया गया।

कविता, विमोचन और सांस्कृतिक प्रस्तुति से सजी शाम
कार्यक्रम में पुस्तकों का लोकार्पण हुआ, जिसकी सराहना कुलपति डॉ. कुनुल कंडीर ने की। दूसरे सत्र में विभिन्न राज्यों के कवियों ने काव्य पाठ से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया, जबकि नवीन चंद्र ठाकुर की नाट्य प्रस्तुति ने आयोजन को सांस्कृतिक ऊंचाई प्रदान की। साहित्यकारों ने संताल परगना की समृद्ध साहित्यिक विरासत को संरक्षित और समृद्ध करने के लिए ऐसे आयोजनों को निरंतर जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया।









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