दुमका में किशोरी के अपहरण और दुष्कर्म मामले में दोषी को आजीवन कारावास
- SANTHAL PARGANA KHABAR
- Nov 10
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अदालत का बड़ा फैसला, दोषी दिलीप राय पर ₹30 हजार जुर्माना भी लगाया गया
दुमका। प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश एस. एन. मिश्रा की अदालत ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए अमलाचातर निवासी दिलीप राय को किशोरी के अपहरण और दुष्कर्म के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने दोषी पर ₹30,000 का जुर्माना भी लगाया है।

चार साल पुराने जामा कांड में आया फैसला
यह मामला 31 मई 2021 का है। जामा थाना क्षेत्र के एक गांव की किशोरी शौच के लिए घर से निकली थी, तभी आरोपी दिलीप राय ने डरा-धमकाकर उसका अपहरण कर लिया। इसके बाद उसने उसे खेत के पास एक सुनसान जगह ले जाकर दुष्कर्म किया। जब किशोरी देर तक घर नहीं लौटी, तो परिजन उसकी खोजबीन करने निकले और आरोपी को किशोरी के साथ आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ लिया। हालांकि, दिलीप राय उस वक्त मौके से भागने में सफल रहा।

एफआईआर, जांच और अदालत की सुनवाई
किशोरी के पिता की शिकायत पर जामा थाना में अपहरण व दुष्कर्म का मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने बाद में आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
मामले की सुनवाई के दौरान आठ गवाहों के बयान और पुख्ता साक्ष्य प्रस्तुत किए गए, जिनके आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया।

तीन धाराओं में सजा, एक में आजीवन कारावास
अदालत ने दिलीप राय कोकृ अपहरण के मामले में 7 वर्ष, दुष्कर्म के मामले में 10 वर्ष, और पॉक्सो एक्ट (च्व्ब्ैव्) के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही ₹30,000 का जुर्माना लगाया गया है।

सरकार की ओर से लोक अभियोजक ने रखी दलीलें
इस मामले में लोक अभियोजक चंपा कुमारी ने सरकार की ओर से पक्ष रखा। उन्होंने अदालत में कहा कि अपराध की गंभीरता और किशोरी के बयान को देखते हुए आरोपी को कठोरतम सजा दी जानी चाहिए।

न्यायालय ने कहा - समाज के लिए कड़ा संदेश
फैसला सुनाते हुए न्यायालय ने कहा कि नाबालिगों के साथ दुष्कर्म जैसे अपराध समाज के लिए कलंक हैं। ऐसे मामलों में कठोर दंड देना आवश्यक है, ताकि समाज में भय और न्याय का संतुलन बना रहे। “कानून हर पीड़िता को न्याय दिलाने में सक्षम है कृ यह फैसला उसका उदाहरण है।”









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