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दुमका में मसलिया-रानेश्वर में 1313 करोड़ की योजना से 22,283 हेक्टेयर भूमि को मिलेगी सिंचाई सुविधा

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किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए राज्य है सरकार प्रतिबद्ध: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन

दुमका। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने सोमवार को दुमका जिले के रानेश्वर प्रखंड के मुरगुनी स्थित सिद्धेश्वरी नदी पर निर्माणाधीन मसलिया-रानेश्वर मेगा लिफ्ट सिंचाई परियोजना का निरीक्षण किया। उन्होंने परियोजना से जुड़े सभी कार्यों की अद्यतन प्रगति की जानकारी ली और संबंधित अधिकारियों को शेष कार्य अतिशीघ्र पूरा करने का निर्देश दिया। निरीक्षण के दौरान शिकारीपाड़ा विधायक आलोक कुमार सोरेन, मुख्य सचिव अविनाश कुमार और सचिव प्रशांत कुमार भी मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार “हर खेत तक पानी” पहुंचाने के लक्ष्य के साथ पूरे झारखंड में सिंचाई नेटवर्क का विस्तार कर रही है। आधुनिक तकनीक पर आधारित मेगा लिफ्ट सिंचाई परियोजनाएँ इसी दिशा में उठाया गया बड़ा कदम हैं। उन्होंने बताया कि मसलियादृरानेश्वर परियोजना दुमका जिले के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिससे 22 हजार हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी।

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किसानों की फसल उपज और आय बढ़ेगी: हेमंत सोरेन

दुमका। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘‘मैंने मसलिया-रानेश्वर मेगा लिफ्ट सिंचाई परियोजना के कार्य प्रगति का निरीक्षण किया। यह परियोजना राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है और इसे इस क्षेत्र के किसानों के लिए संपूर्ण वर्ष सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए बनाया जा रहा है। मसलिया-रानेश्वर मेगा लिफ्ट सिंचाई योजना से किसान वर्षभर पानी के अभाव से मुक्त रहेंगे, जिससे उनकी फसल उपज और आय बढ़ेगी और क्षेत्र में कृषि की नई संभावनाएं विकसित होंगी।’’ मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि ‘‘राज्य सरकार किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। इस परियोजना के सफल कार्यान्वयन से किसानों की जीवनशैली में सुधार होगा।’’ मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान 23 लाभुकों के बीच परिसंपत्तियों का वितरण किया, जिससे उन्हें आजीविका संवर्द्धन और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में नई संभावनाएं प्राप्त हुईं। वितरित परिसंपत्तियों में दिव्यांगों के लिए मोटर ट्राइसाइकिल, मोटरसाइकिल, मिनी मेडिकल यूनिट, बस, जेयूएन छात्रावास और वित्तीय सहायता आदि शामिल हैं।

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रोजगार के बढ़ेंगे अवसर, पर्यटन को भी मिलेगा बढ़ावा

दुमका। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना को बहुउपयोगी बनाने की दृष्टि से तैयार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि नदी के पानी का पूर्ण सदुपयोग सुनिश्चित होगा। अतिरिक्त पानी को तालाबों व जलाशयों में डाइवर्ट किया जा सकेगा। परियोजना से पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर बनेंग।े मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना किसानों की जीवनशैली में सकारात्मक और स्थायी बदलाव लाएगी।

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एल एंड टी कंपनी ने बताया 80 प्रतिशत कार्य पूरा

दुमका। परियोजना का निर्माण एल. एंड टी. कंपनी द्वारा किया जा रहा है। कंपनी के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि बैराज निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। 15 गेटों में 90ः कार्य पूर्ण हो गया है। 3 में से 1 पंप हाउस पूरी तरह तैयार है। 5 में से 3 डिलीवरी चौंबर पूर्ण है। शेष कार्य तेजी से प्रगति पर है। कंपनी ने आश्वस्त किया कि अगले वर्ष जनवरी तक लगभग 6,400 हेक्टेयर भूमि में भूमिगत पाइपलाइन के माध्यम से सिंचाई सुविधा शुरू हो जाएगी।

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दो प्रखण्डों के 22,283 हेक्टेयर भूमि को मिलेगा लाभ

दुमका। मसलिया-रानेश्वर मेगा लिफ्ट सिंचाई परियोजना के तहत मसलिया प्रखंड के 15 पंचायत और रानेश्वर प्रखंड के 4 पंचायत के कुल 226 गांव को सीधे लाभ मिलेगा। परियोजना पूरी होने पर 22,283 हेक्टेयर कृषि भूमि में जल आपूर्ति सुनिश्चित होगी। 1313 करोड़ की इस महत्वाकांक्षी परियोजना की आधारशिला मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने नवंबर 2022 में रखी थी। कुल 1313 करोड़ रुपये की लागत से बन रही यह परियोजना दुमका जिले के कृषि विकास और जल प्रबंधन व्यवस्था में ऐतिहासिक परिवर्तन लाने में सक्षम मानी जा रही है।

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हमारी सरकार जो कहती है, करके दिखाती है: मुख्यमंत्री

दुमका। मुख्यमंत्री ने कहा कि “हमारी सरकार जो कहती है, करके दिखाती है,”राज्य की आधी आबादी को सशक्त बनाने के लिए सरकार ने शिक्षा, स्वास्थ्य, और आर्थिक सशक्तिकरण जैसे क्षेत्रों में विशेष कदम उठाए हैं। शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट विद्यालयों की स्थापना से गुणवत्ता शिक्षा पहुंचने लगी है, जिससे युवाओं का सर्वांगीण विकास संभव हो रहा है। विशेष रूप से, ‘मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा पारदेशीय छात्रवृत्ति योजना’ राज्य सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जो उच्च शिक्षा के लिए विद्यार्थियों को विदेश भेजकर उनके भविष्य को उज्जवल बनाने का काम करती है। इस योजना के तहत हर वर्ष 25 छात्र-छात्राओं को चयनित कर उनकी विदेश में पढ़ाई का पूरा खर्च राज्य सरकार उठाती है। इसमें अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समुदाय के छात्र शामिल होते हैं। यह कदम राज्य सरकार की उस प्रतिबद्धता का उदाहरण है जो वह कहती है उसे पूरा करके दिखाती है। यह योजना न केवल उच्च शिक्षा के अवसर प्रदान करती है, बल्कि युवाओं को आत्म-निर्भर बनाने और उन्हें वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने में भी सहायक है।

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हेडक्वार्टर से नहीं गांवों से चलने वाली है हमारी सरकार

दुमका। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार हेडक्वार्टर से नहीं बल्कि गांवों से चलने वाली सरकार है। इस दिशा में ‘सेवा का अधिकार’ कार्यक्रम एक अहम पहल बनकर उभरा है, जिसके तहत अधिकारी अब पंचायत स्तर पर जाकर सीधे ग्रामीण जनता की समस्याओं को सुनकर समाधान कर रहे हैं। कार्यक्रम के अंतर्गत विभिन्न प्रखंडों और पंचायतों में शिविर लगाकर सरकारी सेवाओं और योजनाओं के लाभ सीधे जनता तक पहुंचाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अधिकारियों द्वारा निर्धारित समय सीमा में समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो उन अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। सेवा का अधिकार सप्ताह के दौरान जाति, आवासीय, आय प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, सामाजिक सुरक्षा पेंशन स्वीकृति आदि की सुविधा ग्राम स्तर पर उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही आप सरकारी योजनाओं के लिए आवेदन भी शिविरों में ही कर सकते हैं।

 
 
 

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