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दशहरा पर दिव्यांगजनों को दिये हारमोनियम, ढोलक, बांसुरी, खंजरी

4 झारखण्ड गर्ल्स बटालियन दुमका ने पेश किया सेवा एवं सौहार्द का अनूठा मिसाल

दुमका। दशहरा और दुर्गा पूजा भारतीय संस्कृति के ऐसे पर्व हैं, जो न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं बल्कि सामाजिक समरसता और भाईचारे का संदेश भी देते हैं। इन अवसरों पर परिवार और मित्रों के साथ मिलकर उत्सव मनाना सामान्य परंपरा है, लेकिन जब इन त्योहारों को समाज के उन विशेष लोगों के साथ साझा किया जाता है जो शारीरिक या मानसिक रूप से सक्षम नहीं हैं, तो उनका महत्व और भी बढ़ जाता है। इसी सोच को आत्मसात करते हुए 4 झारखण्ड गर्ल्स बटालियन, एनसीसी, दुमका ने इस बार का दशहरा और दुर्गा पूजा ‘विकलांग जन कल्याण केन्द्र, डुमका’ के निवासियों के साथ मनाया। कमांडिंग ऑफिसर कर्नल अनिल एवं बटालियन के सभी अधिकारी तथा कर्मचारी इस अवसर पर उपस्थित रहे। बटालियन की टीम ने वहां के सभी निवासियों को न केवल मिठाई वितरित की, बल्कि उनके लिए कई उपयोगी और सांस्कृतिक सामग्री भी भेंट की। इसमें हारमोनियम, ढोलक, बांसुरी, खंजरी तथा गद्दे शामिल थे। इन उपहारों का उद्देश्य केन्द्र के निवासियों के दैनिक जीवन में सुविधा पहुँचाना तथा उन्हें सांस्कृतिक गतिविधियों में भागीदारी के लिए प्रेरित करना था।

एनसीसी अधिकारियों एवं दिव्यांगों ने मिलकर बजाये वाद्ययंत्र

दुमका। कर्नल अनिल ने कहा कि “दुर्गा पूजा और दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक हैं। इस पर्व का सही अर्थ तभी है जब हम अपने आस-पास के उन लोगों को भी अपने साथ जोड़ें, जिन्हें समाज विशेष आवश्यकताओं वाला मानता है। विकलांग जन कल्याण केन्द्र के साथ यह उत्सव मनाकर हमें सच्चा संतोष और प्रसन्नता प्राप्त हुई है।” पूरे कार्यक्रम के दौरान 4 झारखण्ड गर्ल्स बटालियन के अधिकारी और जवान विकलांग के साथ घुल-मिलकर रहे। मिठाई वितरण के बाद सभी ने मिलकर संगीत वाद्ययंत्रों को बजाने का प्रयास किया और सामूहिक गीत-संगीत से वातावरण को उल्लासपूर्ण बना दिया। यह दृश्य देखकर केन्द्र के सभी निवासी अत्यंत खुश हुए और उन्होंने खुले मन से अपनी प्रसन्नता व्यक्त की।

सशस्त्र बलों का इस प्रकार आगे आना बहुत प्रेरणादायी

दुमका। केन्द्र के प्रभारी ने भी बटालियन की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि “सामाजिक संस्थाओं और सशस्त्र बलों का इस प्रकार आगे आना हमारे लिए बहुत प्रेरणादायी है। इन बच्चों और वयस्कों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए ऐसे प्रयास आवश्यक हैं। 4 झारखण्ड गर्ल्स बटालियन ने यह उदाहरण प्रस्तुत किया है कि कैसे उत्सवों को समाजसेवा के साथ जोड़ा जा सकता है।” इस कार्यक्रम ने न केवल केन्द्र के निवासियों को आनंद और आत्मीयता का अनुभव कराया, बल्कि सैनिकों को भी समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी का गहरा बोध कराया। कार्यक्रम में उपस्थित बटालियन के अधिकारियों ने कहा कि यह अनुभव उनके लिए भी अविस्मरणीय रहेगा और वे भविष्य में भी ऐसे सामाजिक कल्याणकारी कार्यों में सक्रिय रूप से भाग लेंगे।

भारतीय संस्कृति की असली शक्ति उसकी सामूहिकता व समावेशिता में

दुमका। समापन अवसर पर केन्द्र के निवासियों ने सभी मेहमानों को धन्यवाद ज्ञापित किया और भावुक होकर कहा कि यह दशहरा और दुर्गा पूजा उनके जीवन का सबसे यादगार पर्व रहा। 4 झारखण्ड गर्ल्स बटालियन, दुमका की इस अनूठी पहल ने यह साबित किया है कि त्योहार केवल पूजा-पाठ या पारंपरिक रीति-रिवाजों तक सीमित नहीं होते, बल्कि उनका वास्तविक महत्व तभी है जब हम समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलें। विकलांग जन कल्याण केन्द्र में जाकर उत्सव मनाना न केवल मानवता और करुणा का प्रतीक है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि भारतीय संस्कृति की असली शक्ति उसकी सामूहिकता और समावेशिता में निहित है।


 
 
 

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