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दुमका विधायक बसंत सोरेन के बयान पर बवाल, संथाल परगना में उठे विरोध के स्वर



दुमका। गोड्डा में हुए सूर्य नारायण हांसदा एनकाउंटर मामले ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने अपने जांच में इनकाउंटर को फर्जी बताया है। इसके साथ ही मामले की CBI जांच की अनुशंसा भी की है। इसी बीच दुमका विधायक बसंत सोरेन का एक बयान सोशल मीडिया पर भारी विवाद का कारण बन गया है।

दरअसल, मीडिया द्वारा जब उनसे सूर्य नारायण हांसदा प्रकरण पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा – “कौन सुर्या हांसदा, मैं इस नाम के किसी व्यक्ति को नहीं जानता।”

यह बयान सामने आते ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और देखते ही देखते लोगों की नाराजगी खुलकर सामने आने लगी।

सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया


Santhal Pargana Khabar पेज पर पोस्ट किए गए इस वीडियो को अब तक


2.66 लाख से अधिक लोग देख चुके हैं


200 से ज्यादा लोगों ने शेयर किया


635 से ज्यादा लोगों ने कमेंट किया


ज्यादातर कमेंट आदिवासी युवाओं के रहे, जिनमें विधायक के बयान पर गहरी नाराजगी दिखाई दी।


कुछ प्रतिक्रियाएँ इस प्रकार हैं:


“बसंत सोरेन कौन है, हम किसी बसंत सोरेन को नहीं जानते।”


“आने वाले समय में जनता भी भूल जाएगी कि बसंत सोरेन कौन है।”


“संथाल समाज से कोई मतलब नहीं, सिर्फ कुर्सी चाहिए।”


“सबसे बोका व्यक्ति यही है, इसे चुनना अपने पैरों में कुल्हाड़ी मारना है।”


“आपने आदिवासी भाई को पहचानने से इनकार कर असली चेहरा दिखा दिया।"


अनेक कमेंट्स में यह भी कहा गया कि अब झामुमो को वोट देना बंद कर देना चाहिए।

फेसबुक पोस्ट पर आए कमेंट का स्क्रीनशॉट
फेसबुक पोस्ट पर आए कमेंट का स्क्रीनशॉट

बसन्त सोरेन के व्यान का राजनीतिक असर


संथाल परगना लंबे समय से झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) का गढ़ माना जाता है। बसंत सोरेन, झामुमो सुप्रीमो दिशोम गुरु शिबू सोरेन के पुत्र हैं। सोरेन परिवार और झारखंड मुक्ति मोर्चा को लेकर पहली बार संथाल परगना में सोशल मीडिया पर इस तरह का खुला विरोध सामने आया है।


मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अब तक इस पूरे विवाद पर चुप्पी साधे हुए हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह चुप्पी जनता में असंतोष को और बढ़ा रही है। विपक्ष पहले से ही इस मामले को आदिवासी अस्मिता से जोड़कर सरकार पर हमलावर है।

निष्कर्ष


बसंत सोरेन का यह बयान झामुमो के लिए राजनीतिक नुकसान का सबब बन सकता है। जिस संथाल परगना को पार्टी ने हमेशा अपनी मज़बूत धरती माना है, वहीं से विरोध के स्वर उठना आने वाले चुनाव में गंभीर परिणाम ला सकता है। यदि पार्टी नेतृत्व ने जल्द ही इस पर स्पष्ट और संवेदनशील रुख नहीं अपनाया, तो यह मामला आने वाले समय में बड़ा मुद्दा बन सकता है।


 
 
 

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