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झारखंड के ताड़ पर ‘विदेशी नजर’, पश्चिम बंगाल के रास्ते बांग्लादेश तक तस्करी, प्रशासन मौन

दुमका। झारखंड की सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहर माने जाने वाले ताड़ के पेड़ों पर अब बाहरी गिरोहों की नजर पड़ गई है। दुमका जिले के सरैयाहाट प्रखंड क्षेत्र से बड़े पैमाने पर ताड़ के हरे-भरे पेड़ों की अवैध कटाई कर ट्रकों के माध्यम से पश्चिम बंगाल होते हुए बांग्लादेश भेजे जाने का मामला सामने आया है। सूत्रों के अनुसार पश्चिम बंगाल के तस्कर स्थानीय नेटवर्क के साथ मिलकर इस अवैध कारोबार को संचालित कर रहे हैं।

रोजाना ट्रकों में हो रही ढुलाई

सरैयाहाट, हंसडीहा, रामगढ़ और जरमुंडी प्रखंड क्षेत्रों से प्रतिदिन ताड़ के पेड़ काटकर ट्रकों से बंगाल सीमा तक भेजे जा रहे हैं, जहां से इन्हें आगे बांग्लादेश पहुंचाया जा रहा है। इस मामले पर अंचलाधिकारी राहुल कुमार शानू ने कहा कि तस्करी की जानकारी उनके संज्ञान में नहीं है, फिर भी जांच कर वन विभाग के साथ समन्वय कर कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासनिक चुप्पी पर उठे सवाल

इतने बड़े पैमाने पर तस्करी के बावजूद परिवहन और वन विभाग की चुप्पी पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सबकुछ जानकारी में होने के बावजूद कार्रवाई नहीं होना संदेह पैदा करता है और इस पूरे खेल के ‘मैनेज’ होने की आशंका जताई जा रही है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर

ताड़ का पेड़ ग्रामीण जीवन और अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा रहा है। इससे मिलने वाली ताड़ी हजारों परिवारों की आजीविका का साधन है, वहीं यह पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आकाशीय बिजली से बचाव में भी ये पेड़ प्राकृतिक सुरक्षा कवच का काम करते हैं।

धरोहर बचाने के लिए जरूरी सख्त कार्रवाई

बड़े पैमाने पर हो रही कटाई और तस्करी पर्यावरण, संस्कृति और ग्रामीण जीवनशैली के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है। अब जरूरत है कि प्रशासन इस पर ठोस और सख्त कार्रवाई करे, ताकि झारखंड की इस महत्वपूर्ण धरोहर को बचाया जा सके।


 
 
 

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