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सोने से पहले आरती ने किया था अंतिम फोन, बच्चों ने भी बात की थी मामी से

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दुमका जिले के सरैयाहाट थाना क्षेत्र के बरदेही गांव में शनिवार की रात एक दिल दहलाने वाली वारदात सामने आई, जहाँ बीरेंद्र मांझी नामक व्यक्ति ने अपनी पत्नी आरती (27) और दो मासूम बच्चों—रुही (4) और विराज (2)—की गला दबाकर हत्या करने के बाद खुद भी फांसी लगाकर जान दे दी। शनिवार रात आरती ने खाना खाने के बाद अपनी भाभी से फोन पर बात की थी और दोनों बच्चों ने भी मामी से बात की थी। किसी को अंदेशा नहीं था कि यह उनकी आखिरी बातचीत होगी।

बीमार बेटे के इलाज को लेकर बढ़ता विवाद बना तनाव की वजह

करीब छह वर्ष पूर्व हिन्दू रीति-रिवाज से हुई आरती और बीरेंद्र की शादी के बाद सब कुछ सामान्य था। लेकिन दो वर्षीय बेटे विराज के हार्ट की बीमारी सामने आने के बाद पति-पत्नी के बीच विवाद बढ़ने लगा। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण इलाज कराना मुश्किल था, जिससे रिश्तों में दरार आई और आरती छह महीने पहले मायके पालाजोरी चली गई थी। शनिवार को बीरेंद्र नवान्न पर्व मनाने की बात कहकर पत्नी और बच्चों को मायके से वापस ले आया। मायके वाले भेजने को तैयार नहीं थे, लेकिन बीरेंद्र ने अपनी माँ से फोन कराकर उन्हें समझाया, उसके बाद आरती और बच्चे उसके साथ चले आए।

नींद में पत्नी-बच्चों की हत्या, फिर खेत में जाकर लगा ली फांसी

रात में परिवार फर्श पर बिछाए गए पुआल और चादर पर सोया था। पुलिस के अनुसार, बीरेंद्र ने पहले पत्नी की गर्दन रस्सी से दबाकर हत्या की, फिर दिल के मरीज बेटे विराज और अंत में बेटी रूही का गला दबा दिया। हत्या के बाद वह कुछ देर शवों के पास बैठा रहा। फिर घर से निकलकर खेत की मेड़ पर स्थित नीम के पेड़ पर उसी रस्सी से फांसी लगा ली।


मायके वालों का आरोप—ससुराल वालों ने की हत्या, पुलिस से निष्पक्ष जांच की मांग

घटना की खबर मिलते ही आरती के मायके वाले बरदेही गांव पहुंचे और ससुराल पक्ष पर आरती और बच्चों की हत्या का आरोप लगाया। परिजनों ने दावा किया कि साक्ष्य मिटाने के लिए बीरेंद्र की भी हत्या की गई है। उन्होंने पुलिस से ससुराल वालों को हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।


बीरेंद्र के पिता ने कहा—रात में हुआ था विवाद, सुबह दिखा भयावह दृश्य

बीरेंद्र के पिता मनोज मांझी ने बताया कि रात में पति-पत्नी के बीच किसी बात पर विवाद हुआ था। सुबह जब वे उठे तो आरती और दोनों बच्चों के शव घर के अंदर और बीरेंद्र का शव नीम के पेड़ से लटका मिला। उन्होंने बेटे को पेड़ से उतारा, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।


गांव में मातम, नवान्न पर्व भी नहीं मनाया गया

एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत की खबर फैलते ही गांव में सन्नाटा पसर गया। नवान्न पर्व होने के बावजूद किसी भी घर में चूल्हा नहीं जला। दोनों परिवारों की चीख-पुकार से पूरा गांव गमगीन हो गया।


एसपी व एसडीपीओ पहुंचे मौके पर, तकनीकी टीम ने जुटाए साक्ष्य

घटना की जानकारी मिलते ही एसपी पीतांबर सिंह खरवार, एसडीपीओ अमित कच्छप और थाना प्रभारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने चारों शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा और तकनीकी टीम को साक्ष्य एकत्र करने का निर्देश दिया। खबर लिखे जाने तक किसी भी पक्ष की ओर से पुलिस को लिखित आवेदन नहीं मिला था। आवेदन मिलते ही प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

 
 
 

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