झारखंड में दिसम्बर में हो सकता है नगर निकाय चुनाव
- SANTHAL PARGANA KHABAR
- Oct 30, 2025
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तैयारी में जुटी सरकार, राजनीतिक दलों ने कसी कमर
झारखंड में नगर निकाय चुनाव की तैयारी अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। लगातार तीन साल से लंबित यह चुनाव अब दिसंबर 2025 या जनवरी 2026 में होने की पूरी संभावना है। शहरी नगर निकाय क्षेत्र में होनेवाले चुनाव में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रुप से राजनीतिक दलों ने ताकत झोंकने की तैयारी कर ली है. बीजेपी नेता दीनदयाल वर्णवाल का मानना है कि पार्टी इस चुनाव के लिए पूरी तरह से तैयार है. हाईकोर्ट के फटकार के बाद सरकार इस चुनाव को मजबूर हुई है मगर इतने दिनों तक नगर निकाय जनप्रतिनिधि विहीन रहा जिससे हुए नुकसान के लिए जवाब देना होगा.

आरक्षण और हाईकोर्ट की भूमिका
राज्य सरकार ने पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए 14 प्रतिशत आरक्षण को मंजूरी दे दी है। इस फैसले से चुनाव कराने में जो कानूनी अड़चन थी, वह दूर हो गई है। झारखंड हाईकोर्ट ने चुनाव में देरी पर नाराजगी जताते हुए राज्य निर्वाचन आयोग से प्रगति रिपोर्ट मांगी है। अगली सुनवाई 10 नवंबर को निर्धारित है, जहां उम्मीद की जा रही है कि चुनाव कार्यक्रम पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

राज्य निर्वाचन आयोग की तैयारी
राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कई प्रमुख शहरोंकृरांची, धनबाद, जमशेदपुर, बोकारो और हजारीबागकृमें वार्डवार मतदान केंद्रों की सूची पहले ही जारी की जा चुकी है। इसके साथ ही उम्मीदवारों के नामांकन की संभावित समय-सारणी और आचार संहिता लागू करने की रूपरेखा भी तैयार की जा रही है।

आयोग और सरकार के बयान
राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की अध्यक्ष जानकी यादव ने कहा है कि आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं ताकि दिसंबर 2025 या अधिकतम जनवरी 2026 तक चुनाव संपन्न हो सकें। राज्य सरकार ने भी निर्वाचन आयोग को सभी आवश्यक सहयोग देने का आश्वासन दिया है।

पहली बार बीसी-1 और बीसी-2 के लिए सीटें निर्धारित
राज्य में 48 शहरी निकाय क्षेत्र हैं जहां ओबीसी ट्रिपल टेस्ट रिपोर्ट के बाद पहली बार बीसी-1 और बीसी-2 के लिए सीटें निर्धारित होंगी. पिछड़ा वर्ग आयोग के अनुशंसा पर शहरी निकाय क्षेत्र में अधिकतम आरक्षण 50% होगा जिसमें एससी, एसटी और बीसी-1, बीसी-2 के लिए सीटें निर्धारित होगी. मेयर,वार्ड पार्षद जैसे पदों का आरक्षण चक्रीय होगा. बता दें कि लगभग तीन वर्षों से निकाय चुनाव नहीं होने की वजह से राज्य में शहरी निकाय का कामकाज अधिकारियों पर है.









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