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बीएड छात्रों के लिए बड़ा झटका, नामांकन शुल्क में 48 प्रतिशत बढ़ोतरी

मांग नहीं मानी गयी और शुल्क में बढ़ोतरी वापस नहीं लिया को 16 से तालाबंदी

दुमका। सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय (एसकेएमयू) द्वारा बीएड नामांकन शुल्क में भारी बढ़ोतरी के फैसले से छात्र-छात्राओं में आक्रोश फैल गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने जहाँ अब तक 88 हजार रुपये के स्थान पर 1.30 लाख रुपये नामांकन शुल्क तय कर दिया है, वहीं प्रति वर्ष का शुल्क भी 44 हजार से बढ़ाकर 65 हजार कर दिया गया है। इस फैसले के बाद विश्वविद्यालय और इसके अंगीभूत कॉलेजों के छात्र संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। छात्रों ने इसे “शिक्षा पर आर्थिक हमला” बताते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि यह फैसला गरीब और मध्यमवर्गीय छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है और इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए।

11 बजे कुलपति से मिलेगा छात्रों का प्रतिनिधिमंडल

छात्र नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन शुल्क वृद्धि का निर्णय वापस नहीं लेता है तो वे उग्र आंदोलन करेंगे। सिकामु विवि के छात्र समन्वय समिति के अध्यक्ष श्यामदेव हेम्ब्रम ने बताया कि जिस बैठक में शुल्क बढ़ोत्तरी का निर्णय लिया गया उसमें छात्र प्रतिनिधि को शामिल नहीं किया गया। छात्रों की राय लिये बिना विवि प्रशासन ने एक अधिकारी के इशारे पर छात्रहित के खिलाफ शुल्क बढ़ोत्तरी का जो निर्णय लिया है, उसे यदि तुरंत वापस नहीं लिया गया तो 16 सितम्बर से हम विवि के तहत संचालित सभी बीएड कालेजों में तालाबंदी कर देंगे और धरना-प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने बताया कि छात्र समन्य समिति का एक प्रतिनिधिमंडल सोमवार को 11 बजे विवि जाकर कुलपति से मिलेगा और उनसे शुल्क बढ़ोत्तरी को वापस लेने का आग्रह करेगा।

44 हजार से बढ़ाकर 88 हजार रुपये किया गया था फी

छात्र नेता श्यामदेव हेम्ब्रम ने कहा “बीएड कोर्स में दाखिला लेना पहले ही महंगा था। अब एक साथ इतना ज्यादा शुल्क बढ़ाना अन्यायपूर्ण है।’’ उन्होंने बताया कि पहले बीएड का शुल्क 12 हजार रुपये था जिसे बढ़ाकर 44,000 रुपये कर दिया गया। कुलपति कमर अहसन और प्रति कुलपति डा राम यतन प्रसाद के समय बीएड के फी को इस आधार पर 44 से 88 हजार कर दिया गया कि प्रत्येक बीएड कालेज में 15-16 टीचर को मासिक मानदेय का भुगतान देना होता है। तब छात्रों ने बेहतर शिक्षा प्राप्त करने के लिए इस बढ़ोत्तरी को स्वीकार कर लिया पर विवि प्रशासन ने वादाखिलाफी की। शुल्क तो दो गुना लिया पर बीएड कालेजांें में टीचर की संख्या 5 से 7 ही रही।

10 साल का पैसा कहां गया, हिसाब दे विवि प्रशसन

छात्र नेता श्यामदेव हेम्ब्रम ने कहा कि विवि प्रशासन पहले यह जवाब दे कि टीचरों की संख्या में बढ़ोत्तरी के एवज में छात्रों से 10 सालों तक जो दोगुना फी वसूला गया वह कहां गया। उन्होंने बताया कि 10 साल पूर्व बीएड कालेजों में मापदंड के मुताबिक 15-16 शिक्षक रखने की अनिवार्यता का हवाला देकर विवि प्रशासन ने फी को 44 से बढ़ाकर 448 हजार रुपये कर दिया था पर बीएड कालेजों में शिक्षकों की संख्या नहीं बढ़ायी गयी। एसपी बीएड कालेज में 7 शिक्षक रहे जबकि अन्य में यह संख्या 5 ही रही। जब छात्रों से 10 वर्षों तक 15 शिक्षकों का पैसा लिया गया और शिक्षक 5-6 ही रहे तो शेष पैसा कहां गया, विवि प्रशासन पहले इसका जवाब दे।

छात्र संगठनों के निशाने पर डा राजीव कुमार

विवि के एक अधिकारी इन दिनों छात्र संगठनों के निशाने पर है, नाम है डा राजीव कुमार। हाल ही में अधिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने डा राजीव कुमार पर भ्रष्टाचार के कई गंभीर आरोप लगाते हुए राजभवन से लिखित शिकायत की है। अब छात्र समन्वय समिति के निशाने पर भी यही डा राजीव कुमार हैं। श्यामदेव हेम्ब्रम ने आरोप लगाया है कि बीएड के शुल्क में बढ़ोत्तरी के पीछे डा राजीव कुमार की ही साजिश है। अभी तक इस मामले में विवि के कुलसचिव या प्रवक्ता के तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम के लिए विश्वविद्यालय परिसर में अतिरिक्त बल तैनात किए जा सकते हैं। जानकार बताते हैं यदि स्थिति पर तुरंत ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले दिनों में एसकेएमयू कैंपस छात्र आंदोलन का केंद्र बन सकता है, जिससे पढ़ाई-लिखाई पर असर पड़ना तय है।


 
 
 

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