दुमका के शिकारीपाड़ा में पत्थर खदान को लेकर हुई जन सुनवाई
- SANTHAL PARGANA KHABAR
- Sep 8, 2025
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ग्रामीणों ने सड़क निर्माण, डीप बोरिंग, स्वास्थ्य सुविधा जैसी कई मांगें रखी
दुमका। दुमका जिला अंतर्गत शिकारीपाड़ा प्रखंड के पत्थर औद्योगिक क्षेत्र के पोरा बोसुरिया मौजा में सोमवार को झारखंड राज्य प्रदूषण पर्षद के बैनर तले पत्थर खदान संचालित करने के लिए पर्यावरण स्वीकृति देने हेतु प्रोपराइटर संजला बेसरा एवं ग्रामीणों के साथ अपर समाहर्ता राजीव कुमार ने जन सुनवाई किया। जन सुनवाई में ग्रामीणों ने बेनागडिया से पोंड़ा बासुरिया तक सड़क निर्माण करने, पेयजल के लिए डीप बोरिंग करने, स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने, जरूरत पड़ने पर वित्तीय सहायता प्रदान करने की मांग रखी। इसके अलावा शनिवार के दिन उस इलाके में ग्रामीणों की अधिक आवाजाही के कारण उस दिन परिवहन को बंद रखने का मांग किया। ग्रामीणों ने कहा कि अगर खदान मालिक उनकी उम्मीदों पर खरे नहीं उतरते हैं तो वह इसके लिए आवाज बुलंद करेंगे।

स्थानीय लोगों की उनकी राय, आपत्तियां तथा सुझाव लेना अनिवार्य
दुमका। पत्थर खदान के संचालन से पहले पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त करना अनिवार्य है। इस प्रक्रिया में जन सुनवाई एक अहम कड़ी होती है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि खदान परियोजना से जुड़े संभावित पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों पर जनता को जानकारी मिले और उनकी राय, आपत्तियां तथा सुझाव दर्ज किए जा सकें। इसमें परियोजना से संभावित खतरे जैसे वायु एवं जल प्रदूषण, भूमि क्षरण, मिट्टी का कटाव और वन्यजीव आवास के नुकसान से संबंधित जानकारी दी जाती है। सुनवाई में स्थानीय लोग अपनी आपत्तियां और सुझाव रखते हैं। इनका निवारण परियोजना प्रस्तावक और संबंधित प्राधिकरण को करना होता है। इसके बाद प्राप्त रिपोर्ट और सुझावों के आधार पर ही मंत्रालय या संबंधित प्राधिकरण यह तय करता है कि परियोजना को पर्यावरणीय मंजूरी दी जाए या नहीं।

डस्ट गिरवा कर बनवाएंगे रास्ता, डीप बोरिंग भी करवाएंगे: सीओ
दुमका। इस मुद्दे पर अंचल अधिकारी कपिल देव ठाकुर ने कहा कि इस रास्ते से जितने भी पत्थर खदानों के वाहन चलाते हैं उनके मालिकों के साथ एक बैठक कर वह जल्द से जल्द उसे पर डस्ट गिरवा कर रास्ता बनवाने का प्रयास करेंगे। साथ ही अगल-बगल के 5-- 6 पत्थर खदान मालिकों को एक साथ बैठकर पेयजल समस्या पर विचार करते हुए डीप बोरिंग करने का प्रयास करेंगे। अपर समाहर्ता राजीव कुमार ने बताया कि ग्रामीणों द्वारा रखी गई सभी मांगों पर अंचल अधिकारी द्वारा पत्थर खदान मालिकों के साथ मिलकर कार्य किया जाएगा। यदि इन लोगों द्वारा कार्य नहीं किया जाता है और ग्रामीणों की शिकायत प्रशासन के पास पहुंचेगी तो आगे की कार्रवाई की जाएगी।





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