चीन और अमेरिका में बैठे लोगों के साथ मिलकर भारत में ‘रिजीम चेंज’ की साजिश : निशिकांत दुबे

राहुल गांधी की 270 विदेश यात्राओं की फंडिंग पर उठाए सवाल,
दुमका। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर विदेशी ताकतों के संपर्क में रहने और देश को अस्थिर करने की साजिश में शामिल होने के आरोप लगाए। दुमका में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने अमेरिकी कांग्रेस और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों से जुड़े दस्तावेज दिखाने का दावा किया। दुबे ने आरोप लगाया कि चीन में बैठे नेविल रॉय सिंघम, हवाला फंडिंग नेटवर्क, सोरोस फाउंडेशन और अमेरिकी सांसद इल्हान उमर जैसी ताकतों के साथ मिलकर देश में ‘रिजीम चेंज’ की पटकथा लिखी जा रही है। उन्होंने राहुल गांधी की कथित 270 विदेश यात्राओं के खर्च का स्रोत पूछते हुए उनकी यात्राओं, पदयात्राओं और विरोध प्रदर्शनों की फंडिंग की जांच कराने की मांग की। ये आरोप दुबे ने लगाए हैं; उनके समर्थन में स्वतंत्र रूप से सत्यापित साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।

जाकिर नाइक, गुरपतवंत पन्नू और दाऊद इब्राहिम का किया जिक्र
भाजपा सांसद ने जाकिर नाइक, सिख फॉर जस्टिस के गुरपतवंत सिंह पन्नू और दाऊद इब्राहिम का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि ये तत्व भारत में चल रहे आंदोलनों का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि धार्मिक और सामाजिक मुद्दों के माध्यम से देश में विभाजन पैदा करने की कोशिश की जा रही है। दुबे ने कहा कि कभी हिंदू-मुस्लिम, कभी सिख-ईसाई और कभी अनुसूचित जाति-जनजाति के मुद्दों को लेकर समाज को बांटने का प्रयास होता है। उन्होंने विपक्ष पर विदेशी ताकतों के साथ मिलकर देश को अस्थिर करने की साजिश का आरोप लगाया। हालांकि, इन कथित संबंधों और आंदोलनों के बीच किसी साझा साजिश की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध सामग्री में नहीं है।

एआई, क्रिप्टो करेंसी और ऑनलाइन गेमिंग नेटवर्क पर सवाल
दुबे ने नेविल रॉय सिंघम से जुड़े कथित नेटवर्क का उल्लेख करते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्रिप्टो करेंसी और ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े समूहों की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि इन क्षेत्रों से जुड़े लोगों और विपक्षी नेताओं के बीच क्या संबंध हैं और क्या आंदोलनों तथा पदयात्राओं के लिए आर्थिक मदद दी जा रही है। राहुल गांधी की पिछले 5 वर्षों की मुलाकातों और भारत जोड़ो यात्रा से लेकर अब तक उनके कार्यक्रमों में शामिल लोगों की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग भी की। दुबे ने कहा कि इन कथित नेटवर्कों की फंडिंग और राजनीतिक संपर्कों की जांच होनी चाहिए। उन्होंने इन गतिविधियों को सरकार अस्थिर करने की कोशिश से जोड़ा, लेकिन इस संबंध में कोई जांच निष्कर्ष प्रस्तुत नहीं किया।

‘जेन जी’ आंदोलन पर राहुल गांधी की उम्र को लेकर टिप्पणी
भाजपा सांसद ने राहुल गांधी की उम्र और पहनावे पर टिप्पणी करते हुए कहा कि 56 वर्ष की उम्र में टी-शर्ट और जींस पहनने से कोई युवा नहीं हो जाता। उन्होंने कुछ आंदोलनकारियों को ‘जेन जी’ बताने पर सवाल उठाए और प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव तथा वृंदा करात जैसे नेताओं का नाम लेते हुए कहा कि वे लंबे समय से विभिन्न आंदोलनों में सक्रिय रहे हैं। दुबे ने दावा किया कि हालिया विरोध प्रदर्शन केवल युवा आंदोलन नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे अन्य संगठनों और समूहों की भूमिका भी जांची जानी चाहिए। उन्होंने विपक्ष पर विभिन्न मुद्दों के माध्यम से सरकार के खिलाफ माहौल बनाने का आरोप लगाया।

ज्ञानेश कुमार के विरोध को एसआईआर से जोड़ा
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरोध पर दुबे ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत मतदाता सूची से कथित बांग्लादेशी घुसपैठियों के नाम हटने की आशंका के कारण विपक्ष उनका विरोध कर रहा है। उन्होंने संथाल परगना के जनसंख्या आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि 1951 में क्षेत्र में आदिवासी आबादी 45 प्रतिशत थी, जो 2011 की जनगणना में घटकर 26-27 प्रतिशत रह गई, जबकि मुस्लिम आबादी 7 प्रतिशत से बढ़कर 24-25 प्रतिशत हो गई। दुबे ने इन बदलावों को कथित घुसपैठ से जोड़ते हुए कहा कि एसआईआर के कारण विपक्ष को चुनावी नुकसान होने का डर है। हालांकि, जनसंख्या में बदलाव के कारणों और कथित घुसपैठ के संबंध में उनके दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

चुनाव को बताया सत्ता परिवर्तन का संवैधानिक रास्ता
दुबे ने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार लोकतंत्र में विश्वास करती है और किसी भी सरकार को बदलने का संवैधानिक रास्ता चुनाव है। उन्होंने नीट, बेरोजगारी, महंगाई और मुख्य निर्वाचन आयुक्त के विरोध जैसे मुद्दों पर विपक्ष की भूमिका पर सवाल उठाए। दुबे के अनुसार, भाजपा इन मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाएगी और विपक्ष के कथित एजेंडे को सामने रखेगी। उन्होंने कहा कि जनता ही चुनाव के माध्यम से किसी राजनीतिक दल को सत्ता से बाहर कर सकती है। भाजपा सांसद ने राहुल गांधी और विपक्षी दलों से विदेशी संपर्कों, यात्राओं की फंडिंग तथा आंदोलनों में शामिल संगठनों को लेकर सवालों का जवाब देने की मांग की।





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