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देवघर एम्स में निकाला गया चार वर्षीय बच्चे के गले में फंसा सिक्का

एक्स पर किया गया ट्वीट भी बेकार साबित हुआ, पीजेएमसीएच ने हाथ खड़ा किया

आशीष पंजियारा बने मसीहा, आर्थिक सहयोग व वाहन की व्यवस्था कर देवघर एम्स पहुंचाया

दुमका/नगर संवाददाता। गोपीकांदर प्रखंड के रांगा मिशन गांव के चार वर्षीय बालक राम मड़या के गले में फंसे सिक्का को अंततः देवघर एम्स के चिकित्सकों ने निकाल दिया। दुमका के फूलो झानो मेडिकल कालेज अस्पताल में बच्चे के गले से सिक्का नहीं निकाला जा सका था। इसको लेकर सामाजिक कार्यकर्ता सच्दिानंद सोरेन ने एक्स पर बच्चे का फोटो और एक्स रे अटैच करते हुए सीएम, स्वास्थ्य मंत्री, डीसी एवं सीएस कोक ट्वीट भी किया गया था पर वह भी बेकार साबित हुआ। संथाल परगना खबर के फेसबुक पेज और वेबसाइट में खबर प्रकाशित होने पर गोपीकांदर के वरीय चिकित्सा पर्यवेक्षक आशीष पंजियारा इस बच्चे और परिवार के लिए मसीहा बनकर सामने आये। वह बच्चे और उसके परिवार को लेकर देवघर एम्स गये और बच्चे के गले में फंसे सिक्का को निकाला गया।

खेलते-खेलते निगल लिया था दो रुपये का सिक्का

दुमका। राम मड़या ने सोमवार की सुबह खेलते-खेलते दो रुपये का सिक्का निगल लिया था। सिक्का गले में फंस जाने से बच्चे को लगातार उल्टियां होने लगीं। परिजन घबराकर उसे गोपीकांदर सीएचसी लेकर पहुंचे, जहां एक्स-रे में पता चला कि सिक्का गले में फंसा हुआ है। तत्काल बच्चे को दुमका मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया। दुमका मेडिकल कॉलेज में नाक-कान-गला विशेषज्ञ डॉ. आलोक कुमार ने काफी प्रयास किया, लेकिन ओसोफिलोस्कोप यंत्र के अभाव में सिक्का नहीं निकाला जा सका। इस बीच, वरीय चिकित्सा पर्यवेक्षक आशीष पंजियारा ने खुद पहल करते हुए बच्चे के परिवार की मदद दी। राइस अगेंस्ट हंगर इंडिया की प्रोग्राम ऑफिसर सुभाषी लकड़ा ने 2000 रुपये और आशीष पंजियारा ने 1500 रुपये देकर परिवार की आर्थिक मदद की। ममता वाहन की व्यवस्था कर महिला और बच्चे को घर से अस्पताल तक लाने-ले जाने में भी मदद की गई।

बच्चे की जान बचाने में कई लोगों ने की मदद

दुमका। स्थिति गंभीर देख आशीष पंजियारा ने पूर्व प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. विकास कुमार से संपर्क कर देवघर एम्स के डॉक्टरों को एक्स-रे रिपोर्ट भेजी। एम्स के डॉ. शशांक ने तत्काल बच्चे को बुलाने की सलाह दी। आशीष पंजियारा और मृगांक रक्षित ने अपने खर्च पर बच्चे को देवघर एम्स पहुंचाया। वहां चिकित्सकों के अथक प्रयास से मंगलवार की शाम सिक्का सफलतापूर्वक निकाल लिया गया। अब बच्चा पूरी तरह खतरे से बाहर है। आशीष पंजियारा ने इस कार्य में सहयोग देने वाले डॉ. विकास कुमार, वर्तमान प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. सुमित आनंद, दीपा मैडम, मृगांक रक्षित, बीरेंद्र साह, विवेक झा, गोवर्धन पंडित और राइस अगेंस्ट हंगर इंडिया की टीम को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि डॉ. सुमित आनंद के कार्यभार संभालने के बाद सीएचसी में त्वरित और संवेदनशील चिकित्सा सेवा का नया बदलाव देखने को मिल रहा है।

एक सप्ताह पूर्व दो वर्ष के बच्चे ने निगल लिया था सिक्का

दुमका। बच्चे द्वारा सिक्का निगलने की एक सप्ताह के अंदर यह दूसरी घटना है। इससे पूर्व दुमका के बक्सी बांध रोड इलाके में रहनेवाले एक परिवार के दो वर्षीय बच्ची ने पांच रूपये का सिक्का निगल लिया था जो उसके ग्रास नली में गला से थोड़ा नीचे जाकर फंस गया था। माता-पिता बच्ची को लेकर पीजेएमसीएच पहुंचे थे। सूचना मिलने पर रेड क्रॉस सोसायटी के सचिव डा अमरेन्द्र कुमार यादव भी बच्ची को देखने पीजेएमसीएच पहुचे थे और इएनटी विशेषज्ञ डा आलोक कुमार से बात की थी। तब भी आलोक कुमार ने उपकरण नहीं होने के कारण सिक्का निकालने में असमर्थता जताते हुए बिना देरी किये देवघर एम्स ले जाने की सलाह दी थी जहां बच्ी के गले से सिक्का निकाला गया।

मांग के बावजूद तीन साल से नहीं मिला ओसोफिलोस्कोप यंत्र

दुमका। विशेषज्ञ चिकित्सक ने बताया कि यदि यह यंत्र उपलब्ध होता तो सिक्का आसानी से निकाल लिया जाता। इस अभाव को लेकर स्थानीय लोगों ने गंभीर लापरवाही बताते हुए अस्पताल प्रबंधन पर सवाल उठाए। चिकित्सक ने बताया कि पिछले तीन साल से इस यंत्र की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक उपलब्ध नहीं कराया गया। इस घटना ने एक बार फिर दुमका मेडिकल कॉलेज में जरूरी उपकरणों की कमी को उजागर कर दिया है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि अस्पताल में शीघ्र ही ओसोफिलोस्कोप यंत्र उपलब्ध कराया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति में मरीजों को देवघर या अन्यत्र रेफर न करना पड़े।

 
 
 

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