जनवितरण प्रणाली में लापरवाही पर दुमका डीसी अभिजीत सिन्हा का एक्शन मोड
- SANTHAL PARGANA KHABAR
- Nov 11
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“3 साल से निष्क्रिय कार्डधारकों के नाम होंगे रद्द”
दुमका. समाहरणालय सभागार में उपायुक्त अभिजीत सिन्हा की अध्यक्षता में डिस्ट्रिक्ट सप्लाई टास्क फोर्स की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जनवितरण प्रणाली से जुड़ी योजनाओं, वितरण व्यवस्था, और लाभुकों तक राशन पहुंचाने की प्रगति की समीक्षा की गई। डीसी ने साफ कहा, “लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पात्र लाभुकों तक राशन हर हाल में पहुँचना चाहिए।”

धोती-साड़ी वितरण योजना की भी गहन समीक्षा
बैठक में धोती-साड़ी वितरण योजना की प्रगति रिपोर्ट पेश की गई। उपायुक्त ने सभी प्रखंड अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी पात्र लाभुकों को शत-प्रतिशत वितरण सुनिश्चित करें। उन्होंने काठीकुंड, गोपीकांदर और दुमका प्रखंडों को विशेष रूप से चेतावनी देते हुए कहा कि “लंबित कार्यों को समयबद्ध रूप से पूरा करें, अन्यथा कार्रवाई तय है।”

सुषुप्त राशन कार्डों की जांच कृ निष्क्रिय लाभुकों पर गिरेगी गाज
उपायुक्त ने सुषुप्त (निष्क्रिय) राशन कार्डों की स्थिति पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया,
“जो लाभुक 1 वर्ष से राशन का उठाव नहीं कर रहे हैं, उन्हें तुरंत नोटिस जारी किया जाए।” साथ ही यह भी कहा गया कि जो लाभुक 3 वर्ष या उससे अधिक समय से राशन नहीं उठा रहे हैं, उनके नाम नियमों के अनुरूप राशन कार्ड सूची से हटाए जाएं। डीसी ने कहा कृ “फर्जी और निष्क्रिय कार्ड झारखंड की पीडीएस प्रणाली की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाते हैं, ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई होगी।”

राशन गोदामों की होगी सघन जांच कृ गुणवत्ता पर कोई समझौता नहीं
उपायुक्त अभिजीत सिन्हा ने सभी प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारियों (एमओ) को निर्देश दिया कि वे राशन की गुणवत्ता की नियमित जांच करें, गोदामों का सघन निरीक्षण करें, यह सुनिश्चित करें कि गोदामों में सुरक्षा, स्टॉक और वितरण की सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हों। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी स्तर पर अनियमितता पाई गई तो संबंधित पदाधिकारी के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।

“पारदर्शिता ही प्रशासन की पहचान” कृ डीसी अभिजीत सिन्हा
बैठक के अंत में डीसी ने कहा , “जनवितरण प्रणाली जनता से सीधा जुड़ा हुआ तंत्र है। इसमें पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों सुनिश्चित करनी होगी। जो पात्र हैं, उन्हें हर हाल में लाभ मिले कृ यही हमारी प्राथमिकता है।” उन्होंने सभी विभागीय पदाधिकारियों से कहा कि योजनाओं की फील्ड मॉनिटरिंग बढ़ाएं और लाभुकों की फीडबैक रिपोर्ट नियमित रूप से प्रस्तुत करें।









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