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बच्चे से 21 घंटे काम करवा रहा था होटल मालिक

12 वर्षीय बालक को रेस्क्यू कर सीडब्ल्यूसी के के समक्ष किया गया प्रस्तुत

चाइल्ड हेल्पलाइन नम्बर 1098 से कॉल कर दी गयी थी बाल श्रम की सूचना

दुमका। चाइल्ड हेल्पलाइन के निःशुल्क नम्बर 1098 से प्राप्त बाल श्रम की मामले की सूचना को चाइल्ड हेल्पलाइन के परियोजना समन्वयक मो० शमीम अंसारी के द्वारा जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी को सूचित किया गया था कि हंसडीहा चौक के निकट चौधरी नामक होटल में 12 वर्षीय बालक से नियोक्ता द्वारा बाल श्रम कराया जा रहा है। जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी प्रकाश चन्द्र ने मामले को गंभीरतापूर्वक लेते हुए अविलंब टीम गठित कर मामले का सत्यापन करते हुए बालक का रेस्क्यू कर बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत कराने का निर्देश दिया। गठित टीम द्वारा बालक का रेस्क्यू कर बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया।

दो हजार रुपये दी जाती थी मजदूरी

बाल कल्याण समिति की सदस्या किरण तिवारी ने कहा कि बाल श्रम से मुक्त कराये गये बालक को समिति ने किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम 2015 की धारा 30 (1) के तहत मामले को संज्ञान में लेकर अपने देखभाल एवं संरक्षण में लिया। समिति ने अपने बयान में पाया है कि नियोक्ता द्वारा बालक से प्रातः तीन बजे से मध्य रात्रि 12 बजे तक होटल का सम्पूर्ण कार्य करवाया जाता था और कार्य कराने के एवज में मात्र दो हजार रूपये प्रति माह का पारिश्रमिक भुगतान किया जाता था।

सीडब्ल्यूसी ने बालक को सीसीआई में भेजा

बालक के सर्वाेत्तम हित को देखते हुए समिति ने आवश्यक कार्रवाई कर बालक को अगले आदेश तक के लिए बाल गृह (बालक) श्रीअमडा में आवासित किया है। समिति ने पत्र जारी कर श्रम अधीक्षक दुमका को निर्देश दिया है कि नियोक्ता के विरुद्ध बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के सुसंगत धाराओं के तहत नियमानुकूल कानूनी कार्रवाई करें। रेस्क्यू टीम में डीसीपीयू से विजय कुमार कापरी, सीएचएल से मो० शमीम अंसारी, ग्राम ज्योति के मुकेश कुमार दुबे, पवन कुमार यादव, सनातन मुर्मू एवं थाना हंसडीहा के पुलिस पदाधिकारीगण मौजूद थे।


 
 
 

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