top of page

दुमका के आदिवासी कारीगरों की कला पहुँची राष्ट्रपति भवन तक


दुमका। दुमका जिले के आदिवासी कारीगरों की पारंपरिक बाँस शिल्पकला ने एक बार फिर राष्ट्रीय पहचान हासिल की है। इसाफ फाउंडेशन की पहल और नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ मेटेरियल्स रिसर्च (एनआईएमएस) के सहयोग से दुमका के शिल्पकारों ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित स्वतंत्रता दिवस ‘एट होम’ स्वागत समारोह के लिए विशेष बाँस किट तैयार कर भेजे। इन किटों में प्राकृतिक बाँस का उपयोग कर अनूठे डिज़ाइन और हस्तकला का प्रदर्शन किया गया, जो पूर्वी भारत की समृद्ध परंपरा और शिल्पकला का प्रतिनिधित्व करते हैं।

उपायुक्त ने किया सम्मानित, कहा-दुमका के लिए गर्व का क्षण

दुमका उपायुक्त अभिजीत सिन्हा ने इन कारीगरों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा, “यह दुमका के बाँस शिल्पकला की राष्ट्रीय पहचान है और हमारे कारीगरों के कौशल का सम्मान है। हमें गर्व है कि हमारे जिले की कला राष्ट्रपति भवन तक पहुँची है।”

कारीगरों का उत्साह चरम पर

कारीगर किशोर महली और सुमेश महली ने कहा, “राष्ट्रपति भवन के लिए काम करना हमारे लिए गर्व और खुशी का क्षण है। यह हमारे पूरे समुदाय की ऐतिहासिक उपलब्धि है।”

इसाफ फाउंडेशन और एनआईएमएस की भूमिका

इसाफ फाउंडेशन लंबे समय से आदिवासी समुदायों के सतत विकास के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल प्रशिक्षण और आजीविका संवर्धन पर काम कर रहा है। एनआईएमएस, वर्ष 2008 से कौशल विकास शाखा के माध्यम से हस्तशिल्प, कृषि और विपणन में प्रशिक्षण और सहयोग प्रदान कर रहा है।

स्थानीय कारीगरों को मिला राष्ट्रीय मंच

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहल न केवल कारीगरों के कौशल को प्रोत्साहित करती है, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजार से जोड़ने में भी मदद करती है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और आजीविका के अवसरों को नया बल मिलता है।


 
 
 

Comments


Post: Blog2 Post

Address

Shiv Sundari Road, Dumka, Jharkhand 814101

Contact

+917717793803

Follow

  • Facebook
  • YouTube
  • Twitter

©2021 by Santhal Pargana Khabar. All Rights Reserved

bottom of page