दुमका नगर परिषद में सफाई व्यवस्था बड़ी चुनौती, डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण की नहीं है व्यवस्था
- SANTHAL PARGANA KHABAR
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सफाई कर्मियों की कमी और आधारभूत ढांचे का अभाव,
दुमका। दुमका नगर परिषद के नवनिर्वाचित अध्यक्ष और वार्ड पार्षदों के सामने शहर को साफ-सुथरा बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभर रहा है। नगर परिषद में सफाई व्यवस्था के लिए पर्याप्त आधारभूत ढांचा और संसाधनों की कमी है। सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मांगी गई जानकारी में बताया गया है कि नगर परिषद क्षेत्र में कुल 196 सफाई कर्मियों की नियुक्ति की गई है। प्रत्येक वार्ड में दो झाड़ूदर, दो ठेला से कूड़ा संग्रह करने वाले और दो नाली सफाई कर्मियों को तैनात किया गया है तथा आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त सफाई कर्मियों को लगाया जाता है। इतना ही नहीं सफाईकर्मियों की जो सूची दी गयी है उसके मुताबिक तीन रजिस्टरों में क्रमशः 132, 39 और 47 यानि कुल 218 सफाईकर्मी का नाम दर्ज है और ये सभी मास्टर रोल में हस्ताक्षर कर या फिर सही का निशान लगा कर अपनी हाजरी बनाते हैं। 39 सफाईकर्मियों में अरूण कुमार दे का नाम भी शामिल है जो पाछक के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद दुमका नगर परिषद में नाजिर का काम संभाल रहे हैं। यह जानकारी भी आरटीआई के तहत मांगे गये प्रत्येक वार्ड में कार्यरत सफाई कर्मियों का पिछले 6 माह की उपस्थिति के विवरण में सामने आयी है।

डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण और कचरा पृथक्करण की व्यवस्था नहीं
दुमका। आरटीआई के जवाब में यह भी बताया गया है कि दुमका नगर परिषद क्षेत्र में डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण की सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा सूखा और गीला कचरा अलग-अलग करने या उसके अलग-अलग उठाव और निष्पादन की भी कोई व्यवस्था नहीं है। हालांकि इन दोनों व्यवस्थाओं को प्रक्रियाधीन बताया गया है। वर्तमान में कचरा संग्रहण, परिवहन और निष्पादन का कार्य ट्रैक्टर, ट्रिपर और ठेला के माध्यम से किया जाता है।

डंपिंग यार्ड का ठिकाना नहीं, मैलगढ़ा में डंप हो रहा शहर का कचरा
दुमका। नगर परिषद द्वारा कचरा डंपिंग यार्ड के निर्माण और उसकी लागत से संबंधित जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है। आरटीआई के जवाब में बताया गया है कि शहर का कचरा बक्सी बांध स्थित मैलगढ़ा में डंप किया जाता है। वहां अब तक कितना कचरा जमा हुआ है और उसे कब हटाया जाएगा, इसकी कोई निर्धारित समय-सीमा नहीं बताई गई है। नगर परिषद के अनुसार कचरे के आकलन के बाद बायो-रेमेडिएशन की प्रक्रिया फिलहाल प्रक्रियाधीन है।

स्वच्छ सर्वेक्षण में राज्य में मिले 11वां स्थान पर सवाल
दुमका। दी गयी जानकारी के मुताबिक स्वच्छता व्यवस्था की निगरानी स्वच्छता निरीक्षक के माध्यम से की जाती है और प्रत्येक छह वार्ड पर एक वार्ड जमादार नियुक्त है। स्वच्छता सर्वेक्षण 2024-25 में दुमका नगर परिषद को राज्य स्तर पर 11वां और राष्ट्रीय स्तर पर 887वां स्थान मिला है। टुवैसो प्राइवेट लिमिटेड, जमशेदपुर के हवाले से दी गई जानकारी में बताया गया है कि डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण में 41 प्रतिशत और सूखा-गीला कचरा पृथक्करण में 24 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की गई है, जबकि दिये गये जवाब के मुताबिक दुमका नगर परिषद क्षेत्र में न तो डोर-टू-डोर कचरा उठाव की कोई व्यवस्था है औ न ही यहां कचरा का पृथक्करण किया जाता है यानि स्वच्छता सर्वेक्षण पूरी तरह से फर्जीवाड़ा है।

तीन वर्षों में नगर परिषद को 15 करोड़ से अधिक का घाटा
दुमका। नगर परिषद की आय और व्यय के आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024-25 में नगर परिषद को 15 करोड़ 44 लाख रुपये की आय हुई, जबकि 20 करोड़ 3 लाख 88 हजार रुपये खर्च किए गए। इसी तरह 2023-24 में 17 करोड़ 7 लाख 66 हजार रुपये की आय के मुकाबले 21 करोड़ 13 लाख 38 हजार रुपये खर्च हुए, जबकि 2022-23 में 14 करोड़ 54 लाख 96 हजार रुपये की आय के मुकाबले 21 करोड़ 37 लाख रुपये खर्च किए गए। इस तरह पिछले तीन वर्षों में नगर परिषद को कुल मिलाकर 15 करोड़ 48 लाख 61 हजार रुपये से अधिक का घाटा हुआ है।

नगर परिषद में कई अभियंता और अधिकारी कार्यरत
दुमका। आरटीआई के जवाब में यह भी बताया गया है कि दुमका नगर परिषद में असिस्टेंट टाउन प्लानर कुमार प्रियम, असिस्टेंट इंजीनियर फैसल अमन, सिटी मैनेजर सुमित प्रशांत सोरेन और प्रशांत भारती सहित छह कनीय अभियंता कार्यरत हैं। इनमें अनिल कुमार, सृजन अटल, पिंटू मुर्मू, अगस्टीन किस्कु, सुशांत गौतम और देवव्रत घोष शामिल हैं। असिस्टेंट टाउन प्लानर और असिस्टेंट इंजीनियर को झारखंड सरकार के लेवल-9 पे स्केल के तहत लगभग 93 हजार से 98 हजार रुपये मासिक वेतन मिलता है, जबकि कनीय अभियंताओं को लेवल-6 पे स्केल के तहत लगभग 63 हजार से 68 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जाता है। सिटी मैनेजर में से प्रत्येक को शहरी विकास एवं आवास विभाग, रांची से 45000 रुपये मानदेय प्राप्त होता है।







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