देवघर के स्कूल में दो छात्राओं के बीच हिंसक झड़प, एक गंभीर रूप से घायल – कोलकाता रेफर
- SANTHAL PARGANA KHABAR
- Oct 9, 2025
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स्कूल परिसर में हड़कंप, मामूली कहासुनी बनी हिंसा का कारण
देवघर जिले के सोनारायठाड़ी प्रखंड स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय में गुरुवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई जब दो छात्राओं के बीच मामूली कहासुनी ने हिंसक रूप ले लिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, लंच ब्रेक के दौरान किसी बात को लेकर दोनों छात्राओं में झगड़ा हो गया। बात इतनी बढ़ी कि एक छात्रा ने दूसरी पर हमला कर दिया। इसमें लाज्जो कुमारी (11 वर्ष) गंभीर रूप से घायल हो गई और जमीन पर गिर पड़ी।
सदर अस्पताल से कोलकाता रेफर, आंख में गंभीर चोट
घटना की जानकारी मिलते ही शिक्षकों ने परिजनों को बुलाया। परिजन तुरंत लाज्जो को देवघर सदर अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार किया। डॉक्टरों ने बताया कि उसकी बाईं आंख में गहरी चोट है और लगातार खून बह रहा था। आशंका है कि आंख के आसपास की हड्डियों में फ्रैक्चर हुआ है। स्थिति को गंभीर देखते हुए उसे बेहतर इलाज के लिए कोलकाता रेफर कर दिया गया। डॉक्टरों ने चेताया कि समय पर उपचार नहीं मिलने पर उसकी आंख की रोशनी पर असर पड़ सकता है।
शिक्षकों पर लापरवाही का आरोप, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
घायल छात्रा के परिजनों ने विद्यालय प्रशासन और शिक्षकों पर लापरवाही का गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यदि शिक्षक समय रहते बीच-बचाव करते या बच्चों पर उचित निगरानी रखते, तो यह हादसा नहीं होता।
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि स्कूल में बच्चों की सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। उन्होंने जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) से लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए दोषी शिक्षकों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है।
DEO ने दी जांच के आदेश, रिपोर्ट मांगी
मामले को गंभीरता से लेते हुए DEO ने प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) को तुरंत जांच का आदेश दिया है। BEO ने विद्यालय के शिक्षकों और छात्रों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
DEO ने कहा, “विद्यालय में बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषी शिक्षकों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर, मदद की अपील
वर्तमान में घायल लाज्जो कुमारी को कोलकाता के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। परिवार ने बताया कि बच्ची की हालत अब भी नाजुक बनी हुई है और डॉक्टर उसकी लगातार निगरानी कर रहे हैं।
आर्थिक रूप से कमजोर परिवार इलाज का खर्च उठाने में असमर्थ है। परिजनों ने जिला प्रशासन से आर्थिक सहायता और न्याय की मांग की है।




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