दर-दर की ठोकर खा रहे तीन अनाथ भाई-बहन का सीएम ने लिया संज्ञान
- SANTHAL PARGANA KHABAR
- Sep 5, 2025
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बालिका का कस्तुरबा व बालकों का एससी बोस स्कूल में होगा नामांकन
दुमका। जरमुंडी के तीन अनाथ बालकों के दर-दर की ठोकर खाने की खबर वायरल होने पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने संज्ञान लेते हुए एक्स पर दुमका के उपायुक्त को बच्चों के उचित देखभाल के लिए जरूरी कदम उठाने का निर्देश दिया। दुमका के एक पत्रकार सुतिब्रो गोस्वामी ने एक्स पर पोस्ट कर यह जानकारी दी थी कि कैसे माता पिता के निधन के बाद अनाथ हुए तीनों बच्चे दर दर की ठोकर खा रहे हैं। पोस्ट पर संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने दुमका डीसी को निर्देश दिया कि तत्काल संज्ञान लें एवं बच्चों के उचित देखभाल एवं उज्जवल भविष्य हेतु हर जरूरी कदम उठाते हुए सूचित करें। इस निर्देश पर दुमका जिला प्रशासन ने त्वरित कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री को सूचित किया कि बच्चों के समुचित देखभाल एवं शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए बालिका का कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय जरमुंडी में और दोनों बच्चों का नेताजी सुभाष चन्द्र बोस आवासीय विद्यालय, दुमका में नामांकन के लिए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

दो वर्ष पूर्व माता-पिता की हो गयी है मौत
दरअसल दुमका जिला के जरमुंडी थाना क्षेत्र अंतर्गत आदिवासी बहुल गांव बेदिया में 12 वर्षीय सोनामुनि मरांडी, आठ वर्षीय राकेश मरांडी एवं सात वर्षीय साइमन मरांडी रहते हैं जिनके माता-पिता की दो वर्ष पूर्व मौत हो चुकी है। तीनों अनाथ बच्चों का पालन-पोषण उसके फूफा कर रहे थे जिसके एवज में बच्चों के दादा प्रतिमाह छह हजार रुपये देते थे। जब दादा ने रूपये देना बंद कर दिया तो फूफा ने भी बच्चों को रखने में असमर्थता जता दी। गुरूवार को पूर्व फूफा तीनों बच्चों को लेकर जरमुंडी थाना पहुंच गए। फूफा शिवलाल हेंब्रम थाना तीनों बच्चों को जरमुंडी थाना के हवाले करने पहुंचे थे। फूफा शिवलाल हेंब्रम की मानें तो वर्ष 2023 में एक सप्ताह के भीतर इन मासूमों के सर से माता-पिता का साया उठ गया। पिता लुखीलाल मरांडी की मौत के बाद मिर्गी बीमारी से माता बिटिया टुडू की भी मौत हो गयी। तीनों बच्चे सोनामुनि, राकेश और सायमन मरांडी अनाथ हो गए।

दादा देते थे खर्च, फूफा कर रहे थे पालन-पोषण
बच्चों के दादा जीवित है, लेकिन बच्चों की परवरिश करने में असमर्थता जताते हुए उन्होंने तीनों बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी अपने दामाद अर्थात बच्चों के फूफा शिवलाल हेंब्रम को दे दिया। शिवलाल भी बेदिया गांव के ही रहने वाले हैं. बच्चों की परवरिश के बदले दादा द्वारा प्रत्येक महीने 6 हजार रुपया शिवलाल को दिया जाने लगा। जब जब दादा ने बच्चों की परवरिश के बदले शिवलाल को 6 हजार रुपया देने में असमर्थता जताई। दादा चाहते है कि तीनों बच्चे अब उनके पास रहे लेकिन बच्चे फूफा को छोड़कर दादा के पास जाना नहीं चाहते। शिवलाल की भी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि बगैर मदद के तीनों बच्चों की बेहतर ढंग से परवरिश कर सके। थक हार कर शिवलाल तीनों मासूम को लेकर जरमुंडी थाना पहुंचा और थाना प्रभारी श्यामानंद मंडल को वस्तुस्थिति से अवगत कराया। थाना प्रभारी द्वारा इसकी सूचना बाल कल्याण समिति और जिला बाल संरक्षण इकाई को दी गई पर एक दिन तक इस मामले पर संज्ञान नहीं लिया गया।

बच्चांें के दरवाजे तक पहुंचे जरमुण्डी के सीओ, थानेदार व मुखिया
शुक्रवार को दोपहर में जब अनाथ बच्चों की बेबसी की खबर सोसल मीडिया पर वयरल हुई और एक्स पर मुख्यमंत्री तक पहुंच गयी तब कहीं जाकर जिला प्रशासन हरकत में आयी और जरमुण्डी के सीओ संजय कुमार, थाना प्रभारी, पत्रकार कुणाल सिंह राजपुत एवं मुखिया बच्चों और उसके फूफा से मिलने पहुंचे।





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