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संथालों ने दिशोम जाहेर थान में की हरिया़ड़ पूजा

अच्छी फसल और कीटों व प्राकृतिक आपदाओं से बचाव की प्रार्थना

दुमका। दुमका के दिशोम जाहेर थान में रविवार को नायकी बाबा सीताराम सोरेन के नेतृत्व में हरिया़ड़ पूजा की गई। सर्वप्रथम नायकी बाबा ने जाहेर थान में जाहेर ऐरा, गोसाईं ऐरा, ठाकुर-ठाकरान, मोड़ें कु-तुरई कु, रोगों गो, तार अंतार और मरांग बुरू आदि ईस्ट देवता से प्रार्थना कर मुर्गा-मुर्गी का बलि दिया गया। इसके बाद सभी ने खिचड़ी का प्रसाद ग्रहण किया। इस आयोजन में दिशोम मांझी बाबा बीनीलाल टुडू, सुरेश चंद्र सोरेन, मोहन टुडू, लाईनदु, चुनू हेंब्रम, बीडी किस्कू, दशमात किस्कू, सुनील मरांडी, सोनाधन बेसरा, जोसेफ टुडू, संदीप मुर्मू, प्रेम हांसदा, दीपक मरांडी, लव किशोर टुडू, राम हांसदा, लक्ष्मण हांसदा, शिवकांत मुर्मू, सिकंदर हेंब्रम, सनी देओल बेसरा, सिमोन मरांडी, बसंत टुडू आदि शामिल हुए।

कृषि-संस्कृति और प्रकृति-पूजन परंपरा को दर्शाता है हरिया़ड़

दिशोम मांझी बाबा बीनीलाल टुडू ने बताया कि हरिया़ड़ का मतलब है हरियाली या हरापन। यह संथाल समाज की कृषि-संस्कृति और प्रकृति-पूजन परंपरा को दर्शाता है। हरिया़ड़ पूजा को “फसल की शुरुआत का त्योहार” कहा जा सकता हैं, जिसमें धरती माँ और देवताओं से अच्छी पैदावार की कामना की जाती है। संथाल समाज हर साल धान की बुआई (रोपनी) के समय यह पूजा करता है। माना जाता है कि खेतों में बोए गए बीज अच्छी तरह अंकुरित हों, फसलें लहलहाएँ और कीट-पतंगों व प्राकृतिक आपदाओं से बची रहें। धरती माता (जाहेर ऐरा) और ग्राम देवताओं को खुश करने के लिए यह पूजा की जाती है। यह कृषि आधारित समाज की समृद्धि और सुरक्षा की प्रार्थना है।


 
 
 

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