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दुमका के मयूरनाथ में सामूहिक करमा पर्व का आयोजन

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अपनी संस्कृति एवं पहचान को बचाए रखने के लिए पर्व मनाना जरूरी: बीडीओ

रामगढ़/निज संवाददाता। भूईयां घटवार घटवाल क्रांति मोर्चा के बैनर तले रविवार को रामगढ़ प्रखंड के मयूरनाथ गांव में लगातार तीसरे वर्ष सामूहिक करमा पर्व का आयोजन किया गया। सामूहिक करमा पर्व में मुख्य अतिथि के तौर पर बीडीओ कमलेंद्र कुमार सिन्हा, थाना प्रभारी मनीष कुमार एवं जिप सदस्य अनीता देवी उपस्थित थे। बीडीओ ने कहा कि अपनी संस्कृति एवं पहचान को बचाए रखने के लिए पर्व मनाना बहुत ही जरूरी है। आज सरकारी स्तर पर भी संस्कृति की रक्षा एवं परंपरा को कायम रखने के लिए कई कार्यक्रम चलाए जाते हैं ताकि गांव की पुरानी परंपरा मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि रामगढ़ प्रखंड विकास की ओर अग्रसर हो इसके लिए सबों को मिलकर सहयोग करने की जरूरत है।

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लगातार तीसरी बार सामूहिक रूप से करमा पर्व का आयोजन

जिप सदस्य अनीता देवी ने कहा कि समुदाय द्वारा रामगढ़ प्रखंड में लगातार तीसरी बार सामूहिक रूप से करमा पर्व का आयोजन किया गया है। उन्होंने समाज के लोगों से नशा मुक्ति छोड़कर अपने बच्चों को हर हाल में शिक्षित करने का अनुरोध किया। बताते चलें कि भूईयां घटवार घटवाल संघ के बैनर तले रामगढ़ के मयूरनाथ गांव में तीसरी बार सार्वजनिक करमा पर्व का आयोजन किया गया।

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130 गांव के भूईयां, घटवार व घटवाल पहुंचे

रविवार को सुबह से ही तेज धूप के बावजूद समाज के महिला, पुरुष, किशोर एवं किशोरियों के उत्साह में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं देखने को मिली। सुबह 10 बजे से ही प्रखंड के विभिन्न गांव से करमा व्रती डाली लेकर आयोजन स्थल पर पहुंचने लगी थी। प्रखंड के लगभग 130 गांव के भूईयां, घटवार घटवाल समाज के लोग सामूहिक करमा पर्व में पहुंचे थे। इसके अलावा दुमका गोड्डा, देवघर के कई प्रखंड से भी सामूहिक करमा पर्व में भाग लेने समुदाय के लोग पहुंचे थे।

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सूप में कई प्रकार के पकवान लेकर आई थी करमा व्रती

युवाओं द्वारा करम डाल लाया गया था, जिसे डाली के बीचों-बीच गाड़ा गया। सभी करमा व्रती महिलाएं लाल रंग की पाड़ वाली सफेद साड़ी एवं लाल रंग की ब्लाउज पहने हुए थी वहीं पुरुष एवं युवक सादे रंग की धोती एवं गंजी पहने हुए थे तथा माथे पर लाल रंग की पगड़ी बांधे हुए थे। करमा व्रती अपने साथ नए सूप में कई प्रकार के पकवान लेकर आई थी। अपने-अपने सूप को आगे रखकर डाली के चारों ओर गोल घेरा बनाकर बैठ गईद्य इसके बाद शंकरपुर निवासी बासुदेव राय ने सभी करमा व्रतीयों को करमा-धरमा की कथा सुनाई।

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सुंदर झूमर गान एवं नृत्य करने वाली टोली को किया गया पुरस्कृत

इसके बाद नाच-गान का दौर प्रारंभ हो गया जो शाम तक चलता रहा। कई गांव के विभिन्न टोलियों द्वारा झूमर नृत्य प्रस्तुत किया गया। आयोजन कमेटी के सदस्यों द्वारा सुंदर झूमर गान एवं नृत्य प्रस्तुत करने वाली टोली को पुरस्कृत भी किया गया। देर शाम गोसाई विसर्जन के साथ सामूहिक करमा पर्व का समापन किया गया। सामूहिक करमा पर्व को सफल बनाने में जीतलाल राय, नागेन्द्र राय, हिसाबी राय, लालमोहन राय, बीरबल सिंह, अनिल राय, मंतोष राय, कंचन राय, अशोक राय, प्रेमलाल राय, रामकिशोर राय, काशीनाथ राय, गोविन्द राय, राजीव रंजन, मिथिलेश राय, मंतोष राय, कंचन राय, चंद्रकिशोर राय, हीरा लाल राय, संजय राय, सुरेंद्र राय, सुरेश राय आदि की सराहनीय भूमिका रही।

 
 
 

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