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अमेरिका के डाक्टर भी नहीं बचा सके शिक्षा मंत्री की जान

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13 दिनों तक लड़ने के बाद जिंदगी की जंग हार गये रामदास सोरेन

झारखंड के स्कूली शिक्षा साक्षरता एवं निबंधन विभाग के मंत्री रामदास सोरेन का 15 अगस्त को दिल्ली में निधन हो गया। वे 62 वर्ष के थे। घाटशिला विधानसभा से विधायक रामदास सोरेन ने 2024 के चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के बेटे बाबूलाल सोरेन को हराया था। रामदास सोरेन को 2 अगस्त को जमशेदपुर स्थित आवास पर ब्रेन हेमरेज हुआ था जिसके बाद उन्हें एयर एंबुलेंस से दिल्ली ले जाया गया था जहां उन्होंने 15 अगस्त को अंतिम सांस ली। उनके दिल्ली पहुंचने पर 2 अगस्त को ही उनके मौत की खबर वायरल हो गयी थी और उन्हें श्रद्धांजलि तक दे दी गयी थी जिसका खंडन किया गया। इस बीच 4 अगस्त को दिसोम गुरू शिबू सोरेन का निधन हो गया। 13 दिनों तक रामदास सोरेन जिंदगी की जंग लड़ते रहे। उनका ब्रेन डेड होने पर भी डाक्टरों ने हार नहीं मानी थी। अमेरिका के डाक्टरों के साथ विचार-विमर्श कर उनका इलाज किया जा रहा था, बावजूद इसके उन्हें बचाया नहीं जा सका।

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ग्राम प्रधान से राज्य के मंत्री तक का सफर तय किया

रामदास सोरेन का पैतृक गांव मूल रूप से घाटशिला के खरस्ती रहा। लेकिन इनके दादा रोजगार के सिलसिले में घोड़ाबांधा चले गए थे। जहां टाटा टेल्को में इनके दादा कर्मचारी थे। इसके बाद पूरा परिवार घोड़ाबांधा में बस गया। रामदास सोरेन के पिता वर्षों तक घोड़ाबांधा के ग्राम प्रघान रहे। पिता के निधन के बाद परंपरा अनुसार रामदास सोरेन को प्रधान चुना गया था। ग्राम प्रधान के रूप में परंपरा संस्कृति के संवर्धन और संरक्षण को लेकर रामदास सोरेन काफी सक्रिय थे। जल जंगल और जमीन के नारे को हमेशा बुलंद किया करते थे। झामुमो में वो जमशेदुपर ब्लाक कमेटी में एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में जुड़े थे। इसके बाद वे जिला कमेटी के सदस्य बने। फिर जिला सचिव और 1990 में जिलाध्यक्ष बने थे। घाटशिला से विधायक रहते हुए भी वो काफी दिनों तक संगठन के जिलाध्यक्ष का दायित्व संभाल चुके थे।

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02 अगस्त को पौधारोपण कर लौटे थे रामदास

01 अगस्त शुक्रवार को झारखंड विधानसभा सत्र के दौरान रांची स्थित नव-निर्मित विधायक आवासीय परिसर में 76वें राज्यव्यापी वन महोत्सव 2025 के अंतर्गत आयोजित वृक्षारोपण कार्यक्रम में मंत्री रामदास सोरेन ने भाग लिया था। जहां मंत्री रामदास सोरेन ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश पूरे राज्यवासियों को दिया था। उस दिन सत्र का पहला दिन होने के बाद अगले दिन शनिवार सत्र ने होने के कारण वे देर रात रांची से अपने घोड़ाबांधा स्थित आवास पहुंच गए थे। जब वे रांची से घोड़ाबांधा स्थित आवास पहुंच रहे थे तो अपने गाड़ी में काफी खुशमिजाज भी थे। अगले ही दिन 2 अगस्त को ब्रेन हेमरेज के कारण मंत्री की स्थिति गंभीर हो गई थी।

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पूर्व सीएम चम्पाई के पुत्र को हराकर तीसरी बार बने थे विधायक

रामदास सोरेन ने घाटशिला विधानसभा सीट पर 2024 के विधानसभा चुनाव में पूर्व सीएम चम्पाई सोरेन के पुत्र बाबूलाल सोरेन को करारी शिकस्त दी थी। चम्पाई कभी रामदास के काफी अच्छे मित्र थे। अपने बेटे बाबूलाल सोरेन को जिताने के लिए चम्पाई सोरेन ने पूरी ताकत भी झोंक दी थी। पर 22446 वोट से बाबूलाल सोरेन की हार हो गई थी। मंत्री रामदास सोरेन घाटशिला विधानसभा सीट से तीन बार विधायक निर्वाचित हुए थे। वे पहले बार झारखंड मुक्ति मोर्चा की टिकट पर 2009 में निर्वाचित हुए थे। वह तीन बार के लगातार विधायक रहे कांग्रेस नेता डॉ.प्रदीप कुमार बलमुचू को हराकर वे विधानसभा पहुंचे थे। इसके बाद 2014 के विधानसभा चुनाव में वे भाजपा के लक्ष्मण टुडू से हार गए थे। इसके बाद 2019 के चुनाव में जीतकर वापसी की। उस समय कुछ समय के लिए उन्हें उच्च तकनीकी शिक्षा विभाग में मंत्री पद मिला था।


अपने पीछे छोड़ गये पत्नी, तीन पुत्र व एक पुत्री

रामदास सोरेन ग्रेजुएट थे। उन्होंने जमशेदपुर के कोपरेटिव कॉलेज से पढ़ाई की थी। उनकी पत्नी का नाम सुरजमनी सोरेन है। उनके पुत्रों के नाम सोमेश चंद्र सोरेन, रोबिन सोरेन और रूपेश सोरेन हैं। उनकी पुत्री रेणुका सोरेन बैंक में कार्यरत हैं।


मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बताया अपूरणीय क्षति

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रामदास सोरेन के निधन पर दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा, ष्रामदास दा का जाना झारखंड के लिए अपूरणीय क्षति है। अंतिम जोहार दादा।ष् स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने कहा, ष्रामदास सोरेन लोकप्रिय शिक्षा मंत्री और आदिवासी समाज की मजबूत आवाज थे। उनकी कमी को कभी नहीं भुलाया जा सकेगा।ष् झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता कुणाल सारंगी ने कहा कि यह उनके लाखों चाहनेवालों के लिए एक व्यक्तिगत और अपूरणीय क्षति है। झामुमो ने कहा कि रामदास सोरेन का संघर्ष, समर्पण और सेवा भाव सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

 
 
 

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