बंदोबस्त कार्यालय में हंगामा, एएसओ को लेकर पहुंचे आयुक्त कार्यालय
- SANTHAL PARGANA KHABAR
- Jun 9
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दुमका। दुमका स्थित बंदोबस्त कार्यालय में सोमवार को एक बंदोबस्ती मामले को लेकर जमकर हंगामा हुआ, जिससे कुछ समय के लिए अफरा-तफरी की स्थिति उत्पन्न हो गई। हंगामे के दौरान आक्रोशित पक्ष सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी (एएसओ) मनोज कुमार को बंदोबस्त कार्यालय से लेकर सीधे संथाल परगना प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय पहुंच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए आयुक्त के सचिव अमित कुमार ने तत्काल नगर थाना प्रभारी एवं अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी को कार्यालय बुलाया। इसके बाद आयुक्त कार्यालय में दोनों पक्षों की मौजूदगी में पूरे मामले की जानकारी ली गई। आयुक्त के सचिव ने सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी को निर्देश दिया कि संबंधित मामले से जुड़े सभी अभिलेख एवं दस्तावेज शाम तक उपलब्ध कराए जाएं, ताकि मामले की निष्पक्ष समीक्षा की जा सके।

2018 से लंबित वाद में अंतिम चरण में मिला नोटिस
पीड़ित पक्ष ने बताया कि अंतिम प्रकाशन शिविर न्यायालय, महगामा (गोड्डा) में लंबित आपत्तिवाद संख्या 824/2018, उदयकृष्ण सिंह एवं अन्य बनाम सुकरी देवी मामले में उन्हें विपक्षी के रूप में 16 दिसंबर 2025 को नोटिस प्राप्त हुआ, जबकि यह वाद वर्ष 2018 से लंबित था। नोटिस मिलने के बाद वे निर्धारित तिथि पर न्यायालय में उपस्थित हुए और अपना जवाब दाखिल किया। दस्तावेजों के अनुसार वादी पक्ष ने महगामा अंचल के मझौना मौजा स्थित जमाबंदी संख्या 03 की भूमि पर दावा करते हुए कहा है कि मूल रैयत चुहावती देवी, पति स्वर्गीय सुरुज ब्रह्म, निःसंतान थीं तथा उनके पति की बहन घाटो देवी के वंशज होने के नाते भूमि पर उनका अधिकार बनता है। वादी पक्ष का आरोप है कि वर्तमान जमाबंदी में बाहरी व्यक्तियों का नाम गलत तरीके से दर्ज कर दिया गया है, जिसे निरस्त कर उनके नाम दर्ज किए जाने की मांग की गई है।

फैसले में अनियमितता और पैसे लेकर आदेश देने का आरोप
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि वर्षों तक चल रहे वाद की जानकारी उन्हें समय पर नहीं दी गई और अंतिम चरण में नोटिस भेजा गया। उनका कहना है कि जवाब दाखिल करने के करीब छह माह के भीतर 30 मार्च 2026 को मामले में आदेश पारित कर दिया गया। उन्हें जानकारी मिली कि कथित रूप से पैसे लेकर उनके विरुद्ध और वादी पक्ष के पक्ष में फैसला दिया गया है। पीड़ित पक्ष ने बताया कि महगामा अंचल के मझौना मौजा, दाग संख्या 542 की लगभग 6 बीघा 14 कट्ठा 2 धूर भूमि को लेकर यह विवाद चल रहा है। इसी भूमि के 0.24 एकड़ हिस्से का रेलवे द्वारा अधिग्रहण किया गया है, जिसके मुआवजे के लिए भू-अर्जन कार्यालय, गोड्डा ने उन्हें नोटिस भी दिया था। हालांकि आपत्तिवाद लंबित रहने के कारण मुआवजा भुगतान नहीं हो सका, जिससे परिवार के बच्चों की पढ़ाई और शादी जैसे महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

रिकॉर्ड नहीं दिखाने पर बढ़ा विवाद, महिलाओं ने लगाई गुहार
पीड़ित पक्ष के अनुसार जब वे सोमवार को बंदोबस्त कार्यालय पहुंचे और सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी से मामले की जानकारी मांगी तो उन्होंने बताया कि केस रिकॉर्ड पेशकार के पास है और उसके लौटने के बाद ही अभिलेख दिखाए जा सकेंगे। आरोप है कि एएसओ ने इतना जरूर बताया कि मामले में वादी पक्ष के पक्ष में आदेश पारित किया जा चुका है, लेकिन आदेश का आधार और उसकी प्रति उपलब्ध नहीं कराई। पीड़ित पक्ष का कहना है कि जब उन्होंने रिकॉर्ड दिखाने की मांग की तो एएसओ अपने कक्ष में ताला लगाकर जाने लगे। इस दौरान महिलाओं ने हाथ जोड़कर, पैर पकड़कर और अपनी स्थिति बताते हुए मामले की जानकारी देने की गुहार लगाई, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद आक्रोशित लोग एएसओ को लेकर आयुक्त कार्यालय पहुंच गए।

आयुक्त सचिव ने मांगी लिखित शिकायत, जांच का दिया आश्वासन
आयुक्त के सचिव अमित कुमार ने पीड़ित पक्ष की पूरी बात सुनने के बाद उन्हें अपनी शिकायत आयुक्त के नाम लिखित रूप से देने का निर्देश दिया और आश्वासन दिया कि मामले की जांच कर समुचित कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने एएसओ को भी आदेश दिया कि संबंधित केस रिकॉर्ड उसी दिन शाम तक आयुक्त कार्यालय में उपलब्ध कराया जाए। अमित कुमार ने बताया कि करीब 10 दिन पूर्व प्रमंडलीय आयुक्त द्वारा बंदोबस्त कार्यालय का निरीक्षण किया गया था, जिसमें भी कुछ अनियमितताएं सामने आई थीं। मामले की प्रशासनिक स्तर पर समीक्षा की जा रही है और अभिलेखों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

एएसओ को आयुक्त कार्यालय ले जाने के मामले में 4 महिलाएं हिरासत में
सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी मनोज कुमार को बंदोबस्त कार्यालय से पैदल प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय तक ले जाने के मामले में नगर थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सुकरी देवी, उनकी पुत्री डोली देवी समेत चार महिलाओं को हिरासत में ले लिया है। जानकारी के अनुसार मंगलवार को दुमका कोर्ट परिसर के समीप से पुलिस ने चारों महिलाओं को उस समय हिरासत में लिया, जब वे आयुक्त के सचिव अमित कुमार के निर्देश के आलोक में प्रमंडलीय आयुक्त के नाम दिए जाने वाले आवेदन को टाइप करवाने जा रही थीं। बताया जा रहा है कि सोमवार को बंदोबस्ती वाद से जुड़े विवाद को लेकर बंदोबस्त कार्यालय में हंगामा हुआ था, जिसके बाद आक्रोशित पक्ष सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी को साथ लेकर आयुक्त कार्यालय पहुंच गया था। इस घटना को प्रशासन ने गंभीरता से लिया है और मामले की जांच की जा रही है। वहीं महिलाओं को हिरासत में लिए जाने की सूचना के बाद संबंधित पक्ष में नाराजगी देखी जा रही है।




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