डायरिया से दुमका के गोपीकांदर के बांसपहाड़ी गांव में एक और मौत
- SANTHAL PARGANA KHABAR
- Nov 17
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स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर, बीडीओ ने दिए सख्त निर्देश
दुमका। गोपीकांदर प्रखंड के बांसपहाड़ी गांव में फैल रहे डायरिया का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। बीमारी ने सोमवार को एक और ग्रामीण की जान ले ली। डायरिया से पीड़ित होपना मरांडी (40) की मौत से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। यह बांसपहाड़ी गांव में डायरिया से होने वाली दूसरी मौत है।

इलाज के बाद दूसरे गांव में रह रहा था होपना
परिजनों के अनुसार, डायरिया की शिकायत होने पर होपना को दुमका फूलो झानो मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चार दिन तक चले इलाज के बाद चिकित्सकों ने उसे घर जाने की सलाह दी। गांव में डायरिया फैलने की वजह से परिवार ने उसे दूसरे गांव माहुलबोना में रख दिया। इसी दौरान उसकी तबीयत अचानक बिगड़ी और यूरिन बंद हो गया।

महेशपुर के निजी अस्पताल में हुआ ईलाज, सोमवार सुबह हुई मौत
रविवार को परिजनों ने उसे पाकुड़ जिले के महेशपुर प्रखंड स्थित माहुलबोना के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां चिकित्सकों ने बेहतर उपचार के लिए बड़े अस्पताल ले जाने की सलाह दी। लेकिन सोमवार सुबह ही होपना ने दम तोड़ दिया। मृतक अपने पीछे 10 वर्षीय राजेश, 7 वर्षीय मोनासिस, 5 वर्षीय मेरिला और पत्नी खरी मुर्मू को छोड़ गया है। सोमवार दोपहर करीब 3 बजे शव के गांव पहुंचते ही माहौल मातम में बदल गया। ग्रामीणों में संक्रमण के डर से लोग एक-दूसरे के घर जाने से भी बच रहे हैं।

बीडीओ ने किया प्रभावित गांव का निरीक्षण
डायरिया के बढ़ते मामलों के बीच बीडीओ विजय प्रकाश मरांडी सोमवार को बांसपहाड़ी पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। उनके साथ चिकित्सा प्रभारी पदाधिकारी डा. सुमित आनंद, पीपीएम बिनोद पांडे समेत स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित थे। बीडीओ ने ग्रामीणों से बीमारी के लक्षण, पेयजल स्रोत और साफ-सफाई की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को कड़े निर्देश देते हुए कहा किकृहर ग्रामीण का ब्लड सैंपल जांच किया जाए, पूरे गांव में दवा की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, डोर-टू-डोर स्वास्थ्य जांच और उपचार कैंप चलाया जाए.

सिलंगी गांव में भी पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम
डायरिया के प्रसार को रोकने के लिए सोमवार को स्वास्थ्य विभाग की एक टीम सिलंगी गांव भी पहुंची। टीम ने ग्रामीणों को बीमारी से बचाव के उपाय बताते हुए जागरूक किया। इसमें विशेष रूप से कहा गयाकृ पानी उबालकर पीएं, स्वच्छ पेयजल का उपयोग करें, दस्त, उल्टी, बुखार जैसे लक्षण दिखते ही स्वास्थ्य सहिया या विभाग को तुरंत सूचित करें. स्वास्थ्य विभाग ने गांवों में क्लोरीन टैबलेट, ओआरएस और आवश्यक दवाओं का वितरण भी शुरू किया है।









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